दोस्तों को छुट्टी मनाते देख, जलता है दिल तो फेसबुक को दोष दीजिए

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आपको शायद अहसास भी न हो लेकिन फेसबुक जैसी सोशल मीडिया साइटें आपकी दिमागी सेहत पर बुरा असर डालती हैं। पांच में से एक इंसान की शिकायत होती है कि उसे फेसुबक पर अपने दोस्तों की अच्छी, मस्ती भरी तस्वीरें देख कर दुख होता है और वो तनाव में चला जाता है।
प्रिवलेज होम इंश्योरेंस द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक लगभग 70 लाख लोगों को ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक पर अपने दोस्तों को उनसे बेहतर जिंदगी जीते और नई-नई जगह घूमते देख कर खुद की जिंदगी में कमी महसूस होती है।
वे मजबूरी में इन साइटों से छुटकारा भी नहीं पा सकते। वो अकाउंट भी डीएक्टीवेट नहीं करना चाहते क्योंकि उन्हें डर है, ऐसा करने से वे दुनियाभर में हो रही चीजों से खुद को अपडेट नहीं रख पाएंगे।
तस्वीरों पर लाइक न आने से क्यों दुखी हो जाते हैं लोग

सर्वे ये भी कहता है कि दस में से 9 लोग हर बार सेल्फी लेने से पहले अपने लुक्स पर ध्यान देते हैं, मेकअप या हेयर जेल तक लगाते हैं, ताकि उनकी तस्वीरें अच्छी ही आएं। उनमें से 10% लोगों का ये भी मानना है कि इतनी मेहनत के बाद अगर तस्वीर पर लाइक, कमेंट न आए तो भी उन्हें बहुत ठेस पहुंचती है।
हालांकि सोशल मीडिया इस्तेमाल कjने के कोई नियम-कानून नहीं बनाए गए हैं लेकिन कुछ लोगों के लिए ये भी सिरदर्द बनता जा रहा है।
कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें लगता है कि उन्हें दोस्त को फेसबुक या ट्विटर पर भी बर्थ डे विश करना चाहिए, भले ही उन्होंने खुद उस इंसान के पास जाकर पहले ही विश कर दिया हो।
इंसान को खुद को दूर कर रहा है सोशल मीडिया

कुछ लोग कहते हैं कि वो चाह कर भी उस इंसान की फ्रेंड रिक्वेस्ट को नकार नहीं पाते जिसे वो बिल्कुल पसंद नहीं करते। ये सब उनके लिए नियम जैसा बन गया है।
60% लोग ऐसे भी हैं जो अक्सर अपने पूर्व प्रेमी, पुराने दोस्तों की तस्वीरों को भी ताकते रहते हैं। कई लोगों को तो सुबह उठ कर इस बात का पछतावा हुआ कि पिछली रात शराब के नशे में उन्होंने क्या उल्टा-सीधा पोस्ट कर दिया।
प्रीवलेज होम इंश्योरेंस के मुखिया डैन सिंपसन कहते हैं,''लोग लगातार इस बात को लेकर परेशान होते जा रहे हैं कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं, या उन्हें किस तरह देखते हैं या उनकी लोकप्रियता कितनी है। 'लाइक' के बल पर वे ये सब धारणा बनाते हैं। ''
वक्त ऐसा आ गया है कि अगर किसी का सोशल साइट पर अकाउंट न हो तो उसे तकनीक में पिछड़ा हुआ मानते हैं। लोगों के लिए ये स्टेटस सिंबल बन गया है। यही सब डर औऱ चिंताएं इसान को परेशान करती जा रही हैं। सोशल मीडिया लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का काम तो कर रहा है लेकिन खुद से दूर करता जा रहा है।