{"_id":"124-54450","slug":"Lucknow-54450-124","type":"story","status":"publish","title_hn":"जब होई जाये मन चंगा, टिनिक टिनिक हर गंगा...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जब होई जाये मन चंगा, टिनिक टिनिक हर गंगा...
Lucknow
Updated Thu, 14 Mar 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। ‘जहां झोपड़ी के बीच मा हवेली चमकै, वही घरवा मा कौनो परधान होई हैं..., जौन कविता सुनाय कै जगावै जनता कौनो वाहिद कलम के सान होई है..’। कवि वाहिद अली वाहिद के अवधी की ये पंक्तियां सुनाने की देर भर ही थी कि सभागार तालियों से गड़गड़ा उठा। मौका रहा उप्र भाषा संस्थान की ओर से बुधवार को आयोजित कवि सम्मेलन का। हिंदी संस्थान के यशपाल सभागार में हुए कवि सम्मेलन की अध्यक्षता भाषा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष गीतकार कवि पद्मभूषण गोपाल दास नीरज ने की। कवि सम्मेलन का आकर्षण अवधी भाषा में समीर शुक्ल खागा ने चुराया। मंच पर अवधी की तमाम कविताओं के साथ उनकी टिंनिक-टिंनिक गंगा... लोगों की जुबां पर ठहर गई।
कवि सम्मेलन का आगाज कवि देवकी नंदन शांत ने बुंदेलखंडी में मां वीणा वादिनी की वंदना ‘कंठ में भर दे राग, गवा दे फाग माई शारदा भवानी...’ से किया। उन्होंने यहां बुंदेली भाषा में चौकड़िया ‘हिंदी है महान अलबेली पा रई मान बुंदेली..., संस्कृत की बिटिया बुंदेली ब्रज की परम सहेली..., भोजपुरी खौं गरे लगा रई अवधी के संग खेली, अनुप्रास रूपक उपमा से गढ़ गई शांत पहेली...’ से रंग जमाया। मंच पर आए फतेहपुर के अवधी भाषा के कवि समीर शुक्ल खागा ने अगले बीस मिनट के लिए मंच थामा। मिड-डे मील का पड़वा खाय... आंगनबाड़ी भैंस चबाय... पर तालियां लूटने के बाद उन्होंने ‘हर हर करैं कठौती गंगा.. जब होई जाये मन चंगा.. टिनिक टिनिक हर गंगा..’ से ठहाके लगवाए। कवि सम्मेलन में डॉ. कलीम कैसर ने ‘चाहतों की जरा सी दस्तक पर दिल का दरवाजा खोल सकता है... इश्क ऐसी जुबान है प्यारे जिससे गूंगा भी बोल सकता है...’ सुनाया। कवयित्री डॉ. प्रीति कबीर ने ‘तन तो रेशमी दुशाला हुआ मन भुवन में उजाला हुआ, जब से जीवन में तुम आ गए मन तो अमृत का प्याला हुआ...’ से तालियां पाई। मऊ से आए भोजपुरी कवि कमलेश राय ने ‘सुख में सबके लागे सोना चानी रात... दुख में लागे लोटन लिखन कहानी रात’ सुनाया तो वाराणसी से आए अशोक राय ने ‘बड़ा दिन ले सहलों हमहूं अब न सहाई जे...’ से भोजपुरी का बखान किया। कवि सम्मेलन में उदयपुर की दीपिका माही, बहराइच के शरफ बहराइची, डॉ. प्रशस्ति मिश्र, डॉ. जनार्दन मणि पांडेय, मीरा दीक्षित और सरदार अवतारी सिंह तारी ने भी अपनी रचनाओं से रंग जमाया। अव्यवस्था के चलते दो घंटे देरी से शुरू हुए कवि सम्मेलन में लोगों की उपस्थिति काफी कम रही। कार्यक्रम का संचालन हास्य कवि सर्वेश अस्थाना ने किया।
तुम कैसे जीवित रहे इसका है महत्व...
मंच पर पद्मभूषण गोपाल दास नीरज खुद ही मौजूद हों तो श्रोताओं को उनकी पंक्तियों की आस रहती है, लेकिन बुधवार को जब संचालक ने उनसे दो पंक्तियां सुनाने को कहा तो उन्होंने अपना स्वास्थ्य खराब होने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने माइक से ही ‘तुम कितने जीवित रहे इसका नहीं महत्व... तुम कैसे जीवित रहे इसका है महत्व...’ सुनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
कवि सम्मेलन का आगाज कवि देवकी नंदन शांत ने बुंदेलखंडी में मां वीणा वादिनी की वंदना ‘कंठ में भर दे राग, गवा दे फाग माई शारदा भवानी...’ से किया। उन्होंने यहां बुंदेली भाषा में चौकड़िया ‘हिंदी है महान अलबेली पा रई मान बुंदेली..., संस्कृत की बिटिया बुंदेली ब्रज की परम सहेली..., भोजपुरी खौं गरे लगा रई अवधी के संग खेली, अनुप्रास रूपक उपमा से गढ़ गई शांत पहेली...’ से रंग जमाया। मंच पर आए फतेहपुर के अवधी भाषा के कवि समीर शुक्ल खागा ने अगले बीस मिनट के लिए मंच थामा। मिड-डे मील का पड़वा खाय... आंगनबाड़ी भैंस चबाय... पर तालियां लूटने के बाद उन्होंने ‘हर हर करैं कठौती गंगा.. जब होई जाये मन चंगा.. टिनिक टिनिक हर गंगा..’ से ठहाके लगवाए। कवि सम्मेलन में डॉ. कलीम कैसर ने ‘चाहतों की जरा सी दस्तक पर दिल का दरवाजा खोल सकता है... इश्क ऐसी जुबान है प्यारे जिससे गूंगा भी बोल सकता है...’ सुनाया। कवयित्री डॉ. प्रीति कबीर ने ‘तन तो रेशमी दुशाला हुआ मन भुवन में उजाला हुआ, जब से जीवन में तुम आ गए मन तो अमृत का प्याला हुआ...’ से तालियां पाई। मऊ से आए भोजपुरी कवि कमलेश राय ने ‘सुख में सबके लागे सोना चानी रात... दुख में लागे लोटन लिखन कहानी रात’ सुनाया तो वाराणसी से आए अशोक राय ने ‘बड़ा दिन ले सहलों हमहूं अब न सहाई जे...’ से भोजपुरी का बखान किया। कवि सम्मेलन में उदयपुर की दीपिका माही, बहराइच के शरफ बहराइची, डॉ. प्रशस्ति मिश्र, डॉ. जनार्दन मणि पांडेय, मीरा दीक्षित और सरदार अवतारी सिंह तारी ने भी अपनी रचनाओं से रंग जमाया। अव्यवस्था के चलते दो घंटे देरी से शुरू हुए कवि सम्मेलन में लोगों की उपस्थिति काफी कम रही। कार्यक्रम का संचालन हास्य कवि सर्वेश अस्थाना ने किया।
विज्ञापन
तुम कैसे जीवित रहे इसका है महत्व...
मंच पर पद्मभूषण गोपाल दास नीरज खुद ही मौजूद हों तो श्रोताओं को उनकी पंक्तियों की आस रहती है, लेकिन बुधवार को जब संचालक ने उनसे दो पंक्तियां सुनाने को कहा तो उन्होंने अपना स्वास्थ्य खराब होने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने माइक से ही ‘तुम कितने जीवित रहे इसका नहीं महत्व... तुम कैसे जीवित रहे इसका है महत्व...’ सुनाया।
विज्ञापन