चंद पैसों में डाटा खरीदकर आपकी जिंदगी में नहीं हो सकेगी घुसपैठ, निजी डाटा सुरक्षा बिल को मंजूरी

Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्लीHarendra Chaudhary
Wed, 04 Dec 2019 05:47 PM IST
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Cabinet approved personal data protection bill on wednesday
Cabinet Meeting - फोटो : PIB

    केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को निजी डाटा सुरक्षा बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। पिछले कुछ सालों में हमारे देश में बाजार से चंद पैसे में डाटा खरीदकर किसी की निजी जिंदगी या कारोबार में घुसपैठ करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में यह बात भी सामने आई थी कि निजी डाटा का इस्तेमाल विदेशी कंपनियां भी करने लगी हैं। उन्हें 15-20 पैसे में सारा डेटा मिल जाता है। इससे ये कंपनियां अपने बिजनेस को मनचाहा मोड़ दे सकती हैं।

    सूचना यह भी है कि कई विदेशी कंपनियां खुद इस धंधे में आने लगी हैं, जो सस्ते रेट पर जानकारी थोक में खरीद लेती हैं और बाद में उसे दूसरी कंपनियों को मुनाफे में बेच देती हैं।सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और साइबर मामलों के विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं कि सरकार का निजी डाटा सुरक्षा बिल लाना सराहनीय कदम है। इससे काफी हद तक निजी डाटा को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी। बिल के मुताबिक किसी कंपनी की ओर से डाटा लीक होता है तो उसे भारी जुर्माना भरना होगा।

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    साइबर मामलों के विशेषज्ञ पवन दुग्गल बताते हैं कि हमारे देश में निजी डाटा चोरी करने पर रोक लगाने के लिए अभी तक कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इसी वजह से यह धंधा एक बड़े उद्योग का रुप लेता जा रहा है। दरअसल, ये लोगों का शोषण है और निजता का उल्लंघन है। किसी की मर्जी के खिलाफ उसकी जानकारी दूसरे व्यक्ति को दी जा रही है। बड़ी कंपनियां अपने कारोबार का प्रयोग करने के लिए इस डाटा का इस्तेमाल करती हैं।

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    किसी भी नई अर्थव्यवस्था के लिए यह डाटा आत्मा का काम करता है। डाटा प्रोटेक्शन के लिए गठित जस्टिस श्रीकृष्णा कमेटी ने एक बिल लाने का प्रस्ताव दिया था। उस वक्त सरकार ने सुझाव भी मांगे, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हो सका।

    वह कहते हैं कि मौजूदा सेक्शन 87 में सूचना प्रौद्योगिकी का जिक्र तो है, मगर उसमें भी डाटा प्राइवेसी को लेकर कुछ नहीं कहा गया है। इसी के चलते लोगों की निजी जानकारी खुले आम बिक रही है। प्राइवेसी का हनन किया जा रहा है। लोगों की निजी जानकारी को किसी भी तरह से मार्केटिंग का रूप नहीं दिया जा सकता। दुग्गल ने कहा कि अगर भारत को आईटी क्षेत्र में सुपरपावर बनना है, तो डाटा प्रोटेक्शन कानून लाना ही होगा। चूंकि अब सरकार ने इस बिल को मंजूरी दे दी है, तो यह उम्मीद भी कर सकते हैं कि देर-सवेर निजी डाटा सुरक्षा कानून अस्तित्व में आ जाएगा

    लोगों की निजी जानकारियां 15 पैसे से लेकर 50 पैसे प्रति व्यक्ति थोक के भाव बिकती हैं। यह कारोबार दस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का है। वहीं अब इसमें विदेशी कंपनियां भी कूद गई हैं। कुछ कंपनियां ऐसी हैं, जो उक्त रेट में लोगों की निजी जानकारी से संबंधित डेटा थोक में खरीद लेती हैं और उसके बाद वे दूसरी कंपनियों को अपने दामों पर बेचती हैं।

    वहीं कोई कानून न बने होने से पुलिस ऐसे मामलों में चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही है। लोगों के पास कॉल सेंटर से अमूमन रोजाना ही कोई न कोई फोन आ जाता है। कोई इंश्योरेंस लेने की बात कहता है तो कोई प्लॉट, फ्लैट, क्रेडिट कार्ड, या पर्सनल लोन का ऑफर करता है।

    दर्जनों ऐसे प्रोडेक्ट हैं, जिनकी मार्केटिंग के लिए आपको परेशान किया जाता है। आप सोचते होंगे कि ये इतने सारे फोन कैसे आ रहे हैं, हमने तो किसी को नंबर नहीं दिया था। इस सवाल से ही दिमाग झनझना उठता है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के एक अधिकारी के मुताबिक लोगों की निजी जानकारियां धड़ल्ले से लीक हो रही हैं, यह बात सरकार जानती है। ये काम करने वाले कोई दो चार कॉल सेंटर नहीं हैं, बल्कि हजारों छोटे-बड़े सेंटर खुल गए हैं।

    कई कॉल सेंटर तो ऐसे हैं, जो सीधे ही सरकारी विभाग, जैसे बैंक, इंश्योरेंस सेक्टर, दूरसंचार, रेलवे और डाक तार आदि का डेटा उठा लेते हैं। चूंकि अब सब रिकॉर्ड डिजिटल है, तो इसमें कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आती। संबंधित विभाग में सेटिंग होने के बाद सारा डाटा चंद मिनटों में इधर से उधर हो जाता है। मौजूदा समय की बात करें तो निजी जानकारी बेचने का कारोबार 10 हजार करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच चुका है।

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