जेब में एटीएम कार्ड, लुट गई सारी पूंजी

Lucknow Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। एक रिटायर्ड शिक्षक के बैंक खाते से त्र9 लाख 38 हजार निकाल लिए जाने का मामला साइबर क्राइम सेल में दर्ज किया गया है। इस दौरान उनका एटीएम कार्ड उनके पास ही रहा लेकिन, किसी और एटीएम कार्ड से ऑनलाइन शॉपिंग की गई और पैसा निकाल लिया गया।
पीड़ित ओम प्रकाश श्रीवास्तव कुशीनगर के हाटी कस्बे में रहते हैं। उन्हाेंने बताया कि वे गांधी स्मारक इंटर कॉलेज से बतौर फिजिक्स लेक्चरर के पद से रिटायर हुए हैं। रिटायरमेंट के बाद सारा पैसा उन्हाेंने हाटी ब्रांच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट में जमा करवाए थे। इसी अकाउंट में उनकी मासिक पेंशन भी जमा होती है। इस अकाउंट में कुल त्र15 लाख जमा थे। श्रीवास्तव के अनुसार उन्हें अगस्त में अपने अकाउंट से त्र100-200 कम होते लगे। इसी दौरान वे अपनी पत्नी के साथ बंगलुरु गए थे। यहां अचानक उनके अकाउंट से हजारों रुपये कम होने लगे। श्रीवास्तव के अनुसार उन्हें बैंक से ट्रांजेक्शन का अलर्ट एसएमएस नहीं आता है। इसलिए उन्हें अपने अकाउंट से रुपये निकलने की जानकारी तब हुई जब 29 अगस्त को उन्हाेंने बंगलूरु के एक एटीएम से रुपये निकाले। पता चला कि जिस अकाउंट में कुछ हफ्ते पहले तक त्र15 लाख थे, अब सिर्फ त्र5.62 लाख रुपये ही रह गए हैं। उन्हाेंने अकाउंट से रुपये निकासी ब्लॉक करने के लिए अपने रिश्तेदार के जरिए एसबीआई को कहा क्योंकि व खुद बाहर थे। 29 अगस्त को ही अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया। तुरंत हाटी में पुलिस को सूचित किया और मामला दर्ज करवाया। लेकिन अगले ढाई महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब 21 नवंबर को लखनऊ साइबर क्राइम सेल को मामला सौंपा गया। सेल के अनुसार उसने मामले की जांच शुरू कर दी है हालांकि मामला देरी से पहुंचने की वजह से जांच मुश्किल हो गई है।

बैंक ने पूछा दोनों एटीएम लॉक कर दें : ओपी श्रीवास्तव ने बताया कि जब उनके रिश्तेदार ने एसबीआई को अकाउंट ब्लॉक करने के लिए फोन किया था तो बैंक कॉल सेंटर पर उनसे पूछा गया कि क्या उनके दोनों एटीएम लॉक करने हैं? वे हैरत में हैं की एक ही अकाउंट के दो एटीएम कैसे जारी कर दिए गए? साइबर सेल को यह मामला मिलीभगत से एटीएम कार्ड क्लोनिंग का लग रहा है। उन्हें इसमें बैंक कर्मियों की मिलीभगत का संदेह है। वहीं बैंक इस बारे में श्रीवास्तव को कुछ भी नहीं बता रहा है। अकाउंट ब्लॉक होने के बाद ओपी श्रीवास्तव पर अब दूसरी आफत घर चलाने की भी है क्योंकि पेंशन इसी अकाउंट में आती है।

केबल टीवी-फोन रीचार्ज हुए, सात बार ट्रांजेक्शन भी : श्रीवास्तव ने बताया कि उनके अकाउंट से जुलाई-अगस्त महीने में सैकड़ों बार केबल टीवी और मोबाइल फोन रिचार्ज किए जाने की जानकारी उनके बेटों ने दी है। उनके बेटे दिल्ली में आईटी सेक्टर में कार्यरत हैं और ऑनलाइन शॉपिंग के बारे में उनके अकाउंट से जानकारी हासिल की। इसके साथ ही उनके अकाउंट से कई-कई बार ट्रांजेक्शन हुए। उनका अकाउंट विशेष सेविंग अकाउंट है, जिसमें से लगातार सात बार ट्रांजेक्शन हुए और रुपये निकाले गए।

पुलिस ने देरी की : अपने मामले में देरी के लिए श्रीवास्तव ने पुलिस को दोष दिया है। उनके अनुसार हाटी में जांच अधिकारी ने एसपी के जरिए डीआईजी को मामला साइबर क्राइम सेल में भेजने के लिए कहा था। लेकिन पुलिस अधिकारियों ने गोरखपुर स्तर पर ही इसकी जांच कराने पर जोर दिया।

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