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ऑनलाइन दर्ज होगी गुरुजन की हाजिरी!
Lucknow
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों को पढ़ाई गई कक्षाओं के हिसाब-किताब देने में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने का फैसला किया है। प्रशासन की पहल कामयाब हुई तो जल्द ही विवि के गुरुजन कक्षा का ब्योरा ऑनलाइन दर्ज कराएंगे। इसके तहत वह ई-मेल के माध्यम से कक्षा के बाद विभागाध्यक्ष को रिपोर्ट करेंगे। इतना ही नहीं यह रिपोर्ट प्रतिदिन कुलपति के समक्ष रखी जाएगी और उनके परफॉर्मेंस की समीक्षा भी होगी।
लविवि में नए मुखिया की तैनाती के बाद से ही गुरुजनों की हाजिरी दर्ज किए जाने की कवायद शुरू की गई थी। इसके तहत विभागाध्यक्ष को विभाग की कक्षाओं का हिसाब संकायाध्यक्ष को देना था, जिसे प्रतिदिन कुलपति के पास भेजा जाना था। विवि में अब तक शिक्षकों की उपस्थिति जांचने की कोई व्यवस्था नहीं थी। कई पूर्ववर्ती कुलपतियों ने इस संबंध में प्रयास भी किया, लेकिन इसे लागू करने में सफलता नहीं मिल सकी। इस बार विवि प्रशासन ने शिक्षकों की विवि में उपस्थिति के बजाय कक्षाओं में मौजूदगी जांचने की पहल शुरू की। इसका असर भी दिखाई देना शुरू हो गया। विवि में कक्षाओं में न जाने के लिए प्रसिद्ध कई शिक्षक अब क्लास में नजर आने लगे हैं। वहीं कई खाली कक्षाओं में छात्रों की आमद भी बढ़ी है। सोमवार को कुलपति के साथ संकायाध्यक्षों की बैठक हुई, जिसमें कई संकायों के अध्यक्षों ने विभागाध्यक्षों की ओर से जानकारी देने में आ रही दिक्कतों के बारे में बताया। इसके बाद कक्षाओं का हिसाब देने के लिए कोई वैकल्पिक योजना बनाने पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने व्यवस्था ऑनलाइन किए जाने की बात कही, जिसमें ई-मेल के माध्यम से रिपोर्ट भेजे जाने पर चर्चा हुई। यह तर्क भी दिया गया कि इससे कागजी काम कम होगा और समय की बचत भी होगी। इसमें एक बिंदु और जोड़ा गया कि कक्षा में पढ़ाए गए टॉपिक के बारे में भी अब जानकारी दर्ज करनी होगी। यह सभी जानकारियां कक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद शिक्षक को ई-मेल के माध्यम से भेजना होगा। पहले चरण में शिक्षक विभागाध्यक्ष को रिपोर्ट करेंगे, उसके बाद विभागाध्यक्ष कुलपति को ई-मेल करेंगे। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो अभी यह योजना अपने प्रारंभिक चरण में है। इसे लागू करने की कवायद जल्द ही शुरू हो जाएगी। पढ़ाई गई कक्षाओं की संख्या और उपस्थित छात्रों की संख्या के आधार पर ही शिक्षकों का मूल्यांकन भी किया जाएगा। इस योजना को विवि के कई शिक्षकों ने अच्छी पहल भी बताया है। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ कागजी कार्रवाई कम होगी बल्कि शिक्षक भी तकनीकी रूप से सक्षम होंगे। साथ ही वह खुद भी अपना मूल्यांकन कर सकेंगे, क्योंकि उनके पास सारा डाटा सुरक्षित रहेगा।
ई-मेल से उपस्थिति दर्ज कराए जाने के बारे में प्रशासनिक सहमति बन गई है। इससे जुडे़ सभी बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है। जिन विभागों में इंटरनेट सुविधा और कंप्यूटर की कमी है, उन्हें इससे लैस किया जाएगा। जल्द ही योजना का क्रियान्वयन शुरू किया जाएगा।
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प्रो. राजेश मिश्र, प्रवक्ता, लखनऊ विश्वविद्यालय
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लविवि में नए मुखिया की तैनाती के बाद से ही गुरुजनों की हाजिरी दर्ज किए जाने की कवायद शुरू की गई थी। इसके तहत विभागाध्यक्ष को विभाग की कक्षाओं का हिसाब संकायाध्यक्ष को देना था, जिसे प्रतिदिन कुलपति के पास भेजा जाना था। विवि में अब तक शिक्षकों की उपस्थिति जांचने की कोई व्यवस्था नहीं थी। कई पूर्ववर्ती कुलपतियों ने इस संबंध में प्रयास भी किया, लेकिन इसे लागू करने में सफलता नहीं मिल सकी। इस बार विवि प्रशासन ने शिक्षकों की विवि में उपस्थिति के बजाय कक्षाओं में मौजूदगी जांचने की पहल शुरू की। इसका असर भी दिखाई देना शुरू हो गया। विवि में कक्षाओं में न जाने के लिए प्रसिद्ध कई शिक्षक अब क्लास में नजर आने लगे हैं। वहीं कई खाली कक्षाओं में छात्रों की आमद भी बढ़ी है। सोमवार को कुलपति के साथ संकायाध्यक्षों की बैठक हुई, जिसमें कई संकायों के अध्यक्षों ने विभागाध्यक्षों की ओर से जानकारी देने में आ रही दिक्कतों के बारे में बताया। इसके बाद कक्षाओं का हिसाब देने के लिए कोई वैकल्पिक योजना बनाने पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने व्यवस्था ऑनलाइन किए जाने की बात कही, जिसमें ई-मेल के माध्यम से रिपोर्ट भेजे जाने पर चर्चा हुई। यह तर्क भी दिया गया कि इससे कागजी काम कम होगा और समय की बचत भी होगी। इसमें एक बिंदु और जोड़ा गया कि कक्षा में पढ़ाए गए टॉपिक के बारे में भी अब जानकारी दर्ज करनी होगी। यह सभी जानकारियां कक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद शिक्षक को ई-मेल के माध्यम से भेजना होगा। पहले चरण में शिक्षक विभागाध्यक्ष को रिपोर्ट करेंगे, उसके बाद विभागाध्यक्ष कुलपति को ई-मेल करेंगे। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो अभी यह योजना अपने प्रारंभिक चरण में है। इसे लागू करने की कवायद जल्द ही शुरू हो जाएगी। पढ़ाई गई कक्षाओं की संख्या और उपस्थित छात्रों की संख्या के आधार पर ही शिक्षकों का मूल्यांकन भी किया जाएगा। इस योजना को विवि के कई शिक्षकों ने अच्छी पहल भी बताया है। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ कागजी कार्रवाई कम होगी बल्कि शिक्षक भी तकनीकी रूप से सक्षम होंगे। साथ ही वह खुद भी अपना मूल्यांकन कर सकेंगे, क्योंकि उनके पास सारा डाटा सुरक्षित रहेगा।
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ई-मेल से उपस्थिति दर्ज कराए जाने के बारे में प्रशासनिक सहमति बन गई है। इससे जुडे़ सभी बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है। जिन विभागों में इंटरनेट सुविधा और कंप्यूटर की कमी है, उन्हें इससे लैस किया जाएगा। जल्द ही योजना का क्रियान्वयन शुरू किया जाएगा।
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प्रो. राजेश मिश्र, प्रवक्ता, लखनऊ विश्वविद्यालय