Google Play Store: अब बैटरी ज्यादा खर्च करने वाले एप्स पर चेतावनी देगा गूगल, डाउनलोड से पहले दिखेंगे ये अलर्ट
Google Play Store battery warning feature: क्या आपके फोन की बैटरी अचानक खत्म हो जाती है? गूगल ने इसका पक्का इलाज ढूंढ लिया है। अब प्ले स्टोर उन एप्स को बेनकाब करेगा जो बैकग्राउंड में चुपके से बैटरी ड्रेन करते हैं। एम मार्च से शुरू हुई इस नई व्यवस्था के तहत, ज्यादा बैटरी खाने वाले ऐप्स पर वॉर्निंग लेब' लगाया जाएगा और उन्हें रिकमेंडेशन से भी बाहर कर दिया जाएगा। जानिए इसके बारे में विस्तार से...

विस्तार
टेक कंपनी गूगल ने एंड्रॉइड यूजर्स की सुविधा के लिए एक नया कदम उठाया है। अब गूगल प्ले स्टोर पर ऐसे एप्स को चेतावनी के साथ दिखाया जाएगा जो स्मार्टफोन की बैटरी जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब यह है कि अगर कोई एप बैकग्राउंड में अत्यधिक एक्टिव रहता है और बैटरी तेजी से खत्म करता है, तो यूजर को उसे डाउनलोड करने से पहले ही इसकी जानकारी मिल जाएगी।
रिकमेंडेशन से भी हटाए जा सकते हैं ऐसे एप्स
इतना ही नहीं गूगल ने साफ किया है कि जिन एप्स की बैटरी खपत असामान्य रूप से ज्यादा होगी, उन्हें प्ले स्टोर की रिकमेंडेशन और डिस्कवरी लिस्ट में भी जगह नहीं दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य डेवलपर्स को बेहतर और अधिक ऊर्जा-कुशल एप बनाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि यूजर्स को बेहतर अनुभव मिल सके।
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प्ले स्टोर पर दिखाई देगा चेतावनी संदेश
कंपनी के अनुसार, जिन एप्स का बैटरी उपयोग अधिक पाया जाएगा, उनके पेज पर एक चेतावनी संदेश दिखाई देगा। जैसे मान लीजिए मैसेज आएगा कि ये एप बैकग्राउंड गतिविधि के कारण अपेक्षा से ज्यादा बैटरी का इस्तेमाल कर सकता है। इससे यूजर्स एप डाउनलोड करने से पहले ही सतर्क हो सकेंगे।
क्या है पार्शियल वेक लॉक और क्यों बढ़ती है बैटरी खपत
एंड्रॉइड सिस्टम में पार्शियल वेक लॉक नाम का एक फीचर होता है। यह एप्स को फोन की स्क्रीन बंद होने के बाद भी सीपीयू चालू रखने की अनुमति देता है। अगर कोई एप इस फीचर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करता है, तो फोन लगातार बैकग्राउंड में काम करता रहता है और बैटरी तेजी से खत्म होने लगती है।
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कैसे तय होगा कि एप ज्यादा बैटरी खर्च कर रहा है?
गूगल के मुताबिक, अगर कोई एप पिछले 28 दिनों में 5% से ज्यादा यूजर सेशन में स्क्रीन बंद होने के बाद भी औसतन 2 घंटे या उससे ज्यादा समय तक पार्शियल वेक लॉक एक्टिव रखता है, तो उसे खराब व्यवहार (Bad Behavior) की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे एप्स की निगरानी एंड्रॉइड वाइटल्स सिस्टम के जरिए की जाएगी और फिर उन्हें प्ले स्टोर पर चेतावनी के साथ दिखाया जाएगा।
यूजर्स और डेवलपर्स दोनों को होगा फायदा
- फोन की बैटरी लाइफ बेहतर बनी रहेगी।
- खराब ऑप्टिमाइजेशन वाले ऐप्स की पहचान होगी।
- डेवलपर्स को एप को बेहतर तरीके से ऑप्टिमाइज करना पड़ेगा।