Facebook: फेसबुक के पूर्व कर्मचारी ने खोला जकरबर्ग के साम्राज्य का काला चिट्ठा, खुल कई राज

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Tue, 18 Mar 2025 03:46 PM IST
सार

मार्क जकरबर्ग एवं उनकी टीम द्वारा नैतिकता से अधिक विकास को प्राथमिकता देने की सच्चाई बताई गई है। इस खुलासे में फेसबुक की डेटा गोपनीयता में विफलता, राजनीतिक हेरफेर और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसी कई गंभीर समस्याओं का पर्दाफाश किया गया है।

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Ex Facebook employee reveals the dark secrets of Mark Zuckerbergs empire details in hindi
Mark Zuckerberg - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    फेसबुक (अब मेटा) की पूर्व अधिकारी सारा विन-विलियम्स ने अपनी नई किताब "Careless People: A Story of Where I Used to Work" में सोशल मीडिया दिग्गज के कई ऐसे पहलुओं को उजागर किया है जिनके बारे में शायद ही किसी को कोई जानकारी है। इस किताब में फेसबुक के टॉक्सिक वर्क कल्चर, आक्रामक विस्तार रणनीतियों और मार्क जकरबर्ग एवं उनकी टीम द्वारा नैतिकता से अधिक विकास को प्राथमिकता देने की सच्चाई बताई गई है। इस खुलासे में फेसबुक की डेटा गोपनीयता में विफलता, राजनीतिक हेरफेर और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसी कई गंभीर समस्याओं का पर्दाफाश किया गया है।

    2011 से 2018 तक फेसबुक में कार्यरत विन-विलियम्स ने कंपनी को लगभग 'संप्रदाय' जैसा बताया, जहां कर्मचारियों से उम्मीद की जाती थी कि वे कंपनी के मिशन के लिए पूर्ण रूप से समर्पित रहें। एक चौंकाने वाली घटना में, उन्होंने बताया कि वे प्रसव पीड़ा के दौरान भी फेसबुक के विस्तार पर एक महत्वपूर्ण मेमो लिख रही थीं।

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    उनके पति ने विरोध किया, लेकिन डॉक्टर को खुद आकर उनका लैपटॉप बंद करना पड़ा। उन्होंने शेरिल सैंडबर्ग की 'लीन इन' विचारधारा की भी आलोचना की, जिसमें महिलाओं को अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित किया गया, लेकिन हकीकत में यह एक स्व-शोषणकारी कार्यसंस्कृति को बढ़ावा दे रही थी।

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    इस किताब में सबसे चौंकाने वाले खुलासों में से एक है म्यांमार में फेसबुक की भूमिका, जहां यह प्लेटफॉर्म घृणा फैलाने और हिंसा भड़काने का माध्यम बन गया। मार्क जकरबर्ग की "Free Basics" योजना को विकासशील देशों में मुफ्त इंटरनेट पहुंचाने की कोशिश के रूप में पेश किया गया था, लेकिन यह असल में फेसबुक के वैश्विक वर्चस्व का एक तरीका था।

    विन-विलियम्स ने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्होंने फेसबुक के 'दुनिया को जोड़ने' के मिशन पर विश्वास किया, लेकिन बाद में उन्होंने देखा कि म्यांमार में फेसबुक सैन्य तानाशाही के लिए घृणा फैलाने और रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा भड़काने का उपकरण बन गया। उन्होंने लिखा: "अगर फेसबुक म्यांमार में नहीं आया होता, तो यह देश एक बेहतर स्थान होता।"

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