गूगल मैप्स को टक्कर देगा भारतीय का 'नाविक', जल्द ही इन स्मार्टफोन में कर सकेंगे इस्तेमाल

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) ने देश के लोगों के लिए पहला डिजिटल मैप नाविक (Navic) तैयार किया है। वहीं, लोग देशी मैप को 2020 से क्वालकॉम के प्रोसेसर वाले स्मार्टफोन में इस्तेमाल कर सकेंगे। इसरो और टेक कंपनी क्वालकॉम (Qualcomm Technologies) ने साझेदारी की है। इसके साथ ही नाविक प्लेटफॉर्म को IRNSS तकनीक का सपोर्ट मिलेगा। क्वालकॉम की लोकेशन बेस्ड टेक्नोलॉजी इस समय भारत के सात सैटेलाइट्स के साथ काम कर रही हैं। इससे यूजर्स सटीक लोकेशन की जानकारी हासिल कर सकेंगे।
इसरो और क्वालकॉम ने इस नेविगेशन मैप में चिपसेट का उपयोग किया है। इस वजह से यह सेवा कुछ चुनिंदा स्मार्टफोन और ऑटोमोटिव यूजर्स के लिए उपलब्ध हैं। यदि नाविक और स्टैंडर्ड जीपीएस मिलकर काम करते हैं, तो इससे नेविगेशन बहुत सटीक हो जाएगा।
इसरो के चीफ डॉ. के सिवन ने कहा है कि हम नाविक के जरिए देश में विकास की गति को तेज करना चाहते हैं। हमने क्वालकॉम टेक्नोलॉजी की मदद से इस प्लेटफॉर्म को तैयार किया है। साथ ही लोगों को इससे बहुत लाभ होने वाला हैं।
सन 1999 के कारगिल युद्ध के बाद भारत ने नाविक नेविगेशन सिस्टम को तैयार करने पर विचार किया था। उस समय भारत ने पाकिस्तानी सैनिकों की लोकेशन की जानकारी हासिल करने के लिए अमेरिका से मदद मांगी थी, लेकिन अमेरिका ने इसके लिए साफ मना कर दिया था।
इसरो ने नाविक के लिए पहली सैटेलाइट आईआरएनएसएस-1ए का 1 जुलाई, 2013 को प्रक्षेपित की थी। गत् 12 अप्रैल को आईआरएनएस सीरीज की सातवीं सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण के साथ नाविक के लिए आवश्यक सूचना तंत्र पूरा हो गया था। हालांकि इसे और ज्यादा सटीक जानकारी वाला बनाने के लिए भविष्य में सैटेलाइट की संख्या बढ़ाकर 11 करने की योजना है।
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