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केजीएमयू में बनेगा फायर फाइटिंग सिस्टम
Lucknow
Updated Wed, 23 Jan 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। केजीएमयू में अब आग के खतरे से निपटने के इंतजाम किए जाएंगे। शासन ने साढ़े सात करोड़ रुपाए की लागत से बनने वाले फायर फाइटिंग सिस्टम को मंजूरी दे दी है। इस आधुनिक सिस्टम से पूरे परिसर में कहीं भी आग लगने पर आसानी से काबू पाया जा सकेगा। इसके लिए कंट्रोल रूम बनाकर प्रशिक्षित स्टाफ तैनात किया जाएगा।
चिकित्सा विश्वविद्यालय में गई बार आग की घटनाएं हो चुकी हैं। आग पर काबू पाने के लिए चिविवि प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। कई बार फायर फाइटिंग सिस्टम स्थापित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि पिछले वर्ष कई आग लगने की घटनाओं के बाद एक बार फिर से पूरा ब्योरा शासन को भेजा गया। अब इस प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है। साढ़े सात करोड़ की लागत से जल्द फायर फाइटिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा। केजीएमयू की पुरानी बिल्डिंग के सोलह से अधिक विभागों में पाइप लाइन डाली जाएगी। इसके बाद पीआरओ कार्यालय के सामने बनी नई इमारत तक अंडर ग्राउंड पाइप लाइन होगी। इस लाइन को डेंटल के पीछे नई इमारत से जोड़ा जाएगा। सबसे खास बात यह है कि डबल पाइप लाइन डाली जाएगी। एक में कोई समस्या आने पर दूसरे से सप्लाई की जा सकेगी। बड़ी घटनाओं में दोनों से एक साथ पानी छोड़ा जाएगा। पानी सप्लाई के लिए नलकूप स्थापित होगा। दो हजार लीटर से अधिक क्षमता वाली पानी की टंकी होगी। ऐसे में तत्काल आग पर काबू किया जा सकेगा।
खामी जो होगी दूर
पुरानी बिल्डिंग के 16 से अधिक विभागों व प्रशासनिक कार्यालय, पैथोलाजी, पीआरओ कार्यालय में आग बुझाने का कोई इंतजाम नहीं है। नई इमारतों में आग बुझाने के छोटी-छोटी मशीनें हैं, जो पार्याप्त नहीं हैं। यहां तक कि रसोई में भी आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। जबकि पुरानी बिल्डिंग में वर्षों पुरानी वायरिंग है। इसमें आए दिन शार्ट सर्किट की घटनाएं होती रहती हैं।
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प्रमुख घटनाएं
गांधी वार्ड के ग्राउंड फ्लोर पर पिछले वर्ष अप्रैल में आग लगी, कैंसर विभाग और रसोई में जून में आग लगी थी। इसके अलावा एक बार सर्जरी विभाग की ओटी की एसी से आग लग चुकी है। अधिकारियों की मानें तो हर वर्ष छोट-बड़े मिलाकर दस से अधिक हादसे होते हैं।
हमारे यहां साढ़े सात करोड़ की लागत से बनने वाले आटोमेटिक फायर फाइटिंग सिस्टम को मंजूरी मिल गई है। इसका निर्माण जल्द ही शुरू किया जाएगा। इसके बनने से आग पर आसानी से काबू किया जा सकेगा।
डॉ एसएन शंखवार, सीएमएस केजीएमयू
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चिकित्सा विश्वविद्यालय में गई बार आग की घटनाएं हो चुकी हैं। आग पर काबू पाने के लिए चिविवि प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। कई बार फायर फाइटिंग सिस्टम स्थापित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि पिछले वर्ष कई आग लगने की घटनाओं के बाद एक बार फिर से पूरा ब्योरा शासन को भेजा गया। अब इस प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है। साढ़े सात करोड़ की लागत से जल्द फायर फाइटिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा। केजीएमयू की पुरानी बिल्डिंग के सोलह से अधिक विभागों में पाइप लाइन डाली जाएगी। इसके बाद पीआरओ कार्यालय के सामने बनी नई इमारत तक अंडर ग्राउंड पाइप लाइन होगी। इस लाइन को डेंटल के पीछे नई इमारत से जोड़ा जाएगा। सबसे खास बात यह है कि डबल पाइप लाइन डाली जाएगी। एक में कोई समस्या आने पर दूसरे से सप्लाई की जा सकेगी। बड़ी घटनाओं में दोनों से एक साथ पानी छोड़ा जाएगा। पानी सप्लाई के लिए नलकूप स्थापित होगा। दो हजार लीटर से अधिक क्षमता वाली पानी की टंकी होगी। ऐसे में तत्काल आग पर काबू किया जा सकेगा।
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खामी जो होगी दूर
पुरानी बिल्डिंग के 16 से अधिक विभागों व प्रशासनिक कार्यालय, पैथोलाजी, पीआरओ कार्यालय में आग बुझाने का कोई इंतजाम नहीं है। नई इमारतों में आग बुझाने के छोटी-छोटी मशीनें हैं, जो पार्याप्त नहीं हैं। यहां तक कि रसोई में भी आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। जबकि पुरानी बिल्डिंग में वर्षों पुरानी वायरिंग है। इसमें आए दिन शार्ट सर्किट की घटनाएं होती रहती हैं।
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प्रमुख घटनाएं
गांधी वार्ड के ग्राउंड फ्लोर पर पिछले वर्ष अप्रैल में आग लगी, कैंसर विभाग और रसोई में जून में आग लगी थी। इसके अलावा एक बार सर्जरी विभाग की ओटी की एसी से आग लग चुकी है। अधिकारियों की मानें तो हर वर्ष छोट-बड़े मिलाकर दस से अधिक हादसे होते हैं।
हमारे यहां साढ़े सात करोड़ की लागत से बनने वाले आटोमेटिक फायर फाइटिंग सिस्टम को मंजूरी मिल गई है। इसका निर्माण जल्द ही शुरू किया जाएगा। इसके बनने से आग पर आसानी से काबू किया जा सकेगा।
डॉ एसएन शंखवार, सीएमएस केजीएमयू