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याद है.. जब कैंटीन में खुद बनाई थी मैगी
Lucknow
Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
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लखनऊ। ‘अरे यार! ये तो वही सिस्टम है जिस पर रात-रातभर बैठकर कॉलेज के प्रोजेक्ट्स तैयार किया करते थे। ...तुझे याद है वो रात, जब तीन बजे भूख लगी थी और कैंटीन में मैगी बनाकर खाई थी। हां यार पर अब वो आजादी कहां?’ अपनी शिक्षण संस्था की 25वीं वर्षगांठ पर देश-विदेश से जुटे आईआईएम के पूर्व छात्रों ने कुछ इसी अंदाज में अपनी यादों को ताजा किया। वहीं, पुराने छात्रों को दोबारा संस्थान में देखकर रिटायर्ड प्रो. एसके चक्रवर्ती की आंखें नम हो गईं। आईआईएम लखनऊ के 25वीं वर्षगांठ पर पूर्व छात्रों के मिलन समारोह नास्टैल्जीअ-2012 में 1987, 1992,1997, 2002 और 2009 बैच के 250 से ज्यादा पूर्व छात्र पहुंचे। सोमवार को संस्थान के निदेशक डॉ. देवी सिंह ने इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का आगाज किया। संस्थान के पहले निदेशक डॉ. ईश्वर दयाल ने वीडियो लिंक के माध्यम से उन्होंने संस्थान को अपनी शुभकामनाएं भेजीं। मंगलवार को कार्यक्रम की शुरुआत बैक टू क्लास के साथ हुई। यहां पुराने छात्रों को बीते कल में जाने और क्लास रूम मस्ती को दोहराने का मौका मिला। इसमें आईआईएम लखनऊ की स्थापना से जुड़े प्रो. एसके चक्रवर्ती ने उनकी क्लास ली। इसके बाद पूर्व छात्र संगठन की जनरल बॉडी मीटिंग हुई जहां सभी ने कार्यक्रम आयोजन से लेकर उसे और बेहतर बनाने पर चर्चा की। इन लम्हों को यादगार बनाने के लिए पूर्व छात्रों की ओर से पौधरोपण कार्यक्रम भी हुआ। इसमें हर बैच के प्रतिनिधि ने नॉस्टैल्जीअ-2012 और बैच के नाम के साथ पेड़ लगाए। 1987 बैच के छात्र पुराने परिसर को भी देखने पहुंचे। रात में रेट्रो नाइट में सबने जमकर मस्ती की। बुधवार को पूर्व छात्रों ने आईआईएम और उसके बाहर के अपने अनुभवों को साझा किया। हाई टी पर शाम चार बजे पूर्व छात्रों ने मौजूदा छात्रों के साथ अनुभव बांटे। शाम पांच बजे पुराने स्टाफ के सदस्यों के लिए आयोजित कार्यशाला में पूर्व छात्रों ने उन्हें धन्यवाद दिया। नास्टैल्जीअ में 1987 बैच का प्रतिनिधित्व एसटीएस-टेक की प्रोमोटर डायरेक्टर तुहिन सेन ने किया। 1992 बैच से एचडीबी फाइनेंस सर्विसेज के डायरेक्टर रमेश जी, 1997 बैच से मेटल इंजीनियरिंग एंड फोर्जिंग को. के प्रोमोटर निदेशक अमित अग्रवाल, 2002 बैच से टीसीएस एंड हेल्थ की निदेशक पल्लवी जैन और रेड एफएम के आरएसएम मोनीश चक्रवर्ती ने 2007 बैच की ओर से कृतज्ञता जाहिर की। गोदरेज के इंटरनेशनल मार्केटिंग प्रेसिडेंट और 1987 बैच के शशांक सिन्हा ने विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।
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