Robo Doll: दक्षिण कोरिया में बुजुर्गों का सहारा बनीं 'रोबो डॉल', दूर कर रहीं अवसाद और अकेलापन

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Fri, 28 Nov 2025 06:05 PM IST
सार

Robo Doll For Grandmas' In South Korea:

दक्षिण कोरिया में बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है। साथा ही बुजुर्गों में अकेलापन, अवसाद व आत्महत्या के मामले भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में AI-संचालित रोबो-डॉल बुजुर्गों की भावनात्मक और दिमागी सेहत का सहारा बन रही है।

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बुजुर्गों का सहारा बनी रोबो डॉल - फोटो : AI

    विस्तार

    दक्षिण कोरिया में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं ने सरकार को गहरी चिंता में डाल दिया है। जून 2025 की ‘जर्नल ऑफ द कोरियन मेडिकल एसोसिएशन’ रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर रोज करीब 10 बुजुर्ग आत्महत्या करते हैं, जिससे यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। दुनिया के विकसित देशों में भी दक्षिण कोरिया में वृद्ध आत्महत्या दर सबसे ज्यादा मानी जाती है।

    कोरिया एक तेजी से बूढ़ा होने वाला समाज बन चुका है, जहां 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या 1 करोड़ से भी ज्यादा है। पारंपरिक संयुक्त परिवार तेजी से टूट रहे हैं और अब हर तीन में से एक बुजुर्ग अकेला रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस अकेलेपन, आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव ने वरिष्ठ नागरिकों को अवसाद, असुरक्षा और आत्महत्या की ओर धकेला है।

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    रोबो डॉल बनी बुजुर्गों का सहारा

    इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए दक्षिण कोरिया की सरकार और तकनीकी कंपनियां बुजुर्गों की देखभाल के लिए AI के जरिए समाधान तलाश रही हैं। इसी दिशा में सामने आई है Hyodol नाम की कंपनी, जिसने बुजुर्गों के लिए खास रोबोटिक डॉल तैयार की है जिसे लोग प्यार से रोबो-ग्रैंडमा या AI साथी कहने लगे हैं। यह कपड़े और सॉफ्ट मैटेरियल से बनी 15–20 इंच की गुड़िया जैसी दिखती है, लेकिन इसके अंदर लगा AI इसे एक बातूनी, हंसमुख साथी बना देता है।

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    डॉल बुजुर्गोंसे बना रही भावनात्मक रिश्ता

    Hyodol डॉल बुजुर्गों की दवाइयों की याद दिलाती है, आपात स्थिति में अलर्ट भेजती है और उनके रोजमर्रा के कामों पर नजर रखती है। यह एक एप और वेब प्लेटफॉर्म से जुड़ी होती है, जिससे परिवार और सोशल वर्कर दूर रहकर भी बुजुर्गों की स्थिति देख सकते हैं। लेकिन इसका सबसे कारगर पहलू है भावनात्मक साथ। डॉल सिर पर हाथ फेरने या हाथ पकड़ने पर प्रतिक्रिया देती है और बच्चों जैसी आवाज में बातचीत करती है। घर लौटने पर वह बुजुर्गों का स्वागत करती है “दादी/दादा, मैं आपका इंतजार कर रही थी।”

    एडल्ट केयर में बढ़ रही है AI मांग
    एडल्ट केयर में बढ़ रही है AI मांग - फोटो : AI

    कंपनी की CEO जीही किम का कहना है कि इसकी क्यूट और भरोसेमंद डिजाइन बुजुर्गों को इससे भावनात्मक जुड़ाव बनाने में मदद करती है। फिलहाल 12,000 से ज्यादा Hyodol रोबोट सरकारी और वेलफेयर प्रोग्राम्स के जरिए बांटे जा चुके हैं, जबकि 1,000 परिवारों ने इन्हें खुद खरीदा है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर दिख रहा असर

    कई केस स्टडीज में देखा गया है कि यह रोबोट बुजुर्गों के अवसाद और अकेलेपन को काफी हद तक कम करता है। एक सोशल वर्कर ने बताया कि उनकी एक बेहद अवसादग्रस्त क्लाइंट बाल्कनी से कूदने का सोचती थीं, लेकिन Hyodol मिलने के बाद उनकी मानसिक स्थिति में बड़ा सुधार आया।

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    हालांकि इसके बढ़ते उपयोग के साथ कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि गुड़िया जैसी आकृति बुजुर्गों को ‘इंफैंटलाइज’ कर सकती है, यानी उन्हें बच्चों जैसा महसूस करवाकर उनकी गरिमा को प्रभावित कर सकती है। कुछ मामलों में बुजुर्ग रोबोट पर इतना निर्भर हो गए कि उन्होंने सामाजिक संपर्क कम कर दिया। कंपनी का कहना है कि यह उपकरण मानव देखभाल का विकल्प नहीं बल्कि सहयोगी साधन है, इसलिए हर बुज़ुर्ग के लिए उपयुक्त नहीं है।

    एडल्ट केयर में भी बढ़ रही है AI मांग

    दूसरी ओर, जापान में PARO नाम का थेरेपी रोबोट पहले से ही बुजुर्गों और PTSD मरीजों के लिए सफल हो चुका है। बिना आवाज वाला यह सॉफ्ट-टॉय रोबोट भावनात्मक सहारा देता है। यह 30 देशों में उपयोग हो रहा है। अब Hyodol भी वैश्विक बाजार में प्रवेश की तैयारी कर रहा है और 2026 में अंतरराष्ट्रीय लॉन्च की योजना बना रहा है।

    विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक वैश्विक एल्डरकेयर रोबोट बाजार 7.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। ऐसे में AI-आधारित साथी बुजुर्गों की देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

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