Deep-Tech Policy: भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को बड़ी राहत, सरकार ने बदला 10 साल पुराना नियम
India Startup Policy:
भारत सरकार ने डीप टेक, सेमीकंडक्टर और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए स्टार्टअप से जुड़े नियमों में एतिहासिक बदलाव किया है। अब ऐसी कंपनियों को 20 साल तक 'स्टार्टअप' का दर्जा मिलेगा, जबकि पहले यह सीमा सिर्फ 10 साल थी। साथ ही, सालाना टर्नओवर की सीमा भी ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹300 करोड़ कर दी गई है, जिससे ज्यादा कमाई के बावजूद कंपनियों को टैक्स छूट, सरकारी मदद और आसान नियमों का फायदा मिलता रहेगा।

विस्तार
भारत सरकार ने अंतरिक्ष चिप बनाने (सेमीकंडक्टर) और दवाइयों पर शोध (बायोटेक) करने वाली कंपनियों के लिए नियमों को बहुत आसान बना दिया है। पहले इन कंपनियों को उनके शुरू होने के केवल 10 साल तक ही 'स्टार्टअप' माना जाता था। लेकिन अब सरकार ने इस समय को बढ़ाकर 20 साल कर दिया है। ऐसी कंपनियों को अपनी तकनीक विकसित करने और सफल होने में बहुत लंबा समय लगता है। अब 20 साल तक 'स्टार्टअप' की श्रेणी में रहने की वजह से इन्हें लंबे समय तक सरकारी मदद, टैक्स में छूट और कम कागजी कार्रवाई का फायदा मिलता रहेगा।
अब ₹300 करोड़ कमाई होने के बावजूद मिलेगा स्टार्टअप का दर्जा
सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए न केवल समय-सीमा बढ़ाई है बल्कि उनकी कमाई की लिमिट में भी बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां ₹100 करोड़ की कमाई होते ही कंपनियों से स्टार्टअप का दर्जा छीन लिया जाता था, वहीं अब इस सीमा को बढ़ाकर ₹300 करोड़ कर दिया गया है, ताकि ज्यादा कमाई के बावजूद उन्हें टैक्स छूट और सरकारी मदद जैसी सुविधाएं मिलती रहें। इसका मुख्य कारण यह है कि विज्ञान और डीप टेक पर काम करने वाली कंपनियों को अपना प्रोडक्ट तैयार करने और उसे बाजार तक लाने में कई साल लग जाते हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जो कंपनियां पहले तकनीक पूरी होने से पहले ही सरकारी कागजों में 'पुरानी' होकर निवेशकों को स्टार्टअप फेल होने का संकेत देती थीं, वे अब बिना किसी दबाव के शांति से अपनी रिसर्च और तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।
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स्टार्टअप्स के लिए सरकार और निजि कंपनियों ने मिलकर बनाया फंड
सरकार और बड़े निवेशक अब मिलकर उन स्टार्टअप्स की मदद कर रहे हैं जो नई खोज और रिसर्च (आर एंड डी) करते हैं।
सरकारी मदद:
सरकार ने ₹1 लाख करोड़ का एक खास फंड बनाया है। यह फंड उन कंपनियों को पैसा देगा जिन्हें अपनी रिसर्च पूरी करने के लिए बहुत लंबे समय तक पूंजी की जरूरत होती है। इसे 'पेशेंट कैपिटल' कहते हैं क्योंकि इसमें निवेशक को मुनाफे के लिए जल्दबाजी नहीं होती।
निजी कंपनियों का साथ:
भारत और अमेरिका की बड़ी निवेशक कंपनियों (जैसे एक्सेल और प्रेमजी इन्वेस्ट) ने मिलकर 'इंडिया डीप टेक एलायंस' बनाया है। यह एक गुट है जिसने ₹8,000 करोड़ ($1 बिलियन) से ज्यादा का निवेश करने का फैसला किया है।
दिग्गज कंपनियों की सलाह:
दुनिया की सबसे बड़ी चिप बनाने वाली कंपनी एनवीडिया इसमें सलाहकार के तौर पर जुड़ी है ताकि इन स्टार्टअप्स को सही दिशा मिल सके।
अन्य समृद्ध देशों के मुकाबले भारत अभी भी पीछे
सरकार के इस कदम से भारतीय स्टार्टअप्स में अब निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है लेकिन दुनिया के मुकाबले हम अभी भी काफी पीछे हैं। 2024 में भारतीय डीप टेक कंपनियों को करीब $1.1 बिलियन (लगभग ₹9,000 करोड़) मिले थे जो 2025 में बढ़कर $1.65 बिलियन (लगभग ₹13,700 करोड़) हो गए हैं। यह एक अच्छी सुधार है। लेकिन अगर हम दूसरे देशों से तुलना करें तो भारत अभी बहुत पीछे है-
अमेरिका:
$147 बिलियन (भारत से 80 गुना ज्यादा)
चीन:
$81 बिलियन (भारत से करीब 50 गुना ज्यादा)
भारत:
$1.65 बिलियन
इसका सीधा मतलब है भारत में पैसा तो आ रहा है और स्थिति सुधर रही है लेकिन अमेरिका और चीन जैसे देशों की बराबरी करने के लिए हमें अभी बहुत लंबा सफर तय करना है।
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भविष्य की राह और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इन नए नियमों से दो बड़े फायदे होंगे-
1. विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा:
बड़े निवेशकों का कहना है कि अब दुनिया भर के निवेशकों को यह यकीन हो जाएगा कि भारत की नीतियां लंबे समय के लिए बनी हैं और बार-बार बदलेंगी नहीं। इससे वे भारत में बेझिझक पैसा लगा पाएंगे।
2. भारत छोड़कर बाहर नहीं जाएंगी कंपनियां:
पहले कई स्टार्टअप ज्यादा सुविधाओं के लिए अपना हेडक्वार्टर (HQ) विदेश ले जाते थे। लेकिन अब भारत के शेयर बाजार भी नई तकनीक वाली कंपनियों को पसंद कर रहे हैं इसलिए कंपनियां भारत छोड़कर बाहर नहीं जाएंगी।