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नौसेना क्षेत्र के पास मिला GPS ट्रैकर लगा सीगल, जासूसी या वैज्ञानिक शोध? सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

Fri, 19 Dec 2025 06:40 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संकल्प सिंह Updated Fri, 19 Dec 2025 06:40 PM IST
सार

कर्नाटक के कारवार तट के पास नौसेना के संवेदनशील क्षेत्र में एक GPS ट्रैकर लगा सीगल पक्षी मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। प्रारंभिक जांच में इसे वैज्ञानिक शोध से जुड़ा मामला बताया जा रहा है, हालांकि पूरे घटनाक्रम की गहन जांच जारी है।

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Chinese GPS Tracker Seagull Found Near Karwar Naval Base Security Agencies Are In Alert
Seagull - फोटो : AdobeStock

विस्तार

कर्नाटक के उत्तर कन्नड में कारवार क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने निकलकर आई है। यहां पर एक सीगल पक्षी मिला है, जिसके शरीर पर चाइनीज GPS ट्रैकिंग डिवाइस बंधी हुई थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह क्षेत्र नौसेना के संवेदनशील इलाके के बिल्कुल पास है। इस कारण इसे एक स्पाई अभियान के तौर पर देखा जा रहा है।

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इसको देखते हुए देश की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और वन विभाग के साथ मिलकर मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, जो प्रारंभिक जांच हुई है, उसमें इसे जासूसी गतिविधि के साथ जोड़कर देखने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। वहीं कई अधिकारी इस बारे में कह रहे हैं कि यह मामला वैज्ञानिक शोध से जुड़ा हो सकता है।

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एजेंसी के मुताबिक स्थानीय लोगों ने थिम्मक्का गार्डन के नजदीक समुद्र तट के पास एक सीगल पक्षी को देखा। इस पक्षी के शरीर पर एक खास तरह का डिवाइस लगा हुआ था। इसे देखने के बाद लोगों ने तुरंत इसकी जानकारी वन विभाग के मरीन विंग को दी। इस सूचना के मिलने के बाद अधिकारी तुरंत वहां पर पहुंचते हैं और सीगल को सावधानीपूर्वक पकड़कर उसकी जांच करते हैं।

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जांच के समय सबसे पहले उसके शरीर पर जो जीपीएस ट्रैकर लगा हुआ था, उसको बरामद किया गया। ट्रैकर पर जो निशान और कोड थे, उनकी जांच के बाद पता चला कि यह चीन की चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के तहत आने वाले रिसर्च फॉर इको-एनवायरनमेंटल साइंसेज से जुड़ा है।

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इससे इस बारे में संभावना जताई जा रही है कि इस ट्रैकर का इस्तेमाल पर्यावरण और वन्यजीव रिसर्च के लिए किया गया है। शायद इस ट्रैकर से सीगल की आवाजाही, खाने-पीने के पैटर्न और प्रवास मार्गों के अध्ययन के लिए लगाया गया था।

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अधिकारियों ने इस बारे में स्पष्ट तौर पर कहा है कि अभी तक हमें कोई ऐसे पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं, जिसके बल पर यह कहा जा सके कि सीगल को जासूसी या खुफिया जानकारी को इकट्ठा करने के लिए भेजा गया था। इसके बाद भी इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए इस घटना की बारीकी से जांच की जा रही है।

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