फेसबुक इस्तेमाल करते हैं तो ये भी जानिए कैसे बनी दुनिया की पहली सोशल साइट

टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Sun, 06 Mar 2016 12:05 PM IST
सार
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first social networking site in the world
फेसबुक

    विस्तार

    आज सोशल नेटवर्क का ज़माना है। अपने दोस्तों से, रिश्तेदारों से, अनजान लोगों से हर वक़्त जुड़े रहते हैं आप। अपनी ज़िंदगी की तमाम बातें, क़िस्से उनसे साझा करते हैं। अपनी निजी ज़िंदगी के तमाम पलों की तस्वीरों को बाक़ी दुनिया से शेयर करते हैं।

    सज-धजकर या फिर सोकर उठे, एक सेल्फ़ी ली और फ़ेसबुक पर डाल दी। दोस्तों के साथ पिकनिक पर गए और इंस्टाग्राम पर तस्वीरें, दूसरों के लिए भी पेश कर दीं। किसी बड़ी बहस में शामिल हुए और ट्विटर पर फ़ौरन अपनी मौजूदगी ज़ाहिर कर दी।

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    मगर, कभी आपके ज़ेहन में सवाल आया कि आख़िर वेब पर तस्वीरें साझा करने का ये चलन कब शुरू हुआ? किसने अपनी निजी ज़िंदगी की तस्वीर, बाक़ी दुनिया से शेयर की थी।

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    चलिए, आपको सुनाते हैं वर्ल्ड वाइड वेब पर डाली गई निजी पलों की पहली तस्वीर का क़िस्सा।

    सर्न प्रयोगशाला का लार्ज हाइड्रन कोलाइडर

    फेसबुक इस्तेमाल करते हैं तो ये भी जानिए कैसे बनी दुनिया की पहली सोशल साइट

    बात 1989 की है। स्विटज़रलैंड की मशहूर प्रयोगशाला यूरोपियन ऑर्गनाइज़ेशन फॉर न्यूक्लीयर रीसर्च यानी 'सर्न' के कंप्यूटर वैज्ञानिक सिल्वानो डे गेन्नारो ने लैब में काम करने वालों के लिए एक म्यूज़िक फ़ेस्टिवल की शुरुआत की थी।

    वैज्ञानिक प्रयोगों से बोर हो रहे लोग थोड़ी मौज-मस्ती करें, यही इसका मक़सद था। इसका नाम उन्होंने सर्न हारड्रॉनिक फ़ेस्टिवल रखा था। सिल्वानो ने इस अंतरराष्ट्रीय लैब में काम करने वाले सभी लोगों को म्यूज़िक फ़ेस्टिवल में शामिल होने का न्यौता दिया।

    इसी फ़ेस्टिवल में शामिल चार लड़कियों के ग्रुप की तस्वीर ही वो पहली निजी ज़िंदगी की तस्वीर थी, जिसे वेब पर अपलोड किया गया था। ख़ुद सिल्वानों को इसका एहसास बहुत बाद में हुआ।

    वीडियो इतिहास का हिस्सा

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    सिल्वानो की पत्नी मिशेल, सर्न के उस पहले संगीत समारोह को आज भी शिद्दत से याद करती हैं। वो उस वक़्त वहां दुभाषिया सेक्रेटरी के तौर पर काम करती थीं। उनकी एक सहेली उनके पास आईं थी एक गुज़ारिश लेकर।

    मिशेल की दोस्त, लैब के एक वैज्ञानिक पर फिदा थीं। वो चाहती थीं कि उसे रिझाने के लिए मिशेल, अपने ब्वायफ्रैंड सिल्वानो से एक गीत लिखवा दें। फिर इस गाने को पेश करने के लिए उन्होंने मिशेल से भी स्टेज पर आने को कहा।

    किसी ने नहीं सोचा था कि चार लड़कियों के गीत का वीडियो इतिहास का हिस्सा बन जाएगा।

    अफ़सोस ये कि ख़ास तौर से लिखाए गए इस गीत की पेशकश को उन वैज्ञानिक महोदय ने देखा ही नहीं। उस वक़्त उनकी कहीं ड्यूटी लगी हुई थी। मगर मिशेल और उनकी दोस्तों की स्टेज परफॉर्मेंस की तस्वीर हमेशा के लिए यादगार बन गई। मिशेल और उनकी दोस्तों के परफ़ॉर्मेंस को ख़ूब सराहा गया। इसी से शुरुआत हुई सर्न की महामशीन 'लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर' पर आधारित नाटक, 'लेस हॉरिबल्स सर्नेट्स' की।

    मिशेल और उनकी दोस्तों ने बड़े बालों वाले जूड़े बनाए, पुराने चलन वाली पोशाकें पहनीं और फ़िजिक्स के गाने गाए। जमकर मस्ती हुई। ख़ूब तालियां बजीं।

    सर्न की लैब में काम करने वाली लिन वेरोन्यू, उन दिनों को याद करती हैं।

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