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एनसीईआरटी बुक्स आसान करेंगी सोशल साइंस की राह
Lucknow
Updated Sat, 19 Jan 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे बच्चे आमतौर पर इतिहास से बचते नजर आते हैं। लगातार पढ़ने के बाद भी तारीखों को याद न रख पाने की शिकायतें सामने आती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह सारी परेशानी बच्चों के रटने की आदत के कारण सामने आती हैं। रटने की बजाय इतिहास की घटनाओं को आपस में जोड़कर पढ़ने की कोशिशें करनी चाहिए। सीबीएसई दसवीं में सामाजिक विज्ञान की तैयारी के लिए एनसीईआरटी की किताबें ही पर्याप्त है। इस समय स्टूडेंट्स अन्य किताबों में उलझने के बजाए सिर्फ एनसीईआरटी की बुक्स पर ही ध्यान दें। तैयारी के समय बच्चों को प्रश्नपत्र के स्वरूप पर भी ध्यान देने की जरूरत है। ध्यान रखना होगा कि प्रश्नपत्र में इतिहास के सेक्शन में विकल्प उपलब्ध होते है। जबकि भूगोल, राजनीतिक विज्ञान व अर्थशास्त्र के सेक्शन में नहीं। बेहतर अंक पाने के लिए बहु विकल्पीय प्रश्नों पर ज्यादा ध्यान देना बेहतर होगा।
प्रश्न पत्र के पैटर्न पर दें ध्यान ः सीबीएसई दसवीं सामाजिक विज्ञान के समेटिव असेसमेंट-2 के सिलेबस में चार यूनिट शामिल की गई हैं। 80 अंकों के इस प्रश्नपत्र में 36 सवाल पूछे जाएंगे। इसमें 16 बहु विकल्पीय, 13 लघु उत्तरीय, पांच विस्तृत और दो मानचित्र आधारित सवाल शामिल हैं। इतिहास, भूगोल, राजनीतिज्ञ विज्ञान और अर्थशास्त्र से 20-20 अंकों के सवाल पूछे जाते हैं। अवध कॉलिजिएट की सामाजिक अध्ययन की शिक्षिका प्रेमलता यादव कहती हैं कि समेटिव असेसमेंट-2 के सिलेबस में आपदा प्रबंधन यूनिट को शामिल नहीं किया गया है। इतिहास की तैयारी के दौरान बच्चों को फ्रांस की क्रांति व नेपोलियन कोड, वियना कांग्रेस, इटली व जर्मनी का एकीकरण, यूके का निर्माण, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी की भूमिका, दांडी मार्च, जलियांवाला बाग और रोलेक्ट एक्ट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वहीं राजनीतिज्ञ विज्ञान में विभिन्न टॉपिक्स की महत्वपूर्ण परिभाषाओं को उदाहरण समेत याद करना चाहिए। राजनीति के दबाव समूह, आंदोलन, राजनीतिक दल व दबाव समूह के बीच संबंध, राजनीतिक दल के कार्य और जरूरत, भारत में राष्ट्रीय व प्रादेशिक राजनीतिक दल, राजनीतिक दलों में सुधार, कांग्रेस, बीजेपी, बीएसपी व कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, प्रजातंत्र बनाम राजतंत्र और प्रजातंत्र की चुनौतियां जैसे टॉपिक्स को जरूर पढ़ लें।
मानचित्र भरते समय बरतें सावधानी ः सोशल साइंस के प्रश्नपत्र में मानचित्र की अहम भूमिका होती है। रानी लक्ष्मीबाई सीनियर सेकेंडरी स्कूल की शिक्षिका श्वेता सिंह के मुताबिक मानचित्र के लिहाज से इतिहास में इंडियन नेशनल कांग्रेस का कलकत्ता सेशन (1920), नागपुर सेशन (1920), मद्रास सेशन (1927) व लाहौर सेशन (1929) को पढ़ लें। इसके अलावा स्वतंत्रता संग्राम में विभिन्न आंदोलनों के प्रमुख केन्द्र जिसमें चंपारण (बिहार), खेड़ा (गुजरात), अहमदाबाद (गुजरात), अमृतसर (पंजाब), चौरी-चौरा (उत्तर प्रदेश), बारडौली (गुजरात), दांडी (गुजरात) पर ध्यान दें। भूगोल में लौह अयस्क, कोयला की खानें व ऑयल फील्ड, पावर प्लांट, कॉटन टेक्सटाइल इंडस्ट्री, वूलेन इंडस्ट्री, सिल्क इंडस्ट्री, आइरन व स्टील प्लांट, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क, गोल्डन क्वाड्रिलेटर, एनएच-1, एनएच-2 व एनएच-7 के साथ मुख्य बंदरगाह और अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी फोकस क रना चाहिए। शिक्षिका श्वेता सिंह कहती हैं कि भूगोल पढ़ने के दौरान मानचित्र पर अधिक से अधिक फोकस करें। खनिजों के प्रकार, संसाधनों के संरक्षण की जरूरत, कोयला पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस का महत्व, भारत में लोहे की मुख्य खानें, उद्योगों का योगदान, विनिर्माण क्षेत्र का महत्व, उद्योगों का वर्गीकरण, उद्योग जनित प्रदूषण, सीमा सड़कों का महत्व और पाइपलाइन यातायात पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा अर्थशास्त्र में मुद्रा के कार्य, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, स्वयं सेवा समूह, बहुराष्ट्रीय कंपनी का अर्थ व विवरण, स्पेशल इकोनॉमिक जोन, वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन, ट्रेड बैरियर्स, ग्लोबलाइजेशन का प्रभाव, उपभोक्ता अधिकार, उपभोक्ता जागरूकता की जरूरत, उपभोक्ता का दायित्व, उपभोक्ता फोरम की भूमिका आदि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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प्रश्न पत्र के पैटर्न पर दें ध्यान ः सीबीएसई दसवीं सामाजिक विज्ञान के समेटिव असेसमेंट-2 के सिलेबस में चार यूनिट शामिल की गई हैं। 80 अंकों के इस प्रश्नपत्र में 36 सवाल पूछे जाएंगे। इसमें 16 बहु विकल्पीय, 13 लघु उत्तरीय, पांच विस्तृत और दो मानचित्र आधारित सवाल शामिल हैं। इतिहास, भूगोल, राजनीतिज्ञ विज्ञान और अर्थशास्त्र से 20-20 अंकों के सवाल पूछे जाते हैं। अवध कॉलिजिएट की सामाजिक अध्ययन की शिक्षिका प्रेमलता यादव कहती हैं कि समेटिव असेसमेंट-2 के सिलेबस में आपदा प्रबंधन यूनिट को शामिल नहीं किया गया है। इतिहास की तैयारी के दौरान बच्चों को फ्रांस की क्रांति व नेपोलियन कोड, वियना कांग्रेस, इटली व जर्मनी का एकीकरण, यूके का निर्माण, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी की भूमिका, दांडी मार्च, जलियांवाला बाग और रोलेक्ट एक्ट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वहीं राजनीतिज्ञ विज्ञान में विभिन्न टॉपिक्स की महत्वपूर्ण परिभाषाओं को उदाहरण समेत याद करना चाहिए। राजनीति के दबाव समूह, आंदोलन, राजनीतिक दल व दबाव समूह के बीच संबंध, राजनीतिक दल के कार्य और जरूरत, भारत में राष्ट्रीय व प्रादेशिक राजनीतिक दल, राजनीतिक दलों में सुधार, कांग्रेस, बीजेपी, बीएसपी व कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, प्रजातंत्र बनाम राजतंत्र और प्रजातंत्र की चुनौतियां जैसे टॉपिक्स को जरूर पढ़ लें।
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मानचित्र भरते समय बरतें सावधानी ः सोशल साइंस के प्रश्नपत्र में मानचित्र की अहम भूमिका होती है। रानी लक्ष्मीबाई सीनियर सेकेंडरी स्कूल की शिक्षिका श्वेता सिंह के मुताबिक मानचित्र के लिहाज से इतिहास में इंडियन नेशनल कांग्रेस का कलकत्ता सेशन (1920), नागपुर सेशन (1920), मद्रास सेशन (1927) व लाहौर सेशन (1929) को पढ़ लें। इसके अलावा स्वतंत्रता संग्राम में विभिन्न आंदोलनों के प्रमुख केन्द्र जिसमें चंपारण (बिहार), खेड़ा (गुजरात), अहमदाबाद (गुजरात), अमृतसर (पंजाब), चौरी-चौरा (उत्तर प्रदेश), बारडौली (गुजरात), दांडी (गुजरात) पर ध्यान दें। भूगोल में लौह अयस्क, कोयला की खानें व ऑयल फील्ड, पावर प्लांट, कॉटन टेक्सटाइल इंडस्ट्री, वूलेन इंडस्ट्री, सिल्क इंडस्ट्री, आइरन व स्टील प्लांट, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क, गोल्डन क्वाड्रिलेटर, एनएच-1, एनएच-2 व एनएच-7 के साथ मुख्य बंदरगाह और अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी फोकस क रना चाहिए। शिक्षिका श्वेता सिंह कहती हैं कि भूगोल पढ़ने के दौरान मानचित्र पर अधिक से अधिक फोकस करें। खनिजों के प्रकार, संसाधनों के संरक्षण की जरूरत, कोयला पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस का महत्व, भारत में लोहे की मुख्य खानें, उद्योगों का योगदान, विनिर्माण क्षेत्र का महत्व, उद्योगों का वर्गीकरण, उद्योग जनित प्रदूषण, सीमा सड़कों का महत्व और पाइपलाइन यातायात पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा अर्थशास्त्र में मुद्रा के कार्य, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, स्वयं सेवा समूह, बहुराष्ट्रीय कंपनी का अर्थ व विवरण, स्पेशल इकोनॉमिक जोन, वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन, ट्रेड बैरियर्स, ग्लोबलाइजेशन का प्रभाव, उपभोक्ता अधिकार, उपभोक्ता जागरूकता की जरूरत, उपभोक्ता का दायित्व, उपभोक्ता फोरम की भूमिका आदि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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