मुद्दे की बात: TikTok में ऐसा क्या है जिससे लोगों को लत लग जाती है, अमेरिका इसे बैन क्यों करना चाहता है?

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Sat, 27 Apr 2024 03:00 PM IST
सार

टिकटॉक का एल्गोरिद्मऐसा है कि यह आपको बोर नहीं होने देता है। इसका एल्गोरिद्म बहुत ही कम समय में इसका अंदाजा लगा लेता है कि आप किस समय पर क्या देखना पसंद करते हैं और इसके लिए टिकटॉक बड़ी मात्रा में डाटा इकट्ठा करता है और यही बात दुनिया की सरकारों को परेशान करती है।

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What is the special algorithm of tiktok which makes people addicted why does America want to ban it
algorithm of tiktok - फोटो : FREEPIK

    विस्तार

    अमेरिकी सरकार चाइनीज शॉर्ट वीडियो एप को बैन करने की तैयारी कर रही है। TikTok और अमेरिकी सरकार के बीच से लंबे समय से चली आ रही लड़ाई अब खत्म होने की कगार पर है। लंबे समय से TikTok को अमेरिका में बैन करने की मांग हो रही थी। कई बार TikTok की पैरेंट कंपनी बाइटडांस को यह भी ऑफर दिया गया कि TikTok को किसी अमेरिकी कंपनी को बेच दिया जाए, लेकिन कंपनी को यह मंजूर नहीं है। टिकटॉक अभी तक जहां भी लॉन्च हुआ है, वहां हिट रहा है और पहले से पैर जमाए एप्स की छुट्टी हुई है। यहां एक बात सोचने वाली है कि आखिर TikTok में ऐसा क्या है जो लोगों को इतना दीवाना बना देता है लोग इसे आदी हो जाते हैं। आइए जरा समझने की कोशिश करते हैं....

    एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका TikTok के यूजर्स की संख्या करीब 17 करोड़ है जिसे कम नहीं कहा जाएगा। अमेरिकी सरकार ऐसा महसूस कर रही है इन 17 करोड़ यूजर्स का डाटा चीन सरकार के पास है और इस डाटा के आधार पर चीन सरकार कुछ भी कर सकती है। अमेरिकी सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और प्राइवेसी के लिए खतरा बता रही है और इसी वजह से TikTok को बैन करने की तैयारी चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने टिकटॉक पर लगाम कसने वाले एक कानून पर 24 अप्रैल को हस्ताक्षर किए। इसमें प्रावधान है कि या टिकटॉक के मालिक उसे किसी अमेरिकी को बेच दें या फिर अमेरिका में टिकटॉक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।

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    टिकटॉक की मालिक कंपनी बाइटडांस ने कहा है कि वह TikTok एप को किसी अमेरिकी कंपनी को बेचने की बजाय उसे बंद करना पसंद करेगी। कंपनी ने अमेरिका में TikTok को चालू रखने के लिए सभी कानूनी तरीके अपना लिए हैं, हालांकि अभी भी कंपनी इस कानून को अदालत में चुनौती देने की तैयारी में है। एक्सपर्ट का कहना है कि एप को बेचने से कंपनी को ज्यादा नुकसान होगा। इसलिए कंपनी अपनी सर्विस को बंद ही कर देना चाहती है, हालांकि अभी किसी अंतिम फैसले पर मुहर नहीं लगी है।

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