व्हाट्सएप के अलावा फेसबुक, जीमेल भी Pegasus के निशाने पर, चुटकियों में कर सकता है हैक

हाल ही में व्हाट्सएप ने इजरायल की साइबर कंपनी NSO पर हैकिंग का आरोप लगाया था। कंपनी का कहना था कि एनएसओ ने पिगासस सॉफ्टवेयर के जरिए 1,400 भारतीय पत्रकारों और समाजिक कार्यकर्ताओं के डाटा को हैक किया था। वहीं, जासूसी मामले में यूजर्स की संख्या में इजाफा हो सकता है। दूसरी ओर साइबर विशेषज्ञों की मानें तो पिगासस व्हाट्सएप के अलावा अन्य एप्स के प्लेटफॉर्म के जरिए भी यूजर्स की जासूसी करता हैं। वहीं, इस सॉफ्टवेयर से आईओएस, एंड्रॉयड और ब्लैकबेरी के डिवाइसेज को हैक किया जा सकता है। तो आइए जानते हैं कि पिगासस ने किन एप्स को हैकिंग के लिए इस्तेमाल किया है और साथ ही किन एप्स को निशाना बनाया है...
सूत्रों की मानें तो एनएसओ ने पिगासस के जरिए 20 देशों के पत्रकार, समाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के अधिकारियों की जानकारी हैक की थी। एशिया पॉलिसी डायरेक्टर और सीनियर इंटरनेशनल काउंसल रमनजीत सिंह चीमा ने कहा है कि एनएसओ जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियां अपने ग्राहकों को उस व्यक्ति के मोबाइल की सारी जानकारी देती हैं, जिसको वे ट्रैक करती हैं। उन्होंने आगे कहा है कि सोशल मीडिया एप फेसबुक, ई-मेल, वाइबर और जी-मेल पर आसानी से सेंध लगाई जा सकती है।
गूगल की प्रॉजेक्ट जीरो टीम ने सितंबर में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम की कमियों को उजागर किया था। शाओमी, वीवो, ओप्पो और सैमसंग के फोन्स को आसानी से हैक किया जा सकता है। वहीं, इस हैकिंग के लिए गूगल ने इजरायली टेक कंपनी एनएसओ को जिम्मेदार ठहराया था। हैकिंग के बाद ही स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने यूजर्स के लिए तुरंत सिक्योरिटी पैच जारी किए थे।
2016 में एनएसओ ने पिगासस के जरिए आईफोन को हैक करने की कोशिश की थी। जैसे ही एपल को इसकी जानकारी मिली, तो कंपनी ने तुरंत यूजर्स के लिए अपडेट जारी किया था। वहीं, 2017 में आई रिपोर्ट में पता चला था कि सबसे समाजिक कार्यकर्ता अहमद मंसूर को पिगासस की जानकारी मिली थी। रिपोर्ट में आगे कहा गया था कि हाईटेक प्लेटफॉर्म को हैक करने के लिए इस सॉफ्टवेयर पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद से ही एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम को हैक करना आसान हो गया था।
लुकआउट की रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्चर्स को 2017 में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर पेगासस को मौजूदगी की जानकारी मिली थी। वहीं, सुरक्षा के लिहाज से आईओएस एंड्रॉयड की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है। लुकआउट का मानना है कि अगर पिगासस जैसा स्पाईवेयर आईओएस को हैक नहीं कर पाता है, तो उसका पूरा हमला नाकाम हो जाता है।
सिटिजन लैब की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी एजेंसियां पिगासस जैसे स्पाईवेयर के जरिए उन यूजर्स की जासूसी करती हैं, जिससे सरकार को खतरा होता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस सॉफ्टवेयर को राजनीतिक इरादों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
व्हाट्सएप ने कहा है कि जासूसी के मामले में लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, इस सॉफ्टवेयर से भारत में 1,400 यूजर्स प्रभावित हुए हैं। वहीं, हमने यूजर्स को नोटिफिकेशन भेज सतर्क रहने को कहा है। हम अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर यूजर्स के डाटा को सुरक्षित रखने के लिए काम कर रही है। दूसरी तरफ दुनियाभर में सर्विलान्स सॉफ्टवेयर की मांग बढ़ी हैं।
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