चीन ने तकनीक देने से किया इनकार: अब ये देसी कंपनी अपने दम पर बनाएगी एडवांस बैटरी सेल, जानें क्या होगी खासियत

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Tue, 04 Aug 2026 02:27 PM IST
सार

चीन से बैटरी तकनीक मिलने की राह मुश्किल होने के बाद Tata Group ने नई रणनीति अपनाई है। कंपनी अब अपनी तकनीक से LFP बैटरी सेल विकसित करेगी। यह फैसला भारत को EV बैटरी निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

tata homegrown lfp battery cell india china technology ban what is lfp battery hindi
टाटा LFP बैटरी में बनेगी आत्मनिर्भर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    चीन द्वारा बैटरी निर्माण से जुड़ी अहम तकनीकों के निर्यात पर सख्ती बढ़ाने के बाद Tata Group ने बड़ा फैसला लिया है। समूह की बैटरी कंपनी एग्रटास एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशन्स (Agratas Energy Storage Solutions) अब पहली बार अपनी तकनीक के जरिए लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरी सेल विकसित करेगी। इससे कंपनी की विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी और भारत में बैटरी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब चीनी कंपनियों से तकनीक हासिल करना भारतीय कंपनियों के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

    मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एग्रटास गुजरात के सानंद में बन रही अपनी बैटरी फैक्ट्री में LFP सेल के लिए एक पायलट प्रोडक्शन लाइन तैयार कर रही है। इसी लाइन पर शुरुआती बैटरी सेल बनाए जाएंगे और बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने से पहले उनकी गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को परखा जाएगा।तीन देशों के इंजीनियर मिलकर करेंगे काम

    • बताया जा रहा है कि इस पायलट प्रोजेक्ट पर भारत, दक्षिण कोरिया और चीन के इंजीनियरों की संयुक्त टीम काम करेगी। इनकी जिम्मेदारी उत्पादन प्रक्रिया को बेहतर बनाना, शुरुआती बैच का परीक्षण करना और व्यावसायिक उत्पादन से पहले तकनीक को अंतिम रूप देना होगी।
    • रिपोर्ट्स के मुताबिक, एग्रटास ने यह रणनीति सोच-समझकर बदली है। कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि चीन द्वारा महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों के निर्यात पर कड़ी पाबंदियां लगाए जाने के बाद किसी चीनी कंपनी के साथ तकनीकी साझेदारी होने की संभावना अब लगभग समाप्त हो चुकी है। यही वजह है कि टाटा ग्रुप ने बाहरी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रिसर्च और डेवलपमेंट क्षमता को मजबूत करने का रास्ता चुना है।

    रिलायंस और JSW जैसी कंपनियां भी झेल रहीं चुनौती

    बैटरी तकनीक तक पहुंच की समस्या सिर्फ टाटा ग्रुप तक सीमित नहीं है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और जेएसडब्ल्यू ग्रुप जैसी कई भारतीय कंपनियां भी स्थानीय स्तर पर बैटरी सेल बनाने के लिए जरूरी तकनीक हासिल करने में दिक्कतों का सामना कर रही हैं। पहले जिन लाइसेंसिंग समझौतों से उम्मीद थी, वे अब अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।

    क्या होती है LFP बैटरी?

    • लिथियम आयरन फॉस्फेट यानी LFP बैटरी लिथियम-आयन बैटरी का एक प्रकार है, जिसमें कैथोड के रूप में लिथियम आयरन फॉस्फेट का उपयोग किया जाता है। यह बैटरी साधारण निकल मैंगनीज कोबाल्ट (NMC) बैटरी की तुलना में सस्ती, ज्यादा सुरक्षित और लंबी उम्र वाली मानी जाती है।
    • इसमें आग लगने का खतरा कम होता है और बार-बार चार्ज करने पर भी इसकी क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। हालांकि इसकी ऊर्जा घनत्व कम होने के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों में इसकी ड्राइविंग रेंज NMC बैटरी से थोड़ी कम होती है।
    • यही वजह है कि LFP बैटरियों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज और स्थायी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में भी तेजी से बढ़ रहा है।
    और पढ़ें...
    Login or Signup
    अपना शहर चुनें