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यूपी: 150 मासूमों में मिले एचआईवी के लक्षण
अविनाशी श्रीवास्तव
Updated Thu, 13 Jun 2013 02:05 AM IST
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मासूमों के लिए इससे खतरनाक और डरावना उपहार शायद ही दूसरा हो। किसी दूसरे ने नहीं, मासूम बच्चों के पापा ने ही उन्हें ऐसी गंभीर बीमारी दे दी, जिसके बारे में उन्हें कुछ नहीं पता।
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उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के सरोजनी नायडू चिल्ड्रेन अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सीएम पांडेय ने बच्चों में एचआईवी पॉजिटिव और एड्स विषय पर रिसर्च की। उनकी रिसर्च को इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डी फिल भी एवार्ड हो चुकी है।
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रिसर्च में उन्हें कई गंभीर और भयावह तथ्य मिले हैं। उन्हें इलाहाबाद और आसपास के क्षेत्र में 150 बच्चे मिले, जिनमें एचआईवी, एड्स के लक्षण पाए गए।
ज्यादातर मामलों में बच्चों के पिता मुंबई में नौकरी कर रहे हैं। वहां से बीमारी मिली और पत्नी के साथ मासूम भी उसकी जद में हैं। इस बीमारी की वजह से कई बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं।
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डॉ. पांडेय ने इलाहाबाद और इसके आसपास के जिलों प्रतापगढ़, कौशांबी, भदोही आदि के नवजात से 14 साल तक के बच्चों को अध्ययन का बिंदु बनाया।
उन्होंने बताया कि एचआईवी पॉजीटिव 150 बच्चे तो बहुत आसानी से मिल गए। वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है। यह समस्या मध्यम वर्गीय और ग्रामीणों में अधिक है।
इनमें नौकरी के लिए बाहर गए युवाओं की भी बड़ी संख्या है। डॉ. पांडेय बताते हैं कि शारीरिक और भावनात्मक दोनों ही स्तर पर इनका जीवन काफी कष्ट में है।
इन बच्चों में आधे से अधिक के माता या पिता में किसी एक की मौत हो चुकी है। ऐसे में वे ननिहाल या किसी और रिश्तेदार के यहां पल रहे हैं। लाजिमी है जरूरत के मुताबिक उनकी देखभाल नहीं हो पाती।
डॉ. पांडेय ने बताया कि वाराणसी तथा अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की भयावह सच्चाई सामने आ रही है।
बहुत कम होती है जिंदगी
रिसर्च में सामने आया है कि एचआईवी से ग्रसित बच्चों में खून की कमी और कुपोषण आम है। फंगल इंफेक्शन कॉमन है। त्वचा, फेफड़े, पेट से संबंधित बीमारियां भी आम हैं।
ये बच्चे हल्का झटका भी नहीं झेल पाते और बीमार पड़ जाते हैं। डॉ. पांडेय ने बताया कि कुछ एक से दो तो कई सात-आठ साल में दम तोड़ देते हैं। 90 फीसदी बच्चों की 15-16 साल में मौत हो जाती है।
उनका कहना है कि नियमित दवाओं के सेवन तथा उचित देखभाल से आयु बढ़ाई जा सकती है। सरकार की तरफ से दवाएं मुफ्त दी जाती हैं लेकिन लोगों में जागरूकता नहीं है। इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
प्रदेश में 1100 बच्चे हैं पंजीकृत
पूरे प्रदेश में ऐसे पंजीकृत बच्चों की संख्या 11 सौ से अधिक हैं जिनमें एचआईवी या एड्स के लक्षण मिले हैं। इलाहाबाद और वाराणसी में इनकी अधिक संख्या है।
इस बीमारी से ग्रसित ऐसे बच्चों की भी बड़ी संख्या है जो कहीं पंजीकृत नहीं हैं। इसको लेकर पूरे प्रदेश में जागरूकता अभियान में जुटी संस्था यूपीएनपी-प्लस के अध्यक्ष नरेश यादव का कहना है कि कई जिलों में सेंटर अपेक्षाकृत कम सक्रिय हैं। इसलिए वहां सही आंकड़ा मिलना मुश्किल है।
उन्होंने यह भी बताया कि अब इसमें कमी के संकेत मिल रहे हैं। नरेश का कहना है कि इन बच्चों पर ध्यान दिया जाए तो उनकी जिंदगी को काफी हद तक खुशहाल बनाया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि सुविधाएं मुहैया कराने के साथ इनके पालकों को भी जागरूक किया जाए।