NoMoPhobia: देश के प्रत्येक चार में से तीन लोगों को है 'नोमोफोबिया', हमेशा सताता है फोन से दूर होने का डर
स्मार्टफोन आज लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा हो गया है। स्मार्टफोन के बिना लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। स्मार्टफोन को आज लोग किसी भी कीमत पर अपने से दूर नहीं करना चाहते हैं। अब यह बात एक ताजा सर्वे में भी साबित हो गया है।

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स्मार्टफोन आज लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा हो गया है। स्मार्टफोन के बिना लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। स्मार्टफोन को आज लोग किसी भी कीमत पर अपने से दूर नहीं करना चाहते हैं। अब यह बात एक ताजा सर्वे में भी साबित हो गया है। हाल ही में ओप्पो और काउंटरप्वाइंट ने स्मार्टफोन की लत को लेकर एक सर्वे किया था। इस सर्वे को 'NoMoPhobia' नाम दिया गया था।
सर्वे के मुताबिक 65 फीसदी यूजर्स अपने स्मार्टफोन से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। उन्हें हमेशा इस बात का डर सताता है कि यह का इंटरनेट खत्म ना हो जाए, फोन खो ना जाए और बैटरी खत्म ना हो जाए। NoMoPhobia नो मोबाइल फोबिया का शॉर्ट टर्म है। यह एक तरह का डर है जिसमें लोगों को मोबाइल के काम ना करने का भय बना रहता है।
ओप्पो और Counterpoint के इस सर्वे में 1,500 लोगों ने जवाब दिए थे। इस सर्वे में शामिल 60 फीसदी लोगों ने माना कि खराब बैटरी की वजह से वो अपना स्मार्टफोन रिप्लेस करने के लिए तैयार हैं। इस सर्वे पर ओप्पो इंडिया के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर दमयंत सिंह खनोरिया ने कहा कि यह सर्वे हमें बेहतर बैटरी लाइफ वाले फोन लॉन्च करने के लिए प्रेरित किया है।
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