एआई का उतरा बुखार: कंपनियां चुपचाप AI प्रोजेक्ट्स से पीछे खींच रहीं पैर, इंसानी कर्मचारियों की होने लगी वापसी
Tech Industry Rehiring:
एआई के अति-उत्साह में कर्मचारियों को निकालने वाली कंपनियों का भ्रम अब टूटने लगा है। अमेजन, आईबीएम और मैकडॉनल्ड्स जैसी दिग्गज कंपनियां अब खामोशी से इंसानों को वापस काम पर रख रही हैं। ग्राहकों की नाराजगी और एआई की महंगी गलतियों के कारण कॉर्पोरेट जगत में अब इंसानी समझ की अहमियत दोबारा पहचानी गई है। इससे कॉर्पोरेट जगत में अब 'क्वाइट रिहायरिंग' का नया दौर शुरू हो गया है।

विस्तार
कॉर्पोरेट जगत में पिछले दो वर्षों से एआई का भारी शोर था। कंपनियों ने मुनाफा बढ़ाने और लागत कम करने के लिए लाखों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। सीईओ और निवेशकों को लगा था कि एआई इंसान का सबसे बेहतरीन और सस्ता विकल्प है। लेकिन अब हालात बिल्कुल उलट गए हैं। एआई एजेंट्स और टूल्स को चलाने के भारी-भरकम खर्च ने बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के हाथ-पांव फुला दिए हैं। अब देर-सवेर कंपनियों को यह समझ आने लगा है कि बिना इंसानों के कंपनियों को चलाना मुश्किल है। इसे इंडस्ट्री में 'बूमरैंग इफेक्ट' कहा जा रहा है।
अमेजन, मैकडॉनल्ड्स, क्लार्ना, आईबीएम, शॉपिफाई जैसी कई छोटी-बड़ी टेक कंपनियां अब चुपचाप तरीके से दोबारा हायरिंग कर रही हैं। मई 2026 की करियरमाइंड्स और गार्टनर की नई रिपोर्ट्स के अनुसार, एआई के कारण छंटनी करने वाली करीब 32% कंपनियों ने अपने निकाले गए कर्मचारियों को वापस काम पर रखना शुरू कर दिया है।साइलेंट रिहायरिंग कर रही कंपनियांक्लार्ना:स्वीडिश फिनटेक कंपनी दावा किया कि उनका एआई चैटबॉट 700 इंसानी एजेंटों के बराबर काम कर सकता है। इसके बाद कंपनी ने अपने कस्टमर सर्विस स्टाफ में भारी कटौती की थी और कुल कर्मचारियों की संख्या 5,500 से घटाकर 3,400 कर दी थी। हालांकि, एआई चैटबॉट्स जटिल वित्तीय मामलों को सुलझाने और ग्राहकों से सहानुभूति दिखाने में पूरी तरह फेल रहे। कंपनी का 'कस्टमर सैटिस्फैक्शन स्कोर' बुरी तरह गिर गया और शिकायतें बढ़ने लगीं। इसके बाद क्लार्ना ने 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत से अपने कस्टमर सपोर्ट के लिए दोबारा ह्यूमन एजेंट्स की हायरिंग शुरू कर दी।
आईबीएम (IBM):
आईबीएम ने अपनी कंपनी के भीतर मानव संसाधन (HR) और एडमिनिस्ट्रेशन के कई बड़े हिस्सों को पूरी तरह से ऑटोमेट कर दिया था और कई पदों पर हायरिंग रोक दी थी। लेकिन सिस्टम कई मौकों पर जजमेंट कॉल (सही-गलत का इंसानी फैसला) लेने में नाकाम रहा, जिसके चलते अब कंपनी अपनी इंजीनियरिंग, कॉर्पोरेट स्ट्रेटेजी और क्लाइंट इंगेजमेंट टीमों में बड़े पैमाने पर इंसानों को वापस ला रही है। यहां तक कि कंपनी ने अमेरिका में इस साल अपनी नई ग्रेजुएट हायरिंग को तीन गुना तक बढ़ा दिया है।
अमेजन:
ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने 2023-2024 के बीच कॉरपोरेट और टेक रोल्स में बहुत बड़े पैमाने पर छंटनी की थी और दावा किया था कि एआई और ऑटोमेशन से उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी। हालांकि, इससे डेटा जजमेंट और क्वालिटी कंट्रोल की भारी कमी आ गई। एआई के बनाए सिस्टम्स को संभालने के लिए अनुभवी लोगों की कमी पड़ गई। कंपनी अब क्वालिटी कंट्रोल, सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग और डेटा जजमेंट के लिए अपने उन खोए हुए टैलेंट को वापस बुला रही है।
शॉपिफाई:
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म शॉपिफाई ने भी अपने काम को ऑटोमेटेड सिस्टम्स और एआई की तरफ मोड़ने का बड़ा एलान किया था और काफी छंटनी की थी। बाद में कंपनी को एआई टूल्स को संभालने के लिए इंसानी कर्मचारियों की कमी महसूस होने लगी। नतीजतन शॉपिफाई को अपनी वर्कफोर्स स्ट्रेटेजी को फिर से कैलिब्रेट करना पड़ा।
मैकडॉनल्ड्स:
कर्मचारियों को कम करने के लिए मैकडॉनल्ड्स ने 100 से ज्यादा ड्राइव-थ्रू स्टोर्स पर ऑर्डर लेने का काम आईबीएम (IBM) के एआई को सौंप दिया था। जिसके बाद ग्राहकों को ऑर्डर डिलीवर करने में कई तरह की परेशानियां आ रही थीं। मैकडॉनल्ड्स ने इस पूरे एआई सिस्टम को बंद कर दिया है और अपने स्टोर्स में इंसानी कैशियर्स की वापसी कर रही है।
एआई से कंपनियों का मोहभंग क्यों हुआ?
साल 2023 और 2024 की शुरुआत में कंपनियों के बीच एआई इंटिग्रेशन की अंधी होड़ मच गई थी। सीईओ और इन्वेस्टर्स को लगा कि जेनरेटिव एआई (जैसे चैटजीपीटी, क्लॉड) के आने से अब उन्हें भारी-भरकम सैलरी वाले इंसानों की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस अति-उत्साह में टेक, कस्टमर सर्विस, मार्केटिंग और आईटी सेक्टर्स से अंधाधुंध छंटनी की गई। हालांकि, जब एआई को वास्तविक दुनिया में पूरी जिम्मेदारी के साथ उतारा गया, तो कंपनियों का यह सुनहरा सपना एक डरावने सच में बदल गया। इंसानों की दोबारा हायरिंग के पीछे एआई की ये सबसे बड़ी कमियां जिम्मेदार रहीं:
लागत और बजट का पूरा गणित बिगड़ना
शुरुआत में लगा था कि एआई से कर्मचारियों की सैलरी का भारी पैसा बचेगा। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट साबित हुई। प्रीमियम एआई टूल्स का सब्सक्रिप्शन बहुत महंगा होता है। इन्हें चलाने के लिए विशाल क्लाउड सर्वर और भारी कंप्यूटिंग पावर की जरूरत पड़ती है। एपीआई कॉल्स और डेटा प्रोसेसिंग का बिल कंपनियों का पूरा बजट बिगाड़ रहा है।
ग्राहकों की नाराजगी और मानवीय संवेदना की कमी
कस्टमर सर्विस के मामले में एआई बुरी तरह नाकाम रहा है। जब किसी ग्राहक का पैसा फंसता है या उसे कोई गंभीर परेशानी होती है, तो वह मानवीय संवेदना चाहता है। मशीन के रटे-रटाए और भावनाहीन जवाब ग्राहकों का गुस्सा और भड़का देते हैं। इस रोबोटिक बर्ताव के कारण कंपनियों ने अपने कई पुराने और वफादार ग्राहक खो दिए हैं।
कॉर्पोरेट डेटा और गोपनीयता पर बड़ा खतरा
एआई मॉडल्स का इस्तेमाल करते समय कंपनियों को गोपनीय डेटा लीक होने का बहुत बड़ा डर रहता है। कई बड़े मामलों में कर्मचारियों ने अनजाने में कंपनी के सीक्रेट कोड और क्लाइंट का डेटा एआई में फीड कर दिया। यह डेटा तुरंत बाहरी सर्वर्स पर चला गया। इस भयानक सुरक्षा चूक ने बड़ी कंपनियों को अपने सिस्टम से बाहरी एआई टूल्स हटाने पर मजबूर कर दिया है।
आत्मविश्वास के साथ झूठ बोलने की आदत
एआई की हैलुसिनेशन कंपनियों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। एआई मशीनें सवाल का जवाब पता न होने पर मनगढ़ंत बातें (हैलुसिनेशन) बताने लगती हैं। इसके कारण कंपनियों ने गलत नीतियां बनाईं और उन्हें कोर्ट में हर्जाना तक भरना पड़ा। इस लापरवाही से कई कंपनियों का एआई पर भरोसा डगमगा गया है।
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इंसानों के साथ एआई का मॉडल हो सकता है सफल?
इन सब के बीच, आइकिया (IKEA) और बॉक्स (Box) जैसी कंपनियों ने कुछ ऐसा किया जो दूसरी कंपनियों के लिए सीख बन गया है। आइकिया ने अपने 50% कॉल्स एआई पर शिफ्ट कर दिए, लेकिन किसी इंसान को नहीं निकाला। उन्होंने अपने सभी 8,500 कॉल सेंटर कर्मचारियों को अपस्किल करके इंटीरियर डिजाइन कंसल्टेंट बना दिया, जिससे कंपनी का मुनाफा बढ़ गया। वहीं, कैलिफोर्निया की टेक फर्म बॉक्स ने इंसानों को निकालने के बजाय एआई को संभालने के लिए एआई आर्किटेक्ट जैसे 13 नए पद पैदा कर दिए।
फॉरेस्टर रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि 55% एक्जीक्यूटिव्स को अब इंसानों को निकालकर एआई लाने के फैसले पर भारी पछतावा है। कंपनियों धीरे-धीरे समझने लगी हैं कि एआई बिना मानवीय समझ के काम नहीं कर सकता। इसलिए अब कंपनियों का फोकस उन भर्तियों पर बढ़ रहा है जो एआई को सही कमांड देकर काम करवा सकें।
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