Google: भारतीय कृषि सेक्टर में गूगल साध रहा बड़ा निशाना, भाषा की बाधा को दूर करते हुए AI पहल का होगा विस्तार
दुनिया की बड़ी टेक कंपनी गूगल भारत में कृषि सेक्टर भाषा की बाधा को दूर करने का काम करेगी। साथ ही अपनी एआई पहल का विस्तार करेगी। आगे खबर में जानिए क्या है गूगल का बड़ा और शानदार प्लान।

विस्तार
दिग्गज टेक कंपनी गूगल का बिजनेस भारत में काफी बड़े स्तर पर है। गूगल कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गूगल भारत में भाषाओं की बाधाओं को तोड़ते हुए एआई एडवांस टूल को पेश करने की तैयारी में है। इन टूल्स के जरिए देश में कृषि से जुड़े कामों को लक्षित पर रखा गया है और इनकी क्षमता में इजाफा होगा। गूगल डीपमाइंड के प्रोडक्ट मैनेजमेंट के निर्देशक अभिषेक बापना ने भाषा की बाधाओं को घटाने की महता को उजागर करते हुए बताया कि यह भारत की आर्थिक विकास में कितनी महत्वपूर्ण है।
बापना ने आईआईएम कलकत्ता में कहा, 'आर्थिक विकास में भाषा काफी अहम है। भाषा की बाधा को किसी बीमारी की तरह मेडिकल मुद्दा समझकर नहीं छुपाया जा सकता है, इसमें बैंकिंग सेवाएं भी शामिल हैं।' टेक दिग्गज ने गूगल जेनिनी को लॉन्च किया है। इसे पहले बार्ड कहते थे, यह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई चैटबॉट चालीस से अधिक वैश्विक भाषाओं के साथ आता है, जिसमें नौ भारतीय भाषाएं भी शामिल हैं। बापना ने साथ ही कहा है कि गूगल का मौजूदा फोकस भाषा की गुणवत्ता और उसके दायरे को बढ़ाने पर बना हुआ है। आने वाले समय में कई और भारतीय भाषाओं को जोड़ा जाएगा।
मौजूदा वक्त में चैटबॉट नौ भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसमें हिंदी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तमिल, तेलगू और उर्दू शामिल है। बापना ने भारतीय भाषाओं के वातावरण को नोट करते हुए बताया कि लोग कई सारी भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं। बापना ने कहा कि मौजूदा दौर में एआई मॉडल्स के लिए अलग चुनौती है, शब्द को समझकर उसका सही उत्तर देना, इसके लिए डिक्शनरी और अन्य विकल्पों की मदद ली जाएगी। गूगल के वानी प्रोजेक्ट को बढ़ाने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस यानी आईआईएससी के साथ भारत में डेवलेपर्स ने साझेदारी की है।