Twitter: कर्नाटक हाई कोर्ट से ट्विटर की याचिका खारिज, जुर्माना भी लगा, केंद्रीय मंत्री ने डोर्सी को घेरा

विशाल मैथिल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीविशाल मैथिल
Fri, 30 Jun 2023 08:15 PM IST
सार

न्यायालय ने सोशल मीडिया कंपनी Twitter से कहा है कि सरकार के पास ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी करने की शक्ति है। न्यायालय ने ट्विटर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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Twitter plea against Govt dismissed by Karnataka HC company fined
Twitter - फोटो : सोशल मीडिया

    विस्तार

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को ट्विटर (Twitter) की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें प्लेटफॉर्म पर कुछ आपत्तिजनक अकाउंट और ट्वीट्स को ब्लॉक करने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने सोशल मीडिया कंपनी से कहा है कि सरकार के पास ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी करने की शक्ति है। न्यायालय ने ट्विटर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

    सरकार के पास ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी करने की शक्ति- उच्च न्यायालय

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत जारी किए गए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आदेश को सही बताया। न्यायालय ने ट्विटर इंक द्वारा दायर याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सरकार के पास ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी करने की शक्ति है। उच्च न्यायालय ने ट्विटर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जिसे कंपनी को 45 दिनों के भीतर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को भुगतान करने का आदेश दिया गया है।

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    सरकारी आदेशों का पालन सभी प्लेटफार्मों के लिए जरूरी- राजीव चंद्रशेखर

    इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने ट्विटर की याचिका खारिज होने पर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि कुछ अकाउंट को ब्लॉक करने के सरकारी नोटिस के खिलाफ ट्विटर का अदालत में जाना "कल्पना का हिस्सा" था, जिसे कंपनी के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी ने पेश किया था। कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आदेश स्पष्ट रूप से बताता है कि सरकारी आदेश का अनुपालन न करना कोई विकल्प नहीं है और सभी बड़े और छोटे प्लेटफार्मों को भारतीय कानूनों का पालन करने की आवश्यकता है।

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    बता दें कि ट्विटर के पूर्व सीईओ डोर्सी ने दावा किया था कि भारत सरकार ने उन पोस्टों को हटाने और अकाउंट को ब्लॉक करने के अनुरोधों का पालन नहीं करने के लिए दबाव डाला और कर्मचारियों पर शटडाउन और छापे की धमकियों दी थीं। उन्होंने 2020 और 2021 में नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन में भी सरकार की आलोचना की थी। जिसके बाद ट्विटर ने सरकार के आदेशों के खिलाफ कोर्ट में जाने का फैसला किया था।

    यह है पूरा मामला

    ट्विटर ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी किए गए टेक डाउन आदेशों के खिलाफ याचिका दायर की थी। ट्विटर ने जून 2022 में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्वीट्स, अकाउंट्स और यूआरएल को हटाने के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

    याचिका में ट्विटर ने दावा किया था कि केंद्र को उन ट्विटर हैंडल के मालिकों को नोटिस जारी करने की आवश्यकता थी जिनके खिलाफ ट्विटर पर अकाउंट ब्लॉकिंग आदेश जारी किए गए थे। ट्विटर ने यह भी दावा किया था कि उसे अपने इन अकाउंट्स को टेकडाउन के बारे में जानकारी देने से भी रोका गया था।

    देश के कानून का पालन किया जाना चाहिए : वैष्णव

    संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्वीट किया, माननीय अदालत ने हमारे रुख को बरकरार रखा है। देश के कानून का पालन किया जाना चाहिए।

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