Smartphone Charger: सस्ता चार्जर कहीं पड़ न जाए महंगा, नकली चार्जर इस्तेमाल करने के 7 गंभीर नुकसान
Cheap or Non-Original Charger:
स्मार्टफोन खरीदते समय हम हजारों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन चार्जर लेते वक्त अक्सर सस्ता और गैर-मानक विकल्प चुन लेते हैं। यह छोटी सी बचत आगे चलकर फोन की बैटरी, परफॉर्मेंस और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। इस लेख में हम बताएंगे कि नकली या लोकल चार्जर कैसे फोन की चार्जिंग को धीमा कर देता है, बैटरी की उम्र घटाता है और ओवरहीटिंग जैसी गंभीर समस्याएं पैदा करता है।

विस्तार
आजकल के स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हम फोन खरीदने में तो हजारों रुपये खर्च कर देते हैं लेकिन जब बात चार्जर की आती है तो अक्सर हम चंद पैसे बचाने के चक्कर में बाजार से कोई भी सस्ता या 'नॉन-ओरिजिनल' चार्जर उठा लेते हैं। पहली नजर में यह एक छोटी बचत लग सकती है लेकिन एक गलत चार्जर आपके स्मार्टफोन की उम्र को आधा कर सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि एक गैर-मानक (नॉन-स्टैंडर्ड) चार्जर आपके फोन को कैसे नुकसान पहुंचाता है।
1. चार्जिंग की बेहद धीमी गति (स्लो चार्जिंग)

हर स्मार्टफोन कंपनी अपने फोन के लिए एक खास चार्जिंग स्टैंडर्ड (जैसे- USB-PD, क्विक चार्ज, या डैश) तय करती है। असली चार्जर इसी स्टैंडर्ड के हिसाब से बिजली सप्लाई करता है। जब आप लोकल चार्जर इस्तेमाल करते हैं तो वह फोन को उतनी पावर नहीं दे पाता जितनी उसे चाहिए जिससे फोन चार्ज होने में घंटों का समय लेने लगता है।
2. बैटरी हेल्थ और लाइफस्पैन में गिरावट

स्मार्टफोन की लिथियम-आयन बैटरी काफी संवेदनशील होती है। असली चार्जर बैटरी के 100% भरने पर पावर कट कर देते हैं और वोल्टेज को स्थिर रखते हैं। नकली चार्जर में अस्थिर पावर डिलीवरी होती है। बिजली का यह उतार-चढ़ाव बैटरी के सेल्स को डैमेज करता है, जिससे कुछ ही महीनों में बैटरी फूलने लगती है या उसका बैकअप कम हो जाता है।
3. ओवरहीटिंग: फोन और आपके लिए खतरा

घटिया क्वालिटी के चार्जर में 'हीट सिंक' और बेहतर सर्किट नहीं होते। चार्जिंग के दौरान जब बिजली का प्रवाह होता है तो ये चार्जर अत्यधिक गर्मी पैदा करते हैं। यह गर्मी न सिर्फ चार्जर को पिघला सकती है बल्कि आपके फोन के प्रोसेसर और मदरबोर्ड को भी स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।
4. सुरक्षा मानकों की अनदेखी (सेफ्टी रिस्क)

ब्रांडेड चार्जर कड़े सुरक्षा परीक्षणों से गुजरते हैं। उनमें शॉर्ट सर्किट प्रोटेक्शन और सर्ज प्रोटेक्शन जैसे फीचर्स होते हैं। सस्ते चार्जर अक्सर इन सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर देते हैं। इससे बिजली के झटके लगने या चार्जर में ब्लास्ट होने का खतरा बना रहता है।
5. फास्ट चार्जिंग का काम न करना

आजकल ज्यादातर फोन 33W, 65W या 120W जैसी फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करते हैं। नकली चार्जर पर भले ही 'फास्ट चार्जिंग' लिखा हो, लेकिन उसके अंदर के चिप आपके फोन के चार्जिंग प्रोटोकॉल को नहीं पहचान पाते। परिणाम यह होता है कि भारी-भरकम चार्जर होने के बावजूद आपका फोन कछुए की चाल से चार्ज होता है।
6. टचस्क्रीन और सॉफ्टवेयर की समस्या

क्या आपने कभी महसूस किया है कि फोन चार्जिंग पर लगा हो तो उसका टच अपने आप चलने लगता है या काम नहीं करता? इसे घोस्ट टच कहते हैं। यह खराब चार्जर से आने वाले 'इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस' के कारण होता है। लंबे समय तक ऐसा होने से फोन का सॉफ्टवेयर क्रैश हो सकता है या डिस्प्ले खराब हो सकती है।
7. केबल की गुणवत्ता भी है जरूरी

अक्सर लोग सिर्फ एडॉप्टर बदलते हैं और केबल वही पुरानी या सस्ती इस्तेमाल करते हैं। एक घटिया केबल न तो पूरा डेटा ट्रांसफर कर पाती है और न ही सही वोल्टेज। इससे चार्जिंग पिन (चार्जिंग पोर्ट) के ढीला होने या जलने की संभावना बढ़ जाती है।
सही चुनाव कैसे करें?

अगर आपका असली चार्जर खराब हो गया है, तो इन बातों का ध्यान रखें-
MFi (मेड फॉर आईफोन) या BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) सर्टिफाइड:
हमेशा उन ब्रांड्स को चुनें जिनके पास सुरक्षा प्रमाणपत्र (जैसे भारत में बीआईएस मार्क) हों।
भरोसेमंद ब्रांड:
अगर आप कंपनी का ओरिजिनल चार्जर नहीं ले रहे हैं तो नामी ब्रांड्स के यूनिवर्सल चार्जर ही लें।
रेटिंग चेक करें:
चार्जर के आउटपुट (V/A) को अपने फोन की जरूरत के साथ मैच करें।