Digital Arrest: डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुई साइबर एक्सपर्ट, अपराधियों ने इस तरह ठगे 55 लाख रुपये
अक्सर आप सुनते या पढ़ते होंगे कि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो गई। मगर साइबर एक्सपर्ट के साथ ही डिजिटल अरेस्ट हो जाए तो मामला गंभीर हो सकता है। आगे खबर में जानिए किस तरह से साइबर अपराधियों ने वारदात को अंजाम दिया।

विस्तार
साइबर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए लगातार नए-नए तरीकों को अपना रहे हैं। ऐसे में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें साइबर एक्सपर्ट ही डिजिटल अरेस्ट के झांसे में फंस गई। साइबर अपराधियों ने एनबीसीसी यानी नेशनल बिल्डिंग्स कंट्रक्शन कॉर्पोरेशन की डायरेक्टर को डिजिटल अरेस्ट करके उनसे 55 लाख रुपये की मोटी रकम ठग ली। आपको बता दें कि डायरेक्टर एनबीसीसी में खुद साइबर मामलों को देखती हैं, मगर खुद ही साइबर ठगी के जाल में फंस गई।
इस मामले में दिल्ली पुलिस की इंटेलीजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेंशन्स यानी आईएफएसओ यूनिट ने अपराधियों का भंडाफोड़ करते हुए तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में आईएफएसओ के डीसीपी डॉ. हेमंत तिवारी ने बताया कि 12 सितंबर को एनबीसीसी की डॉयरेक्टर ने खुद के साथ डिजिटल अरेस्ट होने की शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस के मुताबिक, यह वारदात 9 सितंबर को हुई थी, एक आदमी ने उन्होंने फोन किया खुद को मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 स्थित कस्टम ऑफिस का अधिकारी बताया। फोन करने वाले ने कहा कि 6 सितंबर को एक पार्सल जब्त किया गया है, जिसमें 16 फर्जी पासपोर्ट, 58 एटीएम कार्ड और 40 ग्राम एमडीएमए बरामद किया गया है। साथ ही फोन करने वाले ने कहा कि पार्सल पर आपका नाम है। इतना ही नहीं, फोन करने वाले एनबीसीसी की डॉयरेक्टर को कहा कि मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है। ऐसे में सरेंडर करना होगा। साइबर अपराधी ने डॉयरेक्टर को डराने के लिए यह भी कहा कि उनके खिलाफ सीबीआई जांच भी चल रही है। ऐसे में गिरफ्तारी तक उनके ऊपर वीडियो कॉल के जरिए निगरानी रखी जाएगी।