एआई डेटा सेंटर्स के खिलाफ दुनिया भर में बगावत: पानी-बिजली संकट से डरे लोग, क्या सच में खतरे में है पर्यावरण?
AI Data Centre Protest:
दुनिया भर में एआई डेटा सेंटर्स के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। अमेरिका, आयरलैंड से लेकर चिली और मलेशिया तक लोग जल संकट, बिजली बिलों में बढ़ोतरी और ध्वनि प्रदूषण से परेशान हैं। जानिए क्या कहती हैं नई रिसर्च रिपोर्ट्स और क्या वाकई एआई पर्यावरण के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन चुका है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जितनी तेजी से हम सबकी जिंदगी में शामिल हो रहा है, इसका जमीनी विरोध भी उतनी ही तेज हो रहा है। एआई को चलाने वाले विशाल डेटा सेंटर्स अब आम लोगों के जी का जंजाल बनते जा रहे हैं। अमेरिका के मिशिगन, यूटा और वर्जीनिया से लेकर यूरोप के स्पेन, नीदरलैंड और आयरलैंड तक लोग सड़कों पर हैं। यहां तक कि मलेशिया और चिली जैसे देशों में भी नए डेटा सेंटर्स के निर्माण को रोकने के लिए भारी प्रदर्शन हो रहे हैं। मई 2026 में आए गैलप (Gallup) के एक सर्वे के अनुसार, 71% अमेरिकी नागरिक अपने इलाके में एआई डेटा सेंटर बनने के सख्त खिलाफ हैं।

आखिर क्यों भड़क रहे हैं लोग?
स्थानीय लोगों के गुस्से के पीछे कोई कोरी कल्पना नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी गंभीर परेशानियां हैं:
जल संकट और सूखा:
एआई सर्वर्स बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करते हैं। इन्हें ठंडा रखने के लिए करोड़ों लीटर पानी की जरूरत होती है। लोग डरे हुए हैं कि कंपनियां उनके पीने और खेती का पानी सोख लेंगी।
महंगी बिजली और ब्लैकआउट:
डेटा सेंटर्स बहुत अधिक बिजली खींचते हैं। इससे लोकल पावर ग्रिड पर भारी दबाव पड़ता है। नतीजतन, आम लोगों के घरों के बिजली बिल बढ़ रहे हैं और बिजली कटौती का खतरा मंडरा रहा है।
ध्वनि प्रदूषण:
डेटा सेंटर्स में लगे विशाल चिलर (कूलिंग पंखे) 24 घंटे भारी शोर करते हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों की नींद और मानसिक शांति छिन गई है।
रोजगार का धोखा:
टेक कंपनियां बड़े रोजगार का दावा करती हैं, लेकिन मार्च 2026 की APRS रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर में हर 3.3 करोड़ डॉलर (करीब 275 करोड़ रुपये) के निवेश पर सिर्फ एक नौकरी पैदा होती है।

AI एक सेकेंड में गटक रहा 169 लीटर पानी
लैटिन अमेरिकी देश चिली में लंबे समय से पानी की कमी है। यहां की राजधानी सैंटियागो में एक बड़ी टेक कंपनी डेटा सेंटर बना रही थी, जिसे हर सेकंड 169 लीटर पानी चाहिए था। भारी जन-विरोध के बाद चिली की एक अदालत ने पर्यावरण को होने वाले नुकसान का हवाला देते हुए इस प्रोजेक्ट पर तत्काल रोक लगा दी।
आयरलैंड में तो हालात इतने खराब हैं कि वहां पैदा होने वाली कुल बिजली का 22 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सिर्फ डेटा सेंटर्स निगल रहे हैं। इसके कारण आम जनता के बिजली बिलों में भारी उछाल आया है और संसद में इस पर गंभीर बहस चल रही है।
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