Bombay High Court: चींटी को मारने के लिए हथौड़ा नहीं ला सकते, केंद्र के एफसीयू की तथ्य-जांच कौन करेगा

विशाल मैथिल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीविशाल मैथिल
Fri, 14 Jul 2023 08:16 PM IST
सार

अदालत ने संशोधित नियमों के तहत प्रस्तावित फैक्ट चेक यूनिट (एफसीयू) के बारे में भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि केंद्र के एफसीयू की तथ्य-जांच कौन करेगा।

विज्ञापन
Can not bring hammer to kill ant on Centre IT Rules against fake news says Bombay High Court
Bombay High Court - फोटो : Amar Ujala

    विस्तार

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने फर्जी खबरों के खिलाफ आए केंद्र सरकार के नए आईटी नियमों में किए गए संशोधन को सख्त बताया है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि चींटी को मारने के लिए हथौड़ा नहीं ला सकते। जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि नियमों में बदलाव भारी पड़ सकते हैं। एक दिन पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि नया आईटी नियम सरकारी फरमान है, यह बचाव का अवसर नहीं देता।

    केंद्र के एफसीयू की तथ्य-जांच कौन करेगा- कोर्ट

    अदालत ने कहा कि वह संशोधित नियमों को पेश करने और कंटेंट की मिथ्याता निर्धारित करने की पूर्ण शक्ति देने की सरकार की आवश्यकता और चिंता को नहीं समझ पाई है। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों को सरकार पर संदेह करने, सवाल करने और जवाब मांगने का मौलिक अधिकार है।

    विज्ञापन

    कोर्ट ने कहा कि सरकार भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदार है और उसे सवालों से छूट नहीं है। अदालत ने संशोधित नियमों के तहत प्रस्तावित फैक्ट चेक यूनिट (एफसीयू) के बारे में भी चिंता जताई, कोर्ट ने कहा कि केंद्र के एफसीयू की तथ्य-जांच कौन करेगा। उसे यह भी अजीब लगता है कि सरकार ने एक अथॉरिटी फैक्ट चेकिंग यूनिट को यह तय करने की पूरी शक्ति दे दी है कि क्या नकली, झूठा और क्या भ्रामक है।

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    याचिकाकर्ताओं ने नियमों को बताया मनमाना

    केंद्र सरकार ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ वायरल होने वाले फर्जी कंटेंट पर लगाम लगाने के आईटी नियमों में बदलाव किए हैं। स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन्स ने नियमों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और उन्हें मनमाना, असंवैधानिक बताया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसका नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर भयानक प्रभाव पड़ेगा।

    और पढ़ें...
    Login or Signup
    अपना शहर चुनें