Cyber Warfare: बिना गोली-बारूद के लड़ी जा रही नई जंग, जानिए परमाणु हमले जितना घातक क्यों है साइबर वॉर?

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Sun, 08 Mar 2026 02:58 PM IST
सार

What Is Cyber Warfare:

आज की दुनिया में जंग के मायने पूरी तरह बदल चुकें हैं। अब सरहदों पर सिर्फ टैंकों और मिसाइलों की गूंज ही नहीं सुनाई देती, बल्कि एक ऐसी अदृश्य लड़ाई भी लड़ी जा रही है जो आपके घर के अंदर रखे कंप्यूटर और मोबाइल तक पहुंच सकती है।

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साइबर वॉरफेयर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    आधुनिक दौर में युद्ध की परिभाषा तेजी से बदल रही है। अब जंग के मैदान में केवल टैंक, बंदूक और गोला-बारूद से ही लड़ाई नहीं लड़ी जाती, बल्कि अब कंप्यूटर और इंटरनेट भी हथियार बन चुके हैं। युद्ध के दौरान एक कमरे में बैठा हैकर भी किसी देश में एक मिसाइल गिराने जितनी तबाही मचा सकता है।

    यहां हम साइबर वॉरफेयर की बात कर रहे हैं जिसे अब कई देश अपनी युद्ध रणनीति में शामिल कर चुके हैं। ईरान-इस्त्रायल के बीच चल रहे हालिया जंग में भी दोनों देश एक दूसरे के ऊपर जमकर साइबर हमले कर रहे हैं। आइए जानते हैं साइबर हमले क्यों किए जाते हैं और आज के दौर में इन्हें पारंपरिक युद्ध से भी ज्यादा खतरनाक क्यों माना जाता है।

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    क्या होता है साइबर वॉर?

    साइबर वॉर का मतलब है किसी देश के डिजिटल सिस्टम और इंटरनेट नेटवर्क पर हमला कर उनमें रुकावट पैदा करना। इसमें खासतौर पर ट्रेंड हैकर्स दुश्मन देश के महत्वपूर्ण साइबर सिस्टम को निशाना बनाते हैं। वे सरकारी नेटवर्क, बैंकिंग सिस्टम, पॉवर ग्रिड, एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम या सैन्य कम्यूनिकेशन नेटवर्क को निशाना बनाते हैं।

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    युद्ध में क्यों किए जाते हैं साइबर हमले?

    युद्ध लड़ने वाले देशों का एक ही लक्ष्य होता है- किसी भी तरह से दुश्मन देश को बर्बाद करना ताकि वह लड़ाई हार जाए। इसमें साइबर वॉफेयर का बहुत अहम योगदान होता है। युद्ध के दौरान पहले से ही पॉवर सप्लाई, फ्लाइट-ट्रेन और इमरजेंसी सेवाओं पर भारी दबाव होता है। ऐसे में यदि साइबर हमले में ये सेवाएं बाधित हो जाएं तो आम जनता में अफरातफरी मच जाती है। सैन्य संचार प्रणाली पर हमलों से दुश्मन देश का कम्यूनिकेशन सिस्टम ठप पड़ जाता है और वह अपने ऊपर हो रहे हमलों से सुरक्षा नहीं कर पाते। ऐसे में नुकसान कई गुना अधिक होता है।

    साइबर हमला कैसे किया जाता है?

    साइबर युद्ध में कई तरह की तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। दुश्मन देशों के महत्वपूर्ण इंटरनेट और डिजिटल सिस्टम पर साइबर हमले किए जाते हैं। इनमें मालवेयर, कंप्यूटर वायरस या डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस (DDoS) अटैक शामिल होते हैं। इन हमलों में दुश्मन देश के इंटरनेट सिस्टम को हैक कर लिया जाता है, जिससे वेबसाइट और नेटवर्क क्रैश होने लगते हैं। कई बार महच्वपूर्ण डेटा भी चुरा लिया या डिलीट कर दिया जाता है जिससे कई तरह की सेवाएं ठप पड़ जाती हैं।

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    पूरे देश पर कैसे पड़ सकता है असर?

    अगर किसी देश के महत्वपूर्ण सिस्टम पर साइबर हमला हो जाए तो उसका असर बहुत बड़ा हो सकता है। इससे बैंकिंग और एटीएम जैसी सेवाएं बंद पड़ सकती हैं, फ्लाइट और ट्रेन संचालन प्रभावित हो सकता है, बिजली सप्लाई रुक सकती है। यानी बिना एक भी गोली चलाए दुश्मन देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

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