Russia Digital Control: बार-बार इंटरनेट बंद होने से लोगों में बढ़ रहा गुस्सा, कहा रूस डिजिटल तानाशाही की ओर
Russia 2025 Digital Control:
रूस में मई 2025 से मोबाइल इंटरनेट बार-बार बंद किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह कदम यूक्रेनी ड्रोन हमलों से सुरक्षा के लिए है, लेकिन आम लोग इसे डिजिटल कंट्रोल और निगरानी की ओर बढ़ते कदम के तौर पर देख रहे हैं।

विस्तार
इंटरनेट लोगों की दिनचर्या का बड़ा हिस्सा बन गया है, लेकिन अगर इंटरनेट ही बंद हो जाए तो लोगों की जिंदगी कैसे थम जाती है। रूस के लोग इस वक्त ऐसा ही महसूस कर रहे हैं। मई 2025 से रूस के दर्जनों क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट बार-बार बंद किया जा रहा है।
नवंबर में तो औसतन हर दिन करीब 57 क्षेत्रों में कनेक्टिविटी ठप रही। सरकार का दावा है कि यह यूक्रेनी ड्रोन हमलों को रोकने के लिए जरूरी है। साथ ही व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग एप्स को भी धीमा या ब्लॉक किया जा रहा है।
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इंटरनेट बंद होने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी ठप हो गई है। जैसे की वो कहीं पेमेंट नहीं कर पा रहे हैं। बस-मेट्रो का टिकट नहीं खरीद पा रहें और न ही एटीएम व बैंकिंग एप का इस्तेमाल कर पा रहे हैं। विदेश से आने वाले लोग फोन तक एक्टिवेट नहीं कर पा रहे हैं। अस्पताल और मेडिकल डिवाइस भी नहीं कनेक्ट हो पा रही है। ऐसे में लोगों को गुस्सा दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। डायबिटिक से पीड़ित बच्चों के माता-पिता की टेंशन और बढ़ गई है। उनका कहना है कि इंटरनेट बंद होने के बाद से हम अपने बच्चों की ब्लड शुगर रिपोर्ट नहीं देख पा रहे हैं। डर है कि कहीं एक गलती जिंदगी न ले ले।
व्हाट्सएप और टेलीग्रामनिशाने पर
सांसद आंद्रेई स्विंत्सोव ने चेतावनी दी कि क्या अब सारे बिजली मीटर मर जाएंगे? हीटिंग बंद हो जाएगी? चीनी गाड़ियां रुक जाएंगी? यह बहुत बड़ी समस्या है। अगस्त से व्हाट्सएप (अक्तूबर में 9.6 करोड़ मासिक यूजर) और टेलीग्राम (9.1 करोड़) की कॉल ब्लॉक और कुछ जगहों पर गति धीमी कर दी गई है। दोनों व्हाइट लिस्ट में नहीं हैं। क्योंकि अब सरकार चाहती है कि लोग उनका अपना MAX एप इस्तेमाल करें। जो न तो एन्क्रिप्टेड है, और न ही प्राइवेट। इसमें साफ लिखा है कि अगर अथॉरिटी ने मांगा तो डेटा दे दिया जाएगा। यह अब हर नए स्मार्टफोन में जरूरी किया जाएगा।
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इतना ही नहीं यहां तो विदेशी लोगों का या 72 घंटे इनएक्टिव सिम को पूरा तरह ब्लॉक कर दिया जाता है। अनब्लॉक करने के लिए एसएमएस से लिंक आता है। लेकिन अगर सिम पोर्टेबल राउटर, गाड़ी, स्मार्ट मीटर या हीटिंग बॉयलर में लगी हो (जहां एसएमएस नहीं पढ़ा जा सकता), तो अनब्लॉक करना असंभव हो जाता है।
ऑफलाइन रहो, जिंदगी का मजा लो...
सरकार का कहना है कि ऑफलाइन रहो, जिंदगी का मजा लो। जिसपर लोगों ने प्रतिक्रिया दी कि लाइफ नहीं, सिस्टम बंद किया है। ये डिजिटल ब्लैक आउट है। तकनीक बंद कर आजादी नहीं, बल्कि डर बढ़ता है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा से ज्यादा सूचना नियंत्रण की रणनीति है। वीपीएन अभी तक सस्ता है, लेकिन हर कुछ महीने में नया ढूंढना पड़ रहा है। और अब लोग कहने लगे हैं कि शायद सरकार का लक्ष्य है कि लोग कोशिश करना छोड़ दें।
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