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बाड़े से बाहर निकले चिंपैंजी, घूमा जू, मचा हड़कंप
Lucknow
Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
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लखनऊ। लखनऊ जू के स्टार चिंपैंजी जेसन व निकिता सोमवार को एक साथ जू की सैर पर निकल पड़े। बाड़े में टूटकर आ गिरी पेड़ की एक डाल की मदद से बाहर निकले दोनों चिंपैंजी को देखकर जू स्टाफ में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में एक्टिव हुए स्टाफ ने उन्हें वापस भेजने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। निकिता को तो बहला-फुसलाकर थोड़ी देर में भीतर पहुंचा दिया गया, लेकिन जेसन ने पूरे स्टाफ को खूब छकाया। करीब घंटे भर तक चले ऑपरेशन के बाद उसे ट्रैंकुलाइज कर बाड़े में पहुंचाया जा सका। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान आला अधिकारियों ने जू के सारे इंट्री और एग्जिट गेट सील करा दिए थे, जिससे वन्यजीव शहर में न जा सकें। इसके अलावा अन्य वन्यजीवों के बाड़ों के पास भी निगरानी बढ़ा दी गई और स्टाफ को तैनात कर दिया गया था ताकि जेसन किसी हिंसक जानवर के बाड़े में न चला जाए।
सोमवार को लखनऊ प्राणि उद्यान की साप्ताहिक बंदी थी। इसके चलते जू स्टाफ अन्य कामों में लगा हुआ था। दिन में पौने दो बजे बालरेल स्टेशन के पास से गुजर रहे कुछ कर्मियों ने जेसन और निकिता को साथ-साथ घूमते देखा। जेसन आगे-आगे चल रहा था और निकिता पहले वहां रखी कुर्सी पर बैठी थी फिर वह भी जेसन के साथ चल दी। यह नजारा देख जू कर्मियों में अफरा-तफरी मच गई और आनन-फानन में इसकी सूचना बाकी स्टाफ को देने के साथ उपनिदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला और निदेशक रेणु सिंह को दी गई। स्टाफ ने दोनों को घेरने और उन्हें काबू में करने के लिए तत्काल प्रयास शुरू कर दिए। इस बीच सांप घर तिराहे के पास दोनों अलग-अलग हो गए। हेडकीपर बलराम के साथ चिपैंजी बाड़े के कीपर सुरिंदर समेत अन्य स्टाफ ने निकिता को केले दिखाए और उसे बहलाने-फुसलाने की कोशिशें शुरू हो गईं। इसके थोड़ी देर बाद निकिता पेड़ के रास्ते बाड़े के भीतर पहुंच गई।
जेसन ने छकाया, खूब की सैर
देखे जाने के बाद पहले 10 मिनट में मादा चिंपैंजी निकिता तो बाड़े के भीतर पहुंच गई, लेकिन जेसन ने खूब छकाया। निकिता से अलग होने के बाद जेसन रेलवे ट्रैक पार करते हुए बालरेल स्टेशन के बाद मेन गेट की ओर बढ़ा। वहां स्टाफ की चहल-पहल होने पर वह उछल-कूद मचाने के साथ बालरेल ट्रैक के किनारे-किनारे पार्क होेते हुए हिप्पो बाड़े की ओर बढ़ चला। एक निजी वाहन में स्टाफ के साथ सवार हुए जू के वरिष्ठ चिकित्सक-डिप्टी डायरेक्टर डॉ. उत्कर्ष ने पीछा करते हुए उसे घेरना शुरू किया। इस बीच, डिप्टी रेंजर आरकेपी सिंह, हेडकीपर बलराम, सुरिंदर, जसवंत और हरेन्द्र ने उसे पार्क में आगे बढ़ने से रोका। डॉ. उत्कर्ष ने झूले के दूसरी ओर हिप्पो पार्क की बाउंड्री के पास बैठे जेसन को ट्रैंकुलाइज किया। इसके बाद टीम ने उसे उठाकर बाड़े में शिफ्ट किया, जहां करीब आधे घंटे बाद उसे होश आया। प्राथमिक जांचों के बाद जेसन को बाड़े में निकिता के पास छोड़ दिया गया।
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पहले भी निकल चुके हैं चिंपैंजी-बाघ
सूत्रों की मानें तो करीब 20 साल पहले एक चिंपैंजी कुछ इसी तरह से बरसात के मौसम में बाहर निकल आया था। तब तो वह मेनगेट से बाहर भी पहुंच गया था और सड़कों पर घूम रहा था। बाद में उसे काबू कर लिया गया था। इसी तरह वर्ष 2001 में डी. प्रभाकर के कार्यकाल में रायल बंगाल टाइगर को खाना खिलाने के दौरान कीपर की गलती से गेट खुला रहा गया। इसके बाद बाघ टहलते हुए बाहर आ गया, लेकिन तुरंत ही वापस भी चला गया और कीपर ने बाड़ा बंद किया।
‘सोमवार को साप्ताहिक बंदी के दिन दोपहर करीब दो बजे बाड़े के पास पेड़ की टूटी डाल की सहायता से चिपैंजी जेसन व निकिता बाहर आ गए थे। निकिता को तुरंत स्टाफ ने वापस बाड़े में भेज दिया, लेकिन जेसन को आधे-पौने घंटे बाद हिप्पो बाड़े के पास ट्रैंकुलाइज कर वापस भेजा गया। पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई हताहत नहीं हुआ है।’
रेणु सिंह, निदेशक, प्राणि उद्यान
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सोमवार को लखनऊ प्राणि उद्यान की साप्ताहिक बंदी थी। इसके चलते जू स्टाफ अन्य कामों में लगा हुआ था। दिन में पौने दो बजे बालरेल स्टेशन के पास से गुजर रहे कुछ कर्मियों ने जेसन और निकिता को साथ-साथ घूमते देखा। जेसन आगे-आगे चल रहा था और निकिता पहले वहां रखी कुर्सी पर बैठी थी फिर वह भी जेसन के साथ चल दी। यह नजारा देख जू कर्मियों में अफरा-तफरी मच गई और आनन-फानन में इसकी सूचना बाकी स्टाफ को देने के साथ उपनिदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला और निदेशक रेणु सिंह को दी गई। स्टाफ ने दोनों को घेरने और उन्हें काबू में करने के लिए तत्काल प्रयास शुरू कर दिए। इस बीच सांप घर तिराहे के पास दोनों अलग-अलग हो गए। हेडकीपर बलराम के साथ चिपैंजी बाड़े के कीपर सुरिंदर समेत अन्य स्टाफ ने निकिता को केले दिखाए और उसे बहलाने-फुसलाने की कोशिशें शुरू हो गईं। इसके थोड़ी देर बाद निकिता पेड़ के रास्ते बाड़े के भीतर पहुंच गई।
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जेसन ने छकाया, खूब की सैर
देखे जाने के बाद पहले 10 मिनट में मादा चिंपैंजी निकिता तो बाड़े के भीतर पहुंच गई, लेकिन जेसन ने खूब छकाया। निकिता से अलग होने के बाद जेसन रेलवे ट्रैक पार करते हुए बालरेल स्टेशन के बाद मेन गेट की ओर बढ़ा। वहां स्टाफ की चहल-पहल होने पर वह उछल-कूद मचाने के साथ बालरेल ट्रैक के किनारे-किनारे पार्क होेते हुए हिप्पो बाड़े की ओर बढ़ चला। एक निजी वाहन में स्टाफ के साथ सवार हुए जू के वरिष्ठ चिकित्सक-डिप्टी डायरेक्टर डॉ. उत्कर्ष ने पीछा करते हुए उसे घेरना शुरू किया। इस बीच, डिप्टी रेंजर आरकेपी सिंह, हेडकीपर बलराम, सुरिंदर, जसवंत और हरेन्द्र ने उसे पार्क में आगे बढ़ने से रोका। डॉ. उत्कर्ष ने झूले के दूसरी ओर हिप्पो पार्क की बाउंड्री के पास बैठे जेसन को ट्रैंकुलाइज किया। इसके बाद टीम ने उसे उठाकर बाड़े में शिफ्ट किया, जहां करीब आधे घंटे बाद उसे होश आया। प्राथमिक जांचों के बाद जेसन को बाड़े में निकिता के पास छोड़ दिया गया।
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पहले भी निकल चुके हैं चिंपैंजी-बाघ
सूत्रों की मानें तो करीब 20 साल पहले एक चिंपैंजी कुछ इसी तरह से बरसात के मौसम में बाहर निकल आया था। तब तो वह मेनगेट से बाहर भी पहुंच गया था और सड़कों पर घूम रहा था। बाद में उसे काबू कर लिया गया था। इसी तरह वर्ष 2001 में डी. प्रभाकर के कार्यकाल में रायल बंगाल टाइगर को खाना खिलाने के दौरान कीपर की गलती से गेट खुला रहा गया। इसके बाद बाघ टहलते हुए बाहर आ गया, लेकिन तुरंत ही वापस भी चला गया और कीपर ने बाड़ा बंद किया।
‘सोमवार को साप्ताहिक बंदी के दिन दोपहर करीब दो बजे बाड़े के पास पेड़ की टूटी डाल की सहायता से चिपैंजी जेसन व निकिता बाहर आ गए थे। निकिता को तुरंत स्टाफ ने वापस बाड़े में भेज दिया, लेकिन जेसन को आधे-पौने घंटे बाद हिप्पो बाड़े के पास ट्रैंकुलाइज कर वापस भेजा गया। पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई हताहत नहीं हुआ है।’
रेणु सिंह, निदेशक, प्राणि उद्यान