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फेसबुक का दोहरा रवैया: फर्जी राजनीतिक पोस्ट पर नहीं करता कार्रवाई, पूर्व कर्मचारी ने खोली पोल

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रदीप पाण्डेय Updated Wed, 14 Apr 2021 05:55 PM IST

सार

होंडुरास के राष्ट्रपति जुआन अर्नाल्डो हर्नांडेज ने 2018 में अपने समर्थन में 90 फीसदी से ज्यादा फर्जी इंगेजमेंट वाले पोस्ट अपने ही ऑफिस से करवाए थे।
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मार्क जुकरबर्ग
मार्क जुकरबर्ग - फोटो : Social Media
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विस्तार

पक्षपात को लेकर फेसबुक पर अक्सर आरोप लगते हैं। पक्षपात के आरोप के बाद ही पिछले साल अक्टूबर में फेसबुक इंडिया की सार्वजनिक नीति मामलों की प्रमुख अंखी दास ने पद से इस्तीफा दिया था। उनपर फेसबुक पर नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों पर रोक लगाने के मामले में कथित तौर पर पक्षपात का आरोप था। अपने ऊपर लगने वाले पक्षपात के सभी आरोपों से फेसबुक हमेशा इनकार करता रहा है, लेकिन इस बार मामला थोड़ा पेचीदा हो गया है। फेसबुक ने 25 देशों में अपने प्लेटफॉर्म के सियासी दुरुपयोग की छूट दी है। फेसबुक ने बड़े देशों को खुश करने के लिए छोटे देशों के साथ मनमानी की है।
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द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक ने करीब 25 देशों के नेताओं को अपने विरोधियों के पोस्ट डालने और जनता को गुमराह करने की पूरी छूट दे दी है और निजी तौर पर समर्थन भी किया है। गार्जियन ने इस बात का खुलासा फेसबुक की पूर्व डाटा साइंटिस्ट सोफी झांग के हवाले से किया है। बता दें कि सोफी को पिछले साल कंपनी ने सितंबर में खराब प्रदर्शन का बहाना बनाकर नौकरी से निकाल दिया था। 


झांग ने अपने पत्र में विस्तार से बताया है कि फेसबुक ने किस तरह संपन्न देशों को प्रभावित करने के लिए गरीब और छोटे देशों को अपने प्लेटफार्म के दुरुपयोग की इजाजत दी। झांग का दावा है कि फेसबुक ने अमेरिका, ताइवान, दक्षिण कोरिया और पोलैंड जैसे देशों में राजनीतिक हस्तक्षेप करने वाले पोस्ट पर तत्परता दिखाई जबकि अफगानिस्तान, इराक और मंगोलिया के मामलों में उसने हाथ भी नहीं लगाया।

झांग के मुताबिक फेसबुक पर बड़ी संख्या में झूठे दावे, बिजनेस हाउस और ब्रांड्स द्वारा गलत पोस्ट किए गए और इनका इस्तेमाल राजनीतिक तौर पर हुआ लेकिन फेसबुक ने इस पर बैन नहीं लगाया। झांग का दावा है कि सेंट्रल अमेरिकी देश होंडुरास के राष्ट्रपति जुआन अर्नाल्डो हर्नांडेज ने 2018 में अपने समर्थन में 90 फीसदी से ज्यादा फर्जी इंगेजमेंट वाले पोस्ट अपने ही ऑफिस से करवाए थे। पूरे ऑफिस के लोग फर्जी लाइक और कॉमेंट करने में लगे थे। इसकी शिकायत मिलने के बाद भी फेसबुक ने कार्रवाई नहीं की, हालांकि फेसबुक के प्रवक्ता लिज बर्जुओइस ने इस आरोप को बेतुका बताया है।
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