पूर्वोत्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों में दिसंबर 2023 तक मिलेगी कनेक्टिविटी, 4G नेटवर्क पर केंद्रीय मंत्री रिजिजू

विशाल मैथिल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीविशाल मैथिल
Tue, 08 Nov 2022 04:00 PM IST
सार

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने पूर्वोत्तर के सभी गांवों में 4G मोबाइल सेवा प्रदान करने के लिए 4G सेचुरेशन प्रोजेक्ट की समीक्षा करते समय कहा कि देश में दूरसंचार क्रांति हो रही है, कोई भी दूरस्थ क्षेत्र कनेक्टिविटी से वंचित नहीं रहना चाहिए।

All Northeast villages will be connected with 4G network by Dec 2023 said Union minister Kiren Rijiju
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू - फोटो : सोशल मीडिया

    विस्तार

    केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने मंगलवार को कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र और सीमावर्ती क्षेत्रों में बसे हुए सभी गांवों को दिसंबर 2023 तक 4G नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में दूरसंचार क्रांति हो रही है, कोई भी दूरस्थ क्षेत्र कनेक्टिविटी से वंचित नहीं रहना चाहिए और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आदर्श वाक्य भी है।

    केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने पूर्वोत्तर के सभी गांवों में 4G मोबाइल सेवा प्रदान करने के लिए 4G सेचुरेशन प्रोजेक्ट की समीक्षा करते समय यह बात कही। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 तक, पूर्वोत्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों के सभी बसे हुए गांवों को 4G नेटवर्क से कनेक्टेड हो जाएंगे।

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    उन्होंने कहा कि बैठक का उद्देश्य विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना, उन सभी को साथ लाना और यदि कोई कमी है तो उसे दूर करना है। इस समीक्षा बैठक में सचिव, दूरसंचार और सशस्त्र बलों सहित अन्य अधिकारियों ने भी भाग लिया। उन्होंने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री की इच्छा के अनुसार परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए उचित समन्वय स्थापित किया गया है।

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    दरअसल, उत्तर-पूर्व के सभी बसे हुए गांवों में 4G मोबाइल सर्विस प्रदान करने के लिए 4G सेचुरेशन प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि फरवरी 2022 में सरकार ने संसद को सूचित किया था कि देश के 5,97,618 गांवों में से 25,067 गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट की कमी है। वहीं 25,067 गांवों में से लगभग 11,000 गांवों को यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF) योजनाओं में शामिल किया गया है। देश के शेष गांवों को चरणबद्ध तरीके से सरकार और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) द्वारा कवर किया जाएगा।

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    बता दें कि USOF योजना 2002 में शुरू की गई थी, ताकि दूर-दराज के गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान की जा सके और इन क्षेत्रों में लोगों के लिए ICT सेवाओं तक पहुंच को सस्ता बनाया जा सके। USOFमें शामिल करीब 43 फीसदी यानी 11,000 गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है। इसके अलावा, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में स्थापित सभी सरकारी वाईफाई हॉटस्पॉट में से केवल 51 प्रतिशत ही सेवा प्रदान कर पाते हैं।

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