US ने सभी विदेशी यूजर्स पर लगाया AI बैन: आखिर दुनिया के लिए क्यों बंद हुए Anthropic के दो सबसे ताकतवर AI मॉडल?

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Sun, 14 Jun 2026 06:56 PM IST
सार

अमेरिकी सरकार ने Anthropic के सबसे पावरफुल AI मॉडल Fable 5 और Mythos 5 पर भारतीयों समेत सभी विदेशियों के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। इतिहास में पहली बार हार्डवेयर के बजाय किसी 'एआई सॉफ्टवेयर' को बैन किया गया है। जानिए यह फैसला भारत और दुनिया के लिए गंभीर चेतावनी क्यों है।

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us government bans anthropic claude fable 5 and mythos 5 for indians foreigners reasons explained
एंथ्रोपिक के एडवांस मॉडल्स केवल अमेरिकियों के लिए उपलब्ध होंगे - फोटो : AI जनरेटेड

    विस्तार

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने तकनीकी विशेषज्ञों और दुनियाभर की सरकारों को चौंका दिया है। अमेरिका ने एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए मशहूर एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक (Anthropic) को निर्देश दिया है कि वह अपने सबसे पावरफुल एआई मॉडल्स- क्लॉड फैबल 5 (Claude Fable 5) और मिथोस 5 (Mythos 5) का एक्सेस भारतीयों सहित सभी गैर-अमेरिकी नागरिकों के लिए तुरंत रोक दे। इस सरकारी आदेश के बाद कंपनी को मजबूरन ग्लोबल लेवल पर इन मॉडल्स को बंद करना पड़ा है।अमेरिका ने क्यों लगाया प्रतिबंध?AI जगत में इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि पहली बार किसी सरकार ने सीधे AI सॉफ्टवेयर की पहुंच पर रोक लगाई है। यह कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं है, बल्कि एक संकेत है कि दुनिया में एआई को लेकर नियम कितनी तेजी से बदल रहे हैं। आइए इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं:

    • 12 जून को अमेरिकी प्रशासन ने एंथ्रोपिक को स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी विदेशी नागरिक (चाहे वह अमेरिका के अंदर हो या बाहर) इन नए मॉडल्स का उपयोग नहीं कर सकेगा। यह आदेश इतना व्यापक था कि इसमें कंपनी के अपने गैर-अमेरिकी कर्मचारी भी शामिल थे। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए एंथ्रोपिक के पास इन दोनों मॉडल्स को पूरी तरह से बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। हालांकि, यूजर्स कंपनी के अन्य पुराने मॉडल्स का इस्तेमाल पहले की तरह कर सकेंगे।
    • वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेजन के कुछ शोधकर्ताओं ने टेस्टिंग के दौरान फैबल 5 (Fable 5) मॉडल में कुछ सॉफ्टवेयर कमजोरियों का पता लगाया था। यह जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग के साथ साझा की गई। अमेरिकी अधिकारियों को यह डर सताने लगा कि इस सिस्टम के सुरक्षा घेरे को आसानी से तोड़ा जा सकता है। सरकार का मानना है कि अगर इतनी शक्तिशाली तकनीक गलत हाथों में पड़ गई, तो इसका इस्तेमाल सरकारी नेटवर्क्स, बैंकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर खतरनाक साइबर हमले करने के लिए किया जा सकता है।
    • कंपनी ने सरकार के इस फैसले को असंगत बताया है। एंथ्रोपिक का तर्क है कि जिन कमजोरियों का जिक्र किया जा रहा है, वे पहले से ही सार्वजनिक रूप से ज्ञात हैं और बाजार में मौजूद अन्य एआई मॉडल्स भी उन्हें आसानी से ढूंढ सकते हैं। कंपनी का दावा है कि उसने लॉन्च से पहले अमेरिकी और ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर इन मॉडल्स की हफ्तों तक कड़ी टेस्टिंग की थी। एंथ्रोपिक इसे एक 'गलतफहमी' मान रही है और अधिकारियों के साथ मिलकर इस प्रतिबंध को जल्द से जल्द हटाने की कोशिशों में जुटी है।
    • यह बैन रातों-रात नहीं लगा है। पिछले कुछ समय से अमेरिकी प्रशासन और एंथ्रोपिक के बीच मतभेद चल रहे हैं। कंपनी ने पहले अपने एआई का इस्तेमाल घरेलू निगरानी और स्वचालित हथियारों के लिए करने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद पेंटागन ने एंथ्रोपिक को "सप्लाई-चेन रिस्क" तक घोषित कर दिया था। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब कंपनी जल्द ही अपना आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी कर रही है, जिससे इसकी वैल्यूएशन लगभग एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

    जोहो फाउंडर ने दी चेतावनी

    अब तक अमेरिका सिर्फ एआई चिप्स और हार्डवेयर (जैसे सेमीकंडक्टर) के निर्यात को रोकता था, लेकिन यह पहली बार है जब सीधे 'एआई सॉफ्टवेयर' पर रोक लगाई गई है। जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इसे भारत के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी बताया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि "वैश्वीकरण अब खत्म हो चुका है।" वेम्बू का मानना है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को विदेशी कंपनियों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। अब वक्त आ गया है कि देश अपनी खुद की सॉवरेन एआई (Sovereign AI) क्षमताएं विकसित करे और घरेलू रिसर्च व ओपन-सोर्स मॉडल्स पर भारी निवेश करे।

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    आगे क्या होगा?

    फिलहाल, एंथ्रोपिक सरकारी आदेश का पालन कर रही है। लेकिन इस घटना ने दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि भविष्य में एआई को सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर की तरह एक 'रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा माना जाएगा। ऐसे में, जो देश अपनी खुद की एआई तकनीक विकसित नहीं करेंगे, वे भविष्य की डिजिटल दौड़ में बहुत पीछे छूट सकते हैं।

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