AI के दुष्प्रभाव: इंसानों को कम क्रिएटिव बना रहा AI, हैरान करने वाली है नई स्टडी

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Mon, 12 May 2025 01:49 PM IST
सार

शोध के अनुसार, जब लोग AI पर बहुत ज्यादा भरोसा करने लगते हैं, तो उनकी सोच समस्या सुलझाने और विश्लेषण करने से हटकर AI के उत्तर की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने तक सीमित हो जाती है। यह बदलाव हमारे निर्णय लेने और आलोचनात्मक सोचने की क्षमताओं को कमजोर कर सकता है, जिससे मानसिक चुस्ती पर नकारात्मक असर पड़ता है।

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AI making humans less creative New study reveals shocking truth
AI - फोटो : AI

    विस्तार

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हमारी जिंदगी को कई मायनों में आसान बना दिया है। ChatGPT और Google Gemini जैसे टूल्स ने न केवल कामकाज की रफ्तार बढ़ाई है बल्कि हर सेक्टर में AI की मांग को भी आसमान पर पहुंचा दिया है। कोडिंग से लेकर इनोवेटिव लर्निंग तक, AI आज हर जगह अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है, लेकिन जहां एक ओर यह तकनीक हमारे कार्यों को आसान बना रही है, वहीं दूसरी ओर यह इंसानों की रचनात्मकता और मानसिक क्षमता को नुकसान भी पहुंचा सकती है।

    Microsoft और Carnegie Mellon University द्वारा किए गए एक हालिया शोध में यह सामने आया है कि जनरेटिव AI का अत्यधिक उपयोग हमारी सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इस अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि अगर हमने तकनीक का संतुलित उपयोग नहीं किया, तो यह हमारे दिमाग की वह क्षमताएं कमजोर कर सकती है जो अनुभव के साथ और अधिक तेज होती हैं।

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    शोध के अनुसार, जब लोग AI पर बहुत ज्यादा भरोसा करने लगते हैं, तो उनकी सोच समस्या सुलझाने और विश्लेषण करने से हटकर AI के उत्तर की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने तक सीमित हो जाती है। यह बदलाव हमारे निर्णय लेने और आलोचनात्मक सोचने की क्षमताओं को कमजोर कर सकता है, जिससे मानसिक चुस्ती पर नकारात्मक असर पड़ता है।

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