रूस के साइबर हमले से मिली सीख: अब एआई बचाएगा सैटेलाइट नेटवर्क, सामने आया नया सुरक्षा टूल
2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के साथ हजारों सैटेलाइट मॉडेम ठप कर दिए गए थे। अब उसी तरह के साइबर हमलों से महत्वपूर्ण नेटवर्क को बचाने के लिए नई AI तकनीक सामने आई है, जो सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को पहले से पहचानने में मदद करेगी।

विस्तार
रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला शुरू करने के दिन ही एक बड़े साइबर हमले को अंजाम दिया था। इस हमले में यूक्रेन के साथ-साथ यूरोप के कई हिस्सों में इस्तेमाल हो रहे हजारों सैटेलाइट मॉडेम को निष्क्रिय कर दिया गया था। इसका मकसद संचार व्यवस्था को बाधित करना था। इस घटना ने महत्वपूर्ण संचार प्रणालियों की साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।
अब इसी तरह के खतरों से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा कंपनी अटलांटा ने आर्गो नाम का नया टूल पेश किया है। इसमें ऐसी तकनीक शामिल है, जिसने रूसी हमले के बाद वायासैट के सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क को सुरक्षित करने में अहम भूमिका निभाई थी।
AI और गणित मिलकर खोजेंगे सॉफ्टवेयर की कमजोरियां
- अटलांटा के मुताबिक, आर्गो की तकनीक 'सॉफ्टवेयर अंडरस्टैंडिंग' पर आधारित है। इसमें जटिल गणितीय तरीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है। कंपनी का दावा है कि यह व्यावसायिक रूप से उपलब्ध ऐसा पहला सिस्टम है, जो सॉफ्टवेयर और इंटरनेट से जुड़े सिस्टम की कमजोरियों का व्यापक स्तर पर विश्लेषण कर सकता है।
- अटलांटा की सीईओ और सह-संस्थापक अंजना राजन ने कहा कि आज के जटिल सिस्टम के लिए पुराने साइबर सुरक्षा उपकरण पर्याप्त नहीं हैं। उनके अनुसार, भविष्य में महत्वपूर्ण अमेरिकी सिस्टम तैयार करने वालों के लिए सॉफ्टवेयर अंडरस्टैंडिंग अहम रास्ता बनने वाली है।
वायासैट को भविष्य के हमलों से बचाने में मदद
- वायासैट के साइबर रणनीति प्रमुख निक सॉन्डर्स के मुताबिक, अटलांटा के साथ मिलकर विकसित की गई तकनीक सिर्फ नेटवर्क को भविष्य के हमलों के खिलाफ मजबूत बनाने में मदद नहीं करती, बल्कि इसके पीछे इस्तेमाल होने वाले गणितीय प्रमाण भी तैयार करती है।
- उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में दोनों कंपनियों ने ऐसी क्षमता विकसित की है, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि वायासैट के सिस्टम साइबर हमलों के सामने कितने मजबूत और लचीले हैं।
ईरान से जुड़े साइबर खतरे भी बढ़ा रहे चिंता
- यूक्रेन और ईरान से जुड़े हालिया संघर्षों ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर साइबर हमलों के खतरे को और उजागर किया है। इस गर्मी में कई अमेरिकी सरकारी एजेंसियों ने चेतावनी दी थी कि ईरानी हैकर पानी और सीवेज व्यवस्था समेत अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं।
- ऐसे में सैटेलाइट नेटवर्क, ऊर्जा प्रणालियों और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे की सुरक्षा के लिए पहले से सॉफ्टवेयर की कमजोरियां पहचानना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परमाणु रिएक्टर प्रोजेक्ट में भी इस्तेमाल
- अटलांटा की तकनीक का इस्तेमाल जेनेसिस मिशन में भी किया जा रहा है। यह अमेरिकी ऊर्जा विभाग की ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य स्वायत्त परमाणु रिएक्टर विकसित करना है।
- अमेरिकी सरकार की इडाहो नेशनल लेबोरेटरी के मुख्य साइबर सुरक्षा वैज्ञानिक ग्रेग शैनन का मानना है कि इस तरह की तकनीक भविष्य में नई क्षमताओं की जांच के लिए मानक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकती है। उनका अनुमान है कि अगले एक या दो दशक में यह तकनीक सामान्य डेवलपमेंट टूलकिट का हिस्सा बन जाएगी।
डीएआरपीए ने दशकों से किया है निवेश
- शैनन के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग की एडवांस्ड रिसर्च एजेंसी डीएआरपीए पिछले करीब दो दशकों से इस क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न कार्यक्रमों में डीएआरपीए का निवेश 2 अरब डॉलर से अधिक रहा है और इसी लंबी रिसर्च ने आर्गो जैसी तकनीक के लिए आधार तैयार किया है। डीएआरपीए अमेरिकी सेना की अत्याधुनिक रिसर्च एजेंसी है। इंटरनेट और स्टील्थ विमान जैसी कई महत्वपूर्ण तकनीकों के विकास में भी इसकी भूमिका रही है।
- पिछले साल पेंटागन के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी एमिल माइकल ने डीएआरपीए के एक सॉफ्टवेयर सम्मेलन में रिकॉर्डेड संबोधन के दौरान अटलांटा की तकनीक के पीछे मौजूद गणित को सैन्य क्षेत्र का भविष्य बताया था। उन्होंने इसे अमेरिकी रक्षा विभाग की साइबर सुरक्षा के लिए ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ बनाने की इच्छा भी जताई थी।
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