Flight Safety: क्या किसी विमान के कॉकपिट को हैक करना संभव है, क्या रिमोटली विमान को क्रैश कराया जा सकता है?

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Fri, 13 Jun 2025 10:55 AM IST
सार

आज की एयरलाइंस और विमान निर्माता कंपनियां अपने सिस्टम में मल्टी-लेयर साइबर सिक्योरिटी तकनीकों का प्रयोग करती हैं। एन्क्रिप्शन (Encryption) के साथ डेटा और कम्युनिकेशन पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। फायरवॉल और इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (IDS) से किसी भी अनधिकृत एक्सेस का तुरंत पता चलता है।

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Air India Plane Crash Is it possible to hack the cockpit of an aircraft can the aircraft be crashed remotely
Is it possible to hack the cockpit of an aircraft - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे के बाद पूरी दुनिया हैरान है। हैरानी इसलिए हो रही है, क्योंकि आज तक इस तरीके से कोई यात्री विमान क्रैश नहीं हुआ है। इसके अलावा बोइंग का यह पहला ड्रीमलाइनर विमान है जो क्रैश हुआ है। हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे की जगह पर पहुंचे हैं और स्थिति का मुआयना कर रहे हैं। इस भीषण हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी समेत कुल 266 लोगों की मौत हुई है। इनमें 241 लोग विमान में सफर कर रहे थे। इस हादसे को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई कहानी वायरल हो रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि इस हादसे में पाकिस्तान का हाथ है। पाकिस्तान के हैकर्स ने विमान के कॉकपिट को हैक किया और फिर विमान को क्रैश करा दिया। आइए समझते हैं कि क्या किसी हैकर द्वारा किसी यात्री विमान के कॉकपिट को हैक कर उसे क्रैश कराया जा सकता है?

    आधुनिक यात्री विमान जैसे कि Boeing 737, Boeing 777, Airbus A320 आदि अत्याधुनिक कंप्यूटर सिस्टम से संचालित होते हैं जिन्हें सामूहिक रूप से Avionics कहा जाता है। ये सिस्टम विमान की उड़ान, नेविगेशन, इंजन कंट्रोल, और ऑटो-पायलट जैसे कार्यों को नियंत्रित करते हैं। इन Avionics सिस्टम को डिजाइन करते समय सुरक्षा और विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। अधिकांश सिस्टम फिजिकल रूप से पृथक (Isolated Networks) होते हैं, यानी वे इंटरनेट या पब्लिक नेटवर्क से सीधे नहीं जुड़े होते।

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    आज की एयरलाइंस और विमान निर्माता कंपनियां अपने सिस्टम में मल्टी-लेयर साइबर सिक्योरिटी तकनीकों का प्रयोग करती हैं। एन्क्रिप्शन (Encryption) के साथ डेटा और कम्युनिकेशन पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। फायरवॉल और इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (IDS) से किसी भी अनधिकृत एक्सेस का तुरंत पता चलता है। सिस्टम आइसोलेशन के जरिए इंफ्लाइट वाई-फाई या एंटरटेनमेंट सिस्टम को कॉकपिट कंट्रोल सिस्टम से पूरी तरह अलग रखा जाता है।

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