Internet Cable: समंदर के नीचे टूटी इंटरनेट केबल कैसे होती है ठीक? नहीं जानते 90% लोग
How Under Sea Internet Cable Repaired:
हाल ही में लाल सागर के नीचे इंटरनेट केबल टूटने से कई देशों में कनेक्टिविटी प्रभावित हुई। लेकिन क्या आप जानते हैं, समुद्र के नीचे टूटी ऑप्टिक (इंटरनेट) केबल को कैसे ठीक किया जाता है? जानिए इस जटिल और रोचक प्रक्रिया के बारे में विस्तार से।

विस्तार
पिछले सप्ताह ही लाल सागर (Red Sea) के नीचे से गुजरने वाले ऑप्टिक केबल्स के कटने से दुनियाभर के कई देशों में इंटरनेट की रफ्तार थम गई थी। केबल कटने से मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया के कई देशों में इंटरनेट की समस्या उतपन्न हो गई थी। आमतौर पर समुद्र के अंदर केबल कटने के पीछे जहाजों के एंकर, प्राकृतिक आपदाएं, तोड़फोड़ या युद्ध जिम्मेदार होते हैं।
हालांकि, इंटरनेट केबल को समुद्र के नीचे बिछाने से ज्यादा मुश्किल काम उसमें आई खराबी को ठीक करना होता है। अगर कहीं केबल कट गई तो उसका पता लगाकर ठीक करने में महीनों लग जाते हैं। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि केबल कट जाए तो उसे पानी के अंदर जाकर ठीक किया जाता है। दरअसल, होता तो ऐसा ही है लेकिन यह जानकारी पूरी नहीं है। तो चलिए जानते हैं समुद्र के नीचे कटी केबल को कैसे ठीक किया जाता है।
केबल टूटने का पता कैसे चलता है?
इंटरनेट कंपनियां लगातार डेटा फ्लो मॉनिटर करती हैं। जैसे ही किसी केबल में दिक्कत आती है, तुरंत नेटवर्क स्लो या कट ऑफ हो जाता है। ऐसे में टेक्नीशियन "टेस्ट सिग्नल" भेजकर पता लगाते हैं कि केबल कहां टूटी है। आपको बता दें कि समंदर में खास तरह के जहाज होते हैं जिन्हें "केबल शिप" कहा जाता है। ये शिप टूटे हुए हिस्से तक पहुंचने के लिए GPS और अंडरवॉटर मैप्स का सहारा लेते हैं।
समुद्र से बाहर निकाला जाता है केबल
केबल कहां टूटी है यह बता लगने पर केबल शिप को वहां भेजा जाता है। इसके बाद केबल को ऊपर खींचने के लिए जहाज से एक तरह का ग्रैपल (लोहे का हुक जैसा उपकरण) समुद्र की गहराई में भेजा जाता है। इस ग्रैपल से टूटी हुई केबल को पकड़कर धीरे-धीरे ऊपर जहाज पर खींचा जाता है।
जहाज पर इंजीनियर दोनों सिरों को साफ करते हैं और फाइबर ऑप्टिक धागों को विशेष तकनीक से जोड़ते हैं। यह जोड़ने की प्रक्रिया बेहद सटीक होती है, क्योंकि फाइबर ऑप्टिक तार बाल से भी पतला होता है।
टेस्टिंग के बाद की प्रक्रिया
मरम्मत के बाद केबल को सावधानी से दोबारा समुद्र की गहराई में छोड़ दिया जाता है। ये पूरी प्रक्रिया कई बार कुछ दिनों से लेकर महीनों तक चल सकती है, इस पर निर्भर करता है कि टूट-फूट कहां और कितनी गहराई पर हुई है।