Digital Dementia: कैसे प्रभावित करता है डिजिटल डिमेंशिया, जानें बचाव के लिए क्या करें

अमित कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीअमित कुमार
Wed, 04 Sep 2024 07:10 PM IST
सार

अगर आप दिन में कई घंटे तक लगातार स्क्रीन पर वक्त व्यतीत करते हैं तो आपको सावधान होने की जरूरत है। आप डिजिटल डिमेंशिया के शिकार हो सकते हैं। आगे जानिए इस परेशानी से किस तरह से बचाव कर सकते हैं।

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more screen time and no exercise may push you to digital dementia know detail
Digital Dementia - फोटो : FREEPIK

    विस्तार

    क्या आपका काम ऐसा है, जिसमें आप लगातार लंबे समय तक स्क्रीन पर लगे रहते हैं और इस दौरान किसी तरह की कोई फिजिकल गतिविधि नहीं करते हैं। अगर हां तो आपको सतर्क होने की जरूरत है। दरअसल, ऐसा लंबे समय तक करने से दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है और इस वजह से 'डिजिटल डिमेंशिया' हो सकता है। 'डिजिटल डिमेंशिया' एक तरह की दिमागी परेशानी है, जिसमें व्यक्ति डिजिटिल डिवाइस जैसे स्मार्टफोन और कंप्यूटर आदि पर अत्यधिक निर्भता हो जाती है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल डिमेंशिया में लंबे समय तक स्क्रीन पर समय गुजारने से दिमाग के कॉन्जीनेटिव फंक्शन बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। अगर व्यक्ति लंबे समय तक स्क्रीन पर समय व्यतीत करता है तो इस दौरान इंसान की बैठने की क्षमता पर जो सीधे तौर पर स्पाइन से जुड़ी होती है, उस पर असर पड़ता है। व्यक्ति को इस वजह से स्वास्थ्य संबंधित कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसमें मोटापा, स्पाइन में परेशानी समेत कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।

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    डिजिटल डिमेंशिया मुख्य तौर पर इंसान के दिमाग के कॉन्जीनेटिव कार्यप्रणालियों को बुरी तरह से खराब कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो व्यक्ति को रोजाना के कार्य करने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डिजिटल डिमेंशिया को लेकर रिपोर्ट में बताया गया है कि यह समस्या बुर्जगों को और ज्यादा प्रभावित कर सकती है, क्योंकि उनकी फिजिकली एक्टिविटी काफी कम होती है। इस वजह से डिजिटल डिमेंशिया की परेशानी में इजाफा हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी बताया जा रहा है कि यह परेशानी किशोरों के लिए काफी बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

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    इस समस्या से बचने के लिए फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ाना और और स्क्रीन टाइम को कम करना ही एकमात्र उपाय है। रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल डिमेंशिया के जोखिम को कम करने के लिए फिजिकली गतिविधि के स्तर को बढ़ाना ही पड़ेगा। वहीं, अगर स्मार्टफोन और टेलीविजन जैसी स्क्रीन पर ज्यादा समय गुजारा गया तो इसके खतरे की संभावना उतनी ही तेजी से बढ़ेगी।

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