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जब ब्योरा ही नहीं तो कैसे होगी फीस माफ
Lucknow
Updated Wed, 06 Feb 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। प्रदेश में पांच लाख आय वाले अभिभावकों के पाल्यों की संतानों को उच्च शिक्षा देने की सरकारी कवायद पर कॉलेज ही भारी पड़ रहे हैं। शासन ने अक्टूबर में आदेश जारी कर विश्वविद्यालय एवं कॉलेजों से ऐसे छात्रों की संख्या जाननी चाही थी जिससे इस मद में आने वाले व्यय की जानकारी हो सके और उसकी व्यवस्था की जा सके। पत्र भेजने के तीन महीने बाद भी लखनऊ विश्वविद्यालय के 85 फीसदी कॉलेजों ने ब्योरा भेजने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसे में जब छात्रों का ब्योरा नहीं पहुंचेगा तो फीस कैसे माफ होगी।
सरकार ने पांच लाख वार्षिक आय से कम आय वाले परिवार केछात्र-छात्राओं की फीस माफ करने का फैसला किया था। उच्च शिक्षा ने इसकी पहल करते हुए सभी राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों से ऐसे सभी छात्रों का ब्योरा मांगा था जिनके परिजनों की आय पांच लाख वार्षिक से कम है। पांच लाख तक आय वाले सभी छात्र-छात्राओं का ब्योरा दो भागों में अलग-अलग मांगा गया था। पहले भाग में शून्य से दो लाख तक आय वाले छात्र-छात्राओं का ब्योरा देना था। दूसरे भाग में दो लाख से पांच लाख तक की आय वाले छात्र-छात्राओं का ब्योरा देना था। यह सारा ब्योरा आने के बाद उच्च शिक्षा विभाग को फीस माफी की प्रक्रिया तय करनी थी। इस संदर्भ में पिछले वर्ष 8 अक्टूबर को शासन ने विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर एक सप्ताह के भीतर शुल्क माफी का ब्योरा और संस्तुति शासन को भेजा थी।
तीन रिमाइंडर के बाद भूल गए कॉलेज
शासन का पत्र मिलने के बाद अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में लविवि प्रशासन ने अपने सभी कॉलेजों को पत्र लिखकर उन छात्रों का ब्योरा मांगा जिनके परिजनों की आय सालाना पांच लाख है। पहले तो कॉलेजों ने पत्र को कान नहीं दिया। इसके बाद लविवि द्वारा रिमाइंडर भेजे जाने का दौरा शुरू हुआ। तीन रिमाइंडर के बाद भी तीन महीने में अभी तक लविवि के 117 कॉलेजों में महज 20 कॉलेजों ने ही जानकारी भेजी है जबकि 97 कॉलेज अभी तक इसके लिए समय नहीं निकाल पाए हैं। ऐसे में कॉलेजों की लापरवाही उन अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ सकती है जो छूट के दायरे में आने के बाद भी मोटी फीस भर रहें है और जानकारी न भेजे जाने के चलते आगे भी इसके लिए बाध्य होंगे। लविवि के कुलसचिव जेबी सिंह का कहना है कि कॉलेजों को पत्र भेजा गया है। सूचना न भेजे जाने की स्थिति में यदि छात्रों का हित प्रभावित होता है तो उसकी जिम्मेदारी कॉलेजों की होगी।
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सरकार ने पांच लाख वार्षिक आय से कम आय वाले परिवार केछात्र-छात्राओं की फीस माफ करने का फैसला किया था। उच्च शिक्षा ने इसकी पहल करते हुए सभी राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों से ऐसे सभी छात्रों का ब्योरा मांगा था जिनके परिजनों की आय पांच लाख वार्षिक से कम है। पांच लाख तक आय वाले सभी छात्र-छात्राओं का ब्योरा दो भागों में अलग-अलग मांगा गया था। पहले भाग में शून्य से दो लाख तक आय वाले छात्र-छात्राओं का ब्योरा देना था। दूसरे भाग में दो लाख से पांच लाख तक की आय वाले छात्र-छात्राओं का ब्योरा देना था। यह सारा ब्योरा आने के बाद उच्च शिक्षा विभाग को फीस माफी की प्रक्रिया तय करनी थी। इस संदर्भ में पिछले वर्ष 8 अक्टूबर को शासन ने विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर एक सप्ताह के भीतर शुल्क माफी का ब्योरा और संस्तुति शासन को भेजा थी।
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तीन रिमाइंडर के बाद भूल गए कॉलेज
शासन का पत्र मिलने के बाद अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में लविवि प्रशासन ने अपने सभी कॉलेजों को पत्र लिखकर उन छात्रों का ब्योरा मांगा जिनके परिजनों की आय सालाना पांच लाख है। पहले तो कॉलेजों ने पत्र को कान नहीं दिया। इसके बाद लविवि द्वारा रिमाइंडर भेजे जाने का दौरा शुरू हुआ। तीन रिमाइंडर के बाद भी तीन महीने में अभी तक लविवि के 117 कॉलेजों में महज 20 कॉलेजों ने ही जानकारी भेजी है जबकि 97 कॉलेज अभी तक इसके लिए समय नहीं निकाल पाए हैं। ऐसे में कॉलेजों की लापरवाही उन अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ सकती है जो छूट के दायरे में आने के बाद भी मोटी फीस भर रहें है और जानकारी न भेजे जाने के चलते आगे भी इसके लिए बाध्य होंगे। लविवि के कुलसचिव जेबी सिंह का कहना है कि कॉलेजों को पत्र भेजा गया है। सूचना न भेजे जाने की स्थिति में यदि छात्रों का हित प्रभावित होता है तो उसकी जिम्मेदारी कॉलेजों की होगी।
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