'कीवर्ड' के खेल में फंसा Google: सर्च किया कुछ, दिखा कुछ और; दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Fri, 29 May 2026 12:54 PM IST
सार

Hindware vs Google:

दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल को ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने माना कि गूगल ने प्रतिस्पर्धी कंपनियों को “हिंदवेयर” नाम का इस्तेमाल विज्ञापन कीवर्ड के रूप में करने दिया। इस फैसले के बाद भारत के ऑनलाइन विज्ञापन बाजार में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।

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Delhi High Court Rules Against Google in Hindware Trademark Case
गूगल पर ट्रेडमार्क उल्लंघन का मामला - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    दिल्ली हाई कोर्ट के एक बड़े फैसले ने भारत के ऑनलाइन विज्ञापन बाजार में हलचल बढ़ा दी है। अदालत ने माना है कि गूगल ने ट्रेडमार्क अधिकारों का उल्लंघन किया, क्योंकि उसने प्रतिस्पर्धी कंपनियों को 'हिंदवेयर' (Hindware) नाम को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।

    यह मामला भारत की बाथरूम फिटिंग्स कंपनी 'हिंदवेयर' से जुड़ा था। कोर्ट ने 22 मई को दिए अपने फैसले में गूगल को करीब 31,600 डॉलर यानी लगभग 30 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया था।

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    आखिर मामला क्या था?

    रिपोर्ट के अनुसार गूगल ने अपने AdWords सिस्टम के जरिए दूसरी कंपनियों को 'हिंदवेयर' शब्द को कीवर्ड के रूप में खरीदने की अनुमति दी थी। इसका मतलब यह था कि अगर कोई यूजर गूगल पर 'हिंदवेयर' सर्च करता, तो प्रतिस्पर्धी कंपनियों के विज्ञापन भी सामने आ सकते थे।

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    दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि गूगल की AdWords पॉलिसी जिस तरह काम करती है, उससे साफ होता है कि कंपनी ट्रेडमार्क का इस्तेमाल “बेच” या “नीलाम” कर रही थी, जबकि इसके लिए ट्रेडमार्क मालिक की अनुमति नहीं ली गई थी।

    कोर्ट ने क्या कहा?

    अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क का इस तरह व्यावसायिक इस्तेमाल बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने माना कि गूगल केवल एक प्लेटफॉर्म की भूमिका में नहीं था, बल्कि वह कीवर्ड आधारित विज्ञापन से कमाई भी कर रहा था।यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि गूगल का विज्ञापन मॉडल बड़े पैमाने पर की-वर्ड एडवर्टाइजिंग पर आधारित है।

    भारतीय कंपनियों ने फैसले का किया स्वागत

    फैसले के बाद कई भारतीय बिजनेस लीडर्स और ब्रांड मैनेजर्स ने सोशल मीडिया पर इसका समर्थन किया। उनका कहना है कि इससे कंपनियों को अपने ब्रांड की सुरक्षा के लिए कानूनी रास्ता मिलेगा।

    ऑनलाइन ब्रोकरेज कंपनी जेरोधा (Zerodha) के संस्थापक नितिन कामथ ने कहा कि उनकी कंपनी भी लंबे समय से इसी तरह की समस्या का सामना कर रही थी। उनके अनुसार अब यह फैसला कंपनियों के लिए कानूनी कार्रवाई का रास्ता खोलता है।

    वहीं शादी डॉट कॉम (Shaadi.com) के संस्थापक अनुपम मित्तल ने कहा कि मौजूदा सिस्टम में कोई कंपनी अपना ब्रांड बनाती है, दूसरी कंपनी उस नाम पर बोली लगाती है और गूगल उससे कमाई करता है। उनके मुताबिक यह फैसला लाखों व्यवसायों के लिए ऑनलाइन विज्ञापन की पूरी अर्थव्यवस्था बदल सकता है।

    गूगल की तरफ से नहीं आया जवाब

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक गूगल ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। भारत गूगल के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक माना जाता है। ऐसे में इस फैसले का असर कंपनी की विज्ञापन रणनीति पर भी पड़ सकता है।

    ऑनलाइन विज्ञापन बाजार पर क्या होगा असर?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह फैसला भविष्य में भी कानूनी मिसाल बनता है, तो डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।अब कंपनियां अपने ब्रांड नाम के गलत इस्तेमाल के खिलाफ ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकती हैं।साथ ही गूगल और दूसरी डिजिटल विज्ञापन कंपनियों को भी अपनी की-वर्ड एडवर्टाइजिंग पॉलिसी में बदलाव करना पड़ सकता है।

    यह फैसला खासतौर पर उन कंपनियों के लिए अहम माना जा रहा है, जो अपने ब्रांड नाम और ऑनलाइन पहचान की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती हैं।

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