Anti Trust Case: क्रोम-एंड्रॉयड जैसी सेवाओं को गूगल से अलग करने के मामले में आया एपल का पक्ष, जानें क्या कहा

कीर्तिवर्धन मिश्र
टेक डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटनकीर्तिवर्धन मिश्र
Wed, 25 Dec 2024 10:28 AM IST
सार

एपल ने गूगल से उसके सर्च इंजन के इस्तेमाल को लेकर अहम समझौता किया है। इसके तहत एपल के आईफोन, आईपैड और मैकबुक जैसे उत्पादों में मौजूद सफारी ब्राउजर में डिफॉल्ट सर्च इंजन बने रहने के लिए गूगल हर साल एपल को अरबों डॉलर देती है।

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Apple steps in Google Anti Trust trial may see Chrome Browser Search Engine and Android Operating System Loss
गूगल पर की ये गलती, तो हो सकती है जेल - फोटो : istock

    विस्तार

    अमेरिका में गूगल को तोड़ने के लिए सुनवाई जारी है। इस एंटी ट्रस्ट केस में इंटरनेट सर्च क्षेत्र में गूगल का एकाधिकार खत्म करने के लिए कंपनी के अहम क्रोम सर्च इंजन/वेब ब्राउजर और एंड्रॉयड सेवाओं को अलग करने का प्रस्ताव है। अब इस मामले में एक और बड़ी टेक कंपनी एपल ने भी अपना पक्ष रखा है। बताया गया है कि एपल ने गूगल के खिलाफ इस एंटी ट्रस्ट सुनवाई में साफ किया है कि वह सर्च इंजन के मामले में सिर्फ गूगल पर निर्भर नहीं रह सकता।

    गौरतलब है कि एपल ने गूगल से उसके सर्च इंजन के इस्तेमाल को लेकर अहम समझौता किया है। इसके तहत एपल के आईफोन, आईपैड और मैकबुक जैसे उत्पादों में मौजूद सफारी ब्राउजर में डिफॉल्ट सर्च इंजन बने रहने के लिए गूगल हर साल एपल को अरबों डॉलर देती है। अकेले 2022 में ही एपल को गूगल से इस समझौते के तहत 20 अरब डॉलर मिल चुके हैं।

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    हालांकि, माना जा रहा है कि अब एपल ने गूगल को तोड़ने के प्रस्ताव के साथ जारी एंटी ट्रस्ट मामले में इस राजस्व को जाने देने का फैसला किया है। कंपनी के वकीलों ने कोर्ट में कहा है कि एपल और गूगल कहीं से भी प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं और एपल सर्च इंजन के क्षेत्र में उसे प्रतिद्वंद्विता नहीं रखना चाहता। एपल का कहना है कि वह अपनी यह स्थिति बरकरार रखेगा, फिर चाहे उसे गूगल से आने वाले समय में अरबों डॉलर का राजस्व मिले या नहीं।

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    इतना ही नहीं एपल ने अपनी याचिका में कहा है कि वह अप्रैल 2025 में शुरू होने वाली सुनवाई में गवाहों को भी बुलाना चाहता है। माना जा रहा है कि गूगल के खिलाफ सुनवाई शुरू होने के साथ ही अभियोजक इंटरनेट क्षेत्र में गूगल के एकाधिकार का मुद्दा उठाकर इसके क्रोम ब्राउजर और एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम को कंपनी से अलग करने की मांग करेंगे। अभियोजकों का मानना है कि इसके बाद ही ऑनलाइन सर्च के क्षेत्र में कॉम्पटीशन को फिर शुरू किया जा सकेगा। हालांकि, इससे गूगल को भारी नुकसान हो सकता है।

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