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34 साल बाद आया फैसला, लेकिन सजा 'छटांक' भर की
मुजफ्फरनगर/ब्यूरो
Updated Sat, 01 Jun 2013 01:30 AM IST
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बलवे के एक मामले में 34 साल बाद तीन लोगों को तीन-तीन साल की सजा हुई है। प्रत्येक पर 18,200 का जुर्माना किया गया है। जिन लोगों को सजा हुई है उनमें एक वरिष्ठ अधिवक्ता और एक टेलीफोन विभाग दिल्ली में जेई है।
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रैदासपुरी और ब्रह्मपुरी के लोगों के बीच शिवराज सिंह की एक दीवार को लेकर 12 फरवरी 1979 को विवाद हो गया था। यह विवाद लगातार बढ़ता रहा। प्रशासन के प्रयासों के बावजूद 12 जुलाई 1979 को फिर से विवाद हुआ।
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रैदासपुरी के लोगों ने ब्रह्मपुरी के लोगों के घरों पर हमला बोल दिया। ईंट पत्थर, अवैध हथियारों का खुला प्रयोग हुआ। इस मामले में 67 लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम किया गया।
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मामला न्यायालय में चला एक-एक कर लोग बरी होते रहे। अंत में तीन लोगों के खिलाफ एडीजे कोर्ट नंबर-9 में मुकदमा चला। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता योगेश शर्मा ने बताया कि इस मामले में नौ गवाह पेश किए गए।
गवाहों के ब्यान और अधिवक्ता द्वारा दिए गए तर्को के बाद न्यायाधीश चंद्रभूषण सिंह ने तीनों आरापियों को तीन-तीन साल की सजा और प्रत्येक को 18,200 रुपए की सजा सुनाई गई।
सहायक शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जिन तीन लोगों को सजा सुनाई गई है, इनमें एक वकील और दूसरा दिल्ली में टेलीफोन विभाग में जेई है। मामला न्यायालय में 34 साल चला।