साइबर फ्रॉड पर सख्ती: सभी बैंकों में MuleHunter AI लागू करने की तैयारी, जानिए कैसे करता है ये टूल

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 11 Feb 2026 06:50 PM IST
सार

देश में तेजी से बढ़ते साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा ले रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने सभी बैंकों से MuleHunter AI अपनाने की अपील की है, ताकि फर्जी खातों के जरिए होने वाली ठगी पर लगाम लगाई जा सके।

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साइबर फ्रॉड रोकने के लिए सरकार की नई पहल - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। आम लोगों के करोड़ों रुपये फर्जी खातों के जरिए ठगे जा रहे हैं, जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई है। इसी खतरे से निपटने के लिए केंद्र सरकार अब बैंकों में एक खास एआई टूल लागू करने पर जोर दे रही है।

    गृह मंत्री अमित शाह ने सभी बैंकों से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा विकसित MuleHunter.ai को अपने सिस्टम में पूरी तरह अपनाने की अपील की है। सरकार का मानना है कि इस तकनीक के जरिए बैंकिंग सिस्टम में मौजूद म्यूल अकाउंट्स के बड़े नेटवर्क को तोड़ा जा सकता है। इस टूल को दिसंबर 2024 में लॉन्च किया गया था।

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    क्या होते हैं म्यूल अकाउंट्स?

    बोलचाल की भाषा में म्यूल का मतलब 'खच्चर' होता है, जिसका इस्तेमाल सामान ढोने के लिए किया जाता है। कुछ इसी तरह का काम म्यूल अकाउंट्स का भी होता है। म्यूल अकाउंट्स दरअसल ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्राड में किया जाता है। ये अकाउंट्स या तो फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड होते हैं या इन्हें कोई और यूज कर रहा होता है। इस तरह के अकाउंट्स का इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्रॉड में पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। चूकिं म्यूल अकाउंट में दी गई जानकारी सही नहीं होती, इन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

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    MuleHunter AI?

    MuleHunter AI एक एडवांस एआई-आधारित सॉफ्टवेयर है, जिसे दिसंबर 2024 में आरबीआई की सहायक संस्था रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) ने लॉन्च किया था। इसका मकसद बैंकों में मौजूद संदिग्ध ‘म्यूल अकाउंट्स’ की पहचान करना है, जिसका इस्तेमाल साइबर क्रिमिनल्स ठगी के पैसों को इधर से उधर करने के लिए करते हैं।

    आरबीआई गवर्नर ने पहले दावा किया था कि इस सॉफ्टवेयर की मदद से हर महीने करीब 20,000 फर्जी या संदिग्ध खातों की पहचान की जा रही है। अब अमित शाह चाहते हैं कि सभी बैंक इस तकनीक को अपनाएं, ताकि यह संख्या और बढ़े और ठगी के मामलों में तेजी से कमी लाई जा सके।

    शुरुआती चरण में इस सिस्टम को 20 बैंकों में लागू करने की योजना थी। लेकिन अब सरकार इसके व्यापक इस्तेमाल पर जोर दे रही है, ताकि देशभर में साइबर अपराध पर सख्त नियंत्रण पाया जा सके।

    कैसे काम करता है यह सिस्टम?

    MuleHunter AI को बड़े डाटा सेट्स पर प्रशिक्षित किया गया है। यह बैंक खातों की गतिविधियों और लेन-देन के पैटर्न का विश्लेषण करता है। सॉफ्टवेयर को इस तरह तैयार किया गया है कि वह असली और संदिग्ध खातों के व्यवहार में फर्क कर सके।

    यह तकनीक उन खास संकेतों और पैटर्न को पहचानती है, जो आमतौर पर ‘म्यूल अकाउंट्स’ में देखे जाते हैं। जैसे ही कोई संदिग्ध गतिविधि सामने आती है, सिस्टम तुरंत उसे फ्लैग कर देता है, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सके।

    सुरक्षा और गोपनीयता पर खास ध्यान

    चूंकि यह सॉफ्टवेयर आरबीआई के भीतर ही विकसित किया गया है, इसलिए इसमें डेटा सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े मजबूत फीचर्स जोड़े गए हैं। इससे बाहरी हमलों या गलत इस्तेमाल की संभावना कम हो जाती है।

    सरकार को उम्मीद है कि अगर सभी बैंक इस एआई टूल को अपनाते हैं, तो साइबर ठगी के मामलों में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है और आम लोगों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रखी जा सकेगी।

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