Scam का नया तरीका: एआई डीपफेक तकनीक की मदद से केरल के एक व्यक्ति से ठगी, लगाया 40 हजार का चूना

विशाल मैथिल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीविशाल मैथिल
Tue, 18 Jul 2023 07:18 PM IST
सार

यह कोई डीपफेक तकनीक की मदद से हुआ पहला स्कैम नहीं है। इससे पहले चीन में एक व्यक्ति के साथ AI की मदद से ही 5 करोड़ की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।

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Kerala Man Loses rs 40000 To AI Deepfake Scam know What It Is
AI Deepfake Scam - फोटो : सोशल मीडिया

    विस्तार

    दुनियाभर में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे नई क्रान्ति के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के आते ही इसका गलत इस्तेमाल भी शुरू हो गया है। अब एआई की मदद से स्कैम के मामले भी सामने आने लगे हैं। एआई की डीपफेक तकनीक की मदद से केरल के एक व्यक्ति को 40 हजार रुपये का चूना लगाया गया है। जानते हैं क्या है पूरा मामला।

    मामला केरल के कोझिकोड का बताया जा रहा है, जहां एक व्यक्ति राधाकृष्णन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्कैम का शिकार होकर 40,000 रुपये गंवा दिए। पुलिस के अनुसार, यह एक डीपफेक स्कैम है जिसमें कोई ऐसा व्यक्ति शामिल है जिसे वह जानता था। केरल पुलिस के अनुसार, राधाकृष्णन को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आया। जब उन्होंने कॉल रिसीव की तो दूसरी तरफ से व्यक्ति आंध्र प्रदेश में उनके पूर्व सहयोगियों में से एक जैसा लग रहा था।

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    दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति ने अस्पताल में एक रिश्तेदार की मदद के लिए राधाकृष्णन से गूगल पे के जरिए 40 हजार रुपये की मांग की। राधाकृष्णन ने पैसे भेज दिए लेकिन जब इसके बाद फिर से 30 हजार रुपये की मांग की गई तो राधाकृष्णन को संदेह हुआ और उन्होंने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

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    एआई के अधिक पावरफुल होने के साथ स्कैमर्स इसका फायदा उठा रहे है। इस स्कैम में डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक में असली और नकली के बीच अंतर करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। एआई तकनीक का उपयोग चेहरे की छवियों और आवाज रिकॉर्डिंग जैसे डाटा का एनालिसिस करने के लिए किया जाता है, जिससे रियलिस्टिक डीपफेक वीडियो बनाने में मदद मिलती है जो किसी व्यक्ति की उपस्थिति और आवाज की बारीकी से नकल करते हैं। साफ शब्दों में कहें तो डीपफेक तकनीक की मदद किसी भी व्यक्ति की शक्ल और आवाज कॉपी की जा सकती है और सामने वाले को असली और नकली का पता लगाना भी मुश्किल हो जाएगा।

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