नई तकनीक से नई मुसीबत: 5जी नेटवर्क से प्रभावित हो सकती हैं सैटेलाइट टीवी की सेवाएं

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Tue, 16 Mar 2021 04:45 PM IST
सार

टीवी ब्रॉडकास्ट में 3.7GHz से 4.2GHz तक की फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल होता है जो कि सैटेलाइट से टीवी पर डाउनलिंक कराता है और खास बात यह है कि 5जी के लिए 3.00GHz से 3.7GHz तक की फ्रीक्वेंसी का चुनाव हुआ है

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5G services in India may disrupt satellite TV market and viewing all you need to know
5G Network - फोटो : Pixabay

    विस्तार

    भारत में 5जी नेटवर्क की पूरी तैयारियां कर ली गई हैं। स्पेक्ट्रम की नीलामी भी हो गई है। एयरटेल और जियो जैसी दो बड़ी टेलीकॉम कंपनियों ने 5जी का टेस्ट और लाइव डेमो भी दिखा दिया है, लेकिन इन सबके बीच एक बड़ा सवाल है जो कहीं दब गया है। इंटरनेट के लिए तो 5जी बड़े काम का साबित होने वाला है लेकिन टीवी ब्रॉडकॉस्ट के लिए यह उतना ही नुकसानदायक भी हो सकता है। 5जी नेटवर्क के कारण टीवी ब्रॉडकास्टिंग के सिग्नल में दिक्कत आ सकती है और क्वॉलिटी भी खराब हो सकती है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं...

    टीवी ब्रॉडकास्ट में स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल

    टीवी ब्रॉडकास्ट में 3.7GHz से 4.2GHz तक की फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल होता है जो कि सैटेलाइट से टीवी पर डाउनलिंक कराता है और खास बात यह है कि 5जी के लिए 3.00GHz से 3.7GHz तक की फ्रीक्वेंसी का चुनाव हुआ है। इसका सीधा असर 900 चैनल पर पड़ेगा। इस संबंध में इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (IBF) ने दूरसंचार विभाग और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को एक प्रजेंटेशन दिया है जिसमें 5जी स्पेक्ट्रम से टीवी ब्रॉडकास्टिंग में आने वाली दिक्कतों के बारे में बताया गया है।

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    आमतौर पर सभी सी बैंड सैटेलाइट डाउनलिंक के लिए 3.7GHz और 4.2GHz फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करते हैं और अधिकतर टीवी चैनल 3.7GHz और 4.9GHz के बीच काम करते हैं। अब 3.7GHz से सैटेलाइट टीवी शुरू होते हैं और 5जी इसी फ्रीक्वेंसी पर खत्म होता है। ऐसे में यदि इन फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल 5जी के लिए होगा तो टीवी सेवाएं प्रभावित होंगी।

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    टेलीकॉम कंपनियों को करना होगा फिल्टर का इस्तेमाल

    एक्सपर्ट का मानना है कि भारत में 5जी के लिए 3.6GHz तक की फ्रीक्वेंसी की ही इजाजत दी जानी चाहिए। वहीं टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एक अधिकारी ने अपने एक बयान में कहा है कि टेलीकॉम कंपनियों को फिल्टर का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि दूसरी कंपनियों को दिक्कत ना हो, हालांकि अभी तक सरकार की ओर से यह साफ नहीं किया गया है कि 5जी के लिए कितने गीगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल होगा, लेकिन कहा जा रहा है यह 3.3GHz से 3.6GHz तक होगा।

    विकल्प क्या हैं?

    अब सवाल यह है कि यदि इसी फ्रीक्वेंसी पर 5जी नेटवर्क शुरू हो रहा है तो फिर ऐसा क्या इंतजाम किया जाए जिससे सैटेलाइट टीवी की सेवाएं बाधित ना हों तो इसका जवाब यह है कि सैटेलाइट टीवी को अधिक फ्रीक्वेंसी पर शिफ्ट करना होगा या फिर सभी केबल में बैंज पास फिल्टर का इस्तेमाल करना होगा जो कि अपने आप में एक बड़ा और उलझाने वाला काम है। तीसरा विकल्प यह है कि सरकार सैटेलाइट टीवी के लिए नई फ्रीक्वेंसी जारी करे, लेकिन इसके साथ भी दिक्कत है कि सैटेलाइट टीवी कंपनियों को काफी खर्च करने पड़ेंगे जिसके लिए वे सरकार से सब्सिडी की मांग भी कर सकती हैं। यदि ये तीनों विकल्प नहीं अपनाए जाते हैं तो कई सैटेलाइट टीवी कंपनियों को अपनी दुकान बंद करनी पड़ सकती है।

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