अगर पूरे देश के लोगों की बीमारी की संवेदनशील जानकारी दुश्मन देश को मिल गई तो क्या होगा?

Harendra Chaudhary
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्लीHarendra Chaudhary
Mon, 23 Nov 2020 05:25 PM IST
सार
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What will happen if the enemy country hack healthcare data of the whole country?
healthcare data hack - फोटो : For Refernce Only

    विस्तार

    आपकी किसी शारीरिक समस्या, बीमारी या इलाज की जानकारी बेहद निजी होती है। अगर किसी व्यक्ति की बीमारी से जुड़ी जानकारी उसकी कंपनी तक पहुंचती है, तो इससे उसकी नौकरी या प्रमोशन पर संकट आ सकता है। अगर मामला किसी महिला से जुड़ा हो तो यह और अधिक संवेदनशील हो सकता है। ऐसे में जब सरकार ने यह निर्णय लिया कि वह क्लाउड कंपनियों की सहायता से हर नागरिक की स्वास्थ्य जानकारी सुरक्षित रखेगी और इसे किसी भी अस्पताल के द्वारा माउस की एक क्लिक पर प्राप्त किया जा सकेगा, तो इसके बाद स्वास्थ्य जानकारी की गोपनीयता बनाए रखने और इन आंकड़ों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। आशंका है कि अगर ऐसी संवेदनशील जानकारी दुश्मन देश के हाथों पड़ गई तो इसका भारी दुरुपयोग हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों का हेल्थ डाटा जुटाने के लिए मेडिकल कंपनियां करोड़ों डॉलर खर्च करने को तैयार रहती हैं। इसका उपयोग वे टार्गेट मरीज तक पहुंचने, अपने उत्पाद बेचने और विशेष शोध के लिए करती हैं। किसी अपराधी के हाथ पड़ जाने पर इन जानकारियों से किसी महिला या पुरुष को उसके सामाजिक-पारिवारिक जीवन का खतरा दिखाकर ब्लैकमेल भी किया जा सकता है।

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    क्या है लाभ

    हर नागरिक की स्वास्थ्य जानकारी क्लाउड पर सुरक्षित रखने की योजना आदर्श रूप में बहुत अच्छी है। किसी नागरिक को कोई स्वास्थ्य समस्या या एक्सीडेंट होने पर उसका इलाज करने वाला डॉक्टर उसकी पुरानी सभी बीमारी की जानकारी एक क्लिक में प्राप्त कर सकता है। इससे वह मरीज की परेशानियों को बिना बताए ही उन्हें समझकर आगे का इलाज शुरू कर सकता है। इससे बेहद महत्वपूर्ण मौकों पर बिना समय गंवाए मरीज को उचित इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे सरकार बच्चों-नागरिकों के टीकाकरण पर बेहतर निगाह रख सकती है।

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    लेकिन यह है खतरा

    क्लाउड पर आंकड़े सुरक्षित रखना आजकल बड़ी कंपनियों का स्टेटस सिंबल बन गया है। इससे कंपनियां अपने ग्राहकों की पूरी जानकारी एक क्लिक पर देख पाती हैं, इससे व्यापार में तेजी आती है। क्लाउड सेवा प्रदाता कंपनियां इसके पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा करती हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार गूगल, फेसबुक, ह्वाट्सएप की तरह क्लाउड पर रखा गया डाटा भी चोरी किया जा सकता है और पहले इस तरह की कई घटनाएं घट भी चुकी हैं। इस प्रकार अगर एक क्लिक पर पूरी दिल्ली के लोगों का स्वास्थ्य डाटा पाकर इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। किसी राजनेता की स्वास्थ्य जानकारी किसी दूसरे राजनीतिक दल या दुश्मन देश के हाथ पड़ने से इसका भयानक दुरुपयोग किया जा सकता है।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    साइबर लॉ एक्सपर्ट एडवोकेट भाग्यश्री के अनुसार इनफॉर्मेशन टेक्नोलोजी एक्ट 2011 के अंतर्गत लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों को बेहद गोपनीय, निजी और सुरक्षित माना गया है। लेकिन इसका नियमन केवल प्राइवेट कंपनियों पर ही लागू होता है। सरकारी मशीनरी कुछ प्रावधानों के अंतर्गत इसे प्राप्त कर सकती है। इस प्रकार लोगों का स्वास्थ्य आंकड़ा खतरे में पड़ सकता है। ये आंकड़े लीक होने से लोगों के विवाह, तलाक, गोद लेने के मामलों में परेशानियां बढ़ सकती हैं। अगर प्राइवेट अस्पतालों तक भी इस जानकारी को देना सुलभ कर दिया गया (ऐसी योजना है) तो केवल एक कर्मचारी के गलत इरादे होने पर पूरे राज्य के लोगों की जानकारी को खतरा हो सकता है।

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