क्या आप जानते हैं, कौन बनाता है गूगल के नए-नए डूडल?

एलिज़ाबेथ गारोन/बीबीसी कैपिटल
Tue, 03 May 2016 05:11 PM IST
सार
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Ryan Germick: Meet the man behind Google's Doodles
रेयान गर्मिक

    विस्तार

    सर्च इंजन गूगल हर दिन की ख़ासियत के हिसाब से डूडल लगाता है। सोशल मीडिया से लेकर अखबारों और टीवी तक गूगल के डूडल की चर्चा होती है। लेकिन इन डूडल्स के पीछे किसका दिमाग़ होता है? चलिए आपको उस शख़्स से मिलवाते हैं।

    उनका नाम है रेयान गर्मिक। अमरीका के रहने वाले रेयान को बचपन से ही ड्रॉइंग बनाने का शौक़ था। बचपन का ये शौक़ आज उनका करियर बन चुका है। इंसान की कलाकारी के शुरुआती नमूने, इन ड्रॉइंग्स का आज की हाई टेक्नोलॉजी से मिलन हो रहा है। रेयान गर्मिक इसके सबसे बड़े नुमाइंदे बन गए हैं।

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    कभी उनकी ड्रॉइंग की तारीफ़ उनके मां-बाप और भाई-बहन करते थे। आज दुनिया भर में करो़ड़ों लोग उनके मुरीद बन गए हैं। जो लोग भी गूगल के होम पेज पर डूडल की तारीफ़ करते हैं वो रेयान की तारीफ़ करते हैं। गूगल के वो चीफ़ डूडलर हैं।

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    उनके अंडर क़रीब दर्जन भर लोग काम करते हैं। जो गूगल के डूडल या उसके लोगों को बदल-बदलकर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश में लगे रहते हैं। रेयान आज कहते हैं कि उन्होंने कभी ख़्वाब में भी नहीं सोचा था कि कभी गूगल के लिए काम करेंगे वो भी अपनी ड्रॉइंग की बदौलत।

    क्या आप जानते हैं, कौन बनाता है गूगल के नए-नए डूडल?

    रेयान ने जो नौकरी की पहली अर्ज़ी लगाई थी वो गूगल में ही थी। साल 2006 में गूगल ने उन्हें वेब ग्राफ़िक्स स्पेशलिस्ट के तौर पर नौकरी पर रखा। इसके बाद अब तक रेयान ने दूसरी नौकरी नहीं तलाशी है।

    रेयान कहते हैं कि वो क़त्तई स्पेशलिस्ट नहीं थे। वो तरह-तरह के स्केच बनाते थे। उसी से बड़ी कंपनियों के लोगों की तरफ़ लोगों का ध्यान खींचने की शुरुआत हुई।

    रेयान का बनाया सबसे मशहूर चित्र है गूगल मैप का पेगमैन। आज भी जब आप गूगल स्ट्रीट व्यू की सेटिंग खोलते हैं तो पेगमैन कूदकर आपके सामने आ जाता है।

    गूगल के पहले वायरल वीडियो के लिए रेयान ने इसमें कुछ और चीज़ें जोड़ दी थीं। गूगल के इस वीडियो को क़रीब एक करोड़ तीस लाख लोगों ने देखा था।

    रेयान आज भी उस कामयाबी को याद करके सहम जाते हैं। रेयान कहते हैं कि ये उनका बहुत ख़राब तजुर्बा था। शुरुआत में इंटरनेट के बारे में बोलने वालों ने उनकी बैंड बजा दी थी।

    मगर आज वो कहते हैं कि वो एक सीखने वाला तजुर्बा था। लोगों की बकवास को दरकिनार कर आपको आगे बढ़ते रहना चाहिए।

    आख़िरकार रेयान को डेनिस ह्वांग की गूगल डूडल टीम में जगह मिल गई। डेनिस को गूगल डूडल का जनक कहा जाता है।

    क्या आप जानते हैं, कौन बनाता है गूगल के नए-नए डूडल?

    वहां पहुंचकर रेयान को इंटरनेट की ताक़त का अंदाज़ा हुआ। आज वो कहते हैं कि अगर कोई कलाकार पेंटिंग बनाता है तो उसे वही जानता है या फिर कोई ख़रीददार।

    लेकिन अगर कोई कलाकार बाक़ी दुनिया से अपनी कलाकारी के ज़रिए बात करना चाहता है तो इंटरनेट पर डिजिटल ड्रॉइंग, स्केच या पेंटिंग इसका सबसे अच्छा ज़रिया है।

    आज इंटरनेट, क्रिएटिविटी और तकनीक के बीच पुल का काम करता है।

    न्यूयॉर्क की मोबाइल विज्ञापन कंपनी कारगो की मेलिसा सिमसन कहती हैं कि किसी डिज़ाइन को विकसित करना सिर्फ़ तस्वीर बनाना नहीं। इससे कई मुश्किलों का हल भी निकलता है। फिर तकनीक की मदद से इसका ज़्यादा से ज़्यादा प्रचार और इस्तेमाल हो सकता है।

    वो कहती हैं कि कलाकारी और तकनीक के इस मेल की आज भारी डिमांड है।

    रेयान कहते हैं कि गूगल का कामयाब डूडलर होने के लिए कई शर्तें हैं। आपको अच्छा काम करने की आदत होनी चाहिए। फिर आपको हमेशा सीखने के लिए तैयार रहना होगा।

    आपका मज़ाक़िया होना भी ज़रूरी है। कम से कम एक प्रतिभा होनी भी ज़रूरी है। डूडलर के अंदर कलाकारी और तकनीकी समझ का तालमेल होना सबसे ज़रूरी है।

    क्या आप जानते हैं, कौन बनाता है गूगल के नए-नए डूडल?

    इसी की मदद से अपनी कलाकारी को तकनीक की मदद से ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

    रेयान गर्मिक आज कैलिफ़ोर्निया में गूगल के हेडक्वार्टर में क़रीब दर्जन भर डूडलर्स के साथ काम करते हैं। उनके साथ पूरी दुनिया में गूगल के लिए डूडल बनाने वाले सैकड़ों लोगों की टीम जुड़ी हुई है।

    गूगल के डूडल आज इस बात के लिए बदनाम हो चुके हैं कि लोग उन्हें देखने के चक्कर में काम पर ध्यान नहीं देते।

    मगर उन्हें इस बात की शोहरत भी मिली है कि वो लोगों को भूले-बिसरे लोगों की याद दिलाते हैं। उनसे रूबरू कराते हैं। कई बार गूगल डूडल लोगों को नाराज़ भी कर चुके हैं।

    इसकी शुरुआत 1998 में हुई थी। जब गूगल के संस्थापक लैरी पेज और सर्जेई ब्रिन बर्निंग मैन फ़ेस्टिवल में जा रहे थे। वो स्केच के ज़रिए लोगों को बताना चाहते थे कि वो दफ़्तर से बाहर हैं। इसी तरह डूडल की शुरुआत हुई।

    क्या आप जानते हैं, कौन बनाता है गूगल के नए-नए डूडल?

    एक नोटिफ़िकेशन के तौर पर शुरू किए गए डूडल आज गूगल का बड़ा ब्रांड बन गए हैं। इससे गूगल हमेशा सुर्ख़ियों में रहता है।

    न्यूयॉर्क के तकनीकी एक्सपर्ट एशर फेल्डमैन कहते हैं कि गूगल के डूडल बिना किसी तमाशे के अपनी बात को करोड़ों लोगों तक पहुंचा देते हैं। ये लंबे वक़्त तक लोगों के ज़ेहन में भी रहते हैं।

    वैसे रेयान गर्मिक का कोई पसंदीदा डूडल नहीं। लेकिन वो कलाकारी के तकनीक के मेल से ख़ुश होते हैं।

    रेयान को उन डूडल्स को लेकर ख़ास ख़ुशी होती है जिनमें लोगों की हिस्सेदारी होती है। जैसे मशहूर संगीतकार ले पॉल के 96वें जन्मदिन पर गूगल का डूडल एक वर्चुअल गिटार था। इसमें लोग अपनी बनाई धुनें भी जोड़ सकते थे।

    वैसे कुछ गूगल डूडल बड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते भी नज़र आते हैं। जैसे रूस के सोची में 2014 के विंटर ओलंपिक के वक़्त बनाया गया डूडल। जिसमें रूस के समलैंगिकता के ख़िलाफ़ क़ानूनों का विरोध किया गया था।

    क्या आप जानते हैं, कौन बनाता है गूगल के नए-नए डूडल?

    रेयान के सहयोग से बने उस डूडल में इंद्रधनुष के ज़रिए ये संदेश देने की कोशिश की गई थी कि हर इंसान बराबर है और उससे कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

    न्यूयॉर्क की मोबाइल विज्ञापन कंपनी कारगो की मेलिसा सिमसन कहती हैं कि आईटी सेक्टर में किसी क्रिएटिव नौकरी के लिए आपको कलाकारी तो आती ही हो, तकनीक की भी अच्छी समझ होनी चाहिए।

    तभी आप वहां की चुनौतियों का हल ढूंढ पाएंगे। हर डिज़ाइन के पीछे किसी दिक़्क़त को सुलझाने का मक़सद होना चाहिए। तभी आप इस दुनिया में करियर बना सकेंगे।

    न्यूयॉर्क के ही रोड आइलैंड स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन के निदेशक केविन जांकोवस्की अपने छात्रों को यही सीख देते हैं।

    अपनी कला के सीधे असर को दिखाने के बजाय, तकनीक की मदद से उसके ज़्यादा बेहतर इस्तेमाल के तरीक़े खोजें। तभी कंपनियों को उनकी क़ाबिलियत और उनके बेहतर इस्तेमाल की सूझेगी।

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