US फेडरल ट्रेड कमीशन ने सोशल मीडिया कंपनियों को किया तलब, विज्ञापनों की स्क्रीनिंग का मांगा ब्योरा

विशाल मैथिल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीविशाल मैथिल
Fri, 17 Mar 2023 01:38 PM IST
सार

US FTC: यूएस फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) ने प्रमुख आठ सोशल मीडिया और वीडियो स्ट्रीमिंग फर्मों से भ्रामक विज्ञापनों के लिए प्लेटफार्म की स्क्रीनिंग से संबंधित जानकारी मांगी है।

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US FTC Issued Orders to social media companies to Provide Information on Misleading Advertisements
Social media - फोटो : सोशल मीडिया

    विस्तार

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाम लगाने की कबायत अब तेज हो गई है। भारत में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और स्मार्टफोन कंपनियों की मनमानी को रोकने के लिए नई सुरक्षा नीति का प्लान किया जा रहा है। अब अमेरिका फेडरल ट्रेड कमीशन ने मेटा, ट्विटर, टिकटॉक और यूट्यूब सहित आठ सोशल मीडिया और वीडियो स्ट्रीमिंग फर्मों को तलब किया है। कमीशन ने इन फर्मों से भ्रामक विज्ञापनों के लिए प्लेटफार्म की स्क्रीनिंग से संबंधित जानकारी मांगी है।

    यूएस फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) ने प्रमुख आठ सोशल मीडिया और वीडियो स्ट्रीमिंग फर्मों को इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए हैं। एफटीसी ने स्नैप, अमेजन के स्वामित्व वाली Twitch, पिनटेरेस्ट और इंस्टाग्राम जैसी कंपनियों को भी भ्रामक विज्ञापनों की स्क्रीनिंग से संबंधित जानकारी देने के आदेश दिए गए हैं। एफटीसी ने कहा कि फर्म धोखे की संभावना वाले उत्पादों और सेवाओं की श्रेणियों सहित विज्ञापन राजस्व और व्यूज की संख्या जैसी जानकारी प्रदान करें।

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    एफटीसी के उपभोक्ता संरक्षण ब्यूरो के निदेशक सैमुअल लेविन ने कहा कि सोशल मीडिया नकली उत्पादों और अन्य घोटालों का दावा करने वाले स्कैमर्स के लिए सोने की खान बन रहा है, जिसने हाल के वर्षों में उपभोक्ताओं को भारी कीमत चुकानी पड़ी है।

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    भारत बनाएगा नए सुरक्षा नियम

    एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि जासूसी और यूजर्स डाटा के दुरुपयोग के बारे में चिंताओं के बीच भारत का आईटी मंत्रालयनए सुरक्षा नियमों पर विचार कर रहा है, क्योंकि यह जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं है। नए सुरक्षा नियमों के तहत, स्मार्टफोन निर्माताओं को पहले से इंस्टॉल किए गए एप्स को हटाने और प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट की अनिवार्य स्क्रीनिंग की अनुमति दी जा सकेगी।

    वहीं केंद्र सरकार गलत सूचनाओं को रोकने जैसे वायरल होने वाले भ्रामक वीडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर तैयार की जाने वाली सामग्री के प्रसार को रोकना की योजना भी बना रही है। इसके लिए मंत्रालय इंटरनेट कंपनियों, सरकार और फैक्ट चेकर्स के साथ मिलकर एक ढांचा तैयार करेगा।

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