BSNL: बीएसएनएल यूजर्स को लगने वाला है बड़ा झटका! अगले वित्तीय वर्ष से महंगे हो सकते हैं रीचार्ज प्लान
BSNL Tariff Hike:
सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL जल्द ही अपने ग्राहकों को बड़ा झटका दे सकती है। कंपनी वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) में अपने प्लान महंगे करने की तैयारी में है। टेलीकॉम मंत्री की समीक्षा बैठक के बाद कंपनी ने प्रति यूजर अपनी कमाई (ARPU) में 50% बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा है।

विस्तार
सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) जल्द ही अपने प्रीपेड प्लान्स की कीमतें बढ़ाने वाली है। हालांकि, देश की बाकी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों की तरह BSNL का तरीका थोड़ा अलग है। प्राइवेट कंपनियां अक्सर सीधे तौर पर अपने रीचार्ज प्लान महंगे कर देती हैं, लेकिन BSNL सीधे पैसे बढ़ाने से बचता है। इसके बजाय, कंपनी अपने प्लान्स में मिलने वाले फायदों (जैसे डेटा या वैलिडिटी) को समय के साथ चुपचाप कम कर देती है, जबकि रीचार्ज की कीमत वही रहती है।
इस खास रणनीति से ग्राहकों को ऐसा लगता है कि वे अभी भी उसी कीमत पर सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। BSNL के पास प्राइवेट कंपनियों की तरह भारी-भरकम संसाधन और मजबूत नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, ऐसे में उसका यह तरीका काफी कारगर माना जाता है। लेकिन अब खबर है कि वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) में कंपनी बड़ा बदलाव करने जा रही है।
कमाई में 50 प्रतिशत के भारी इजाफे का लक्ष्य
BSNL ने वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) के लिए एक बहुत बड़ा और आक्रामक लक्ष्य तय किया है। वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) के अंत तक कंपनी का प्रति यूज़र औसत राजस्व (ARPU) 101 रुपये रहा है।लेकिन अब कंपनी को अगले वित्तीय वर्ष में इसे 150 रुपये तक पहुंचाना है। यह नया लक्ष्य हाल ही में टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा ली गई एक समीक्षा बैठक में तय किया गया है।ARPU में सीधे 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का मतलब है कि कंपनी को अपने सभी कैटेगरी के प्लान्स में बड़ा इजाफा करना पड़ेगा। हालांकि, प्लान महंगे करने के साथ-साथ BSNL को अपने नेटवर्क की पहुंच और क्वालिटी को भी काफी बेहतर करना होगा, ताकि ग्राहक बढ़े हुए दाम चुकाने के लिए तैयार हों।
गांवों में प्राइवेट कंपनियों की पैठ
महज एक वित्तीय वर्ष के भीतर ARPU में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करना कोई आसान काम नहीं है। इतनी बड़ी बढ़ोतरी करने से पहले देश की बड़ी और मजबूत प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियां भी सौ बार सोचेंगी। BSNL के सामने सबसे बड़ी समस्या सिर्फ सस्ते प्लान्स की ही नहीं है, बल्कि उसके ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता भी है।
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आज के समय में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि किसी स्मार्टफोन यूजर ने BSNL को अपने मुख्य (प्राइमरी) सिम के तौर पर रखा हो। देश के ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल सिर्फ दूसरे (सेकंडरी) सिम कार्ड के रूप में करते हैं, जिसमें वे ज्यादा पैसे का रीचार्ज नहीं करवाते हैं। इसके अलावा, एक समय था जब ग्रामीण इलाकों में सिर्फ BSNL का दबदबा हुआ करता था, लेकिन अब प्राइवेट कंपनियों ने भी वहां अपने मजबूत नेटवर्क बिछा लिए हैं। ऐसे में इन इलाकों में भी BSNL के लिए अपनी जगह बनाए रखना और कड़ी टक्कर देना अब काफी मुश्किल होता जा रहा है।
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