Alert: एंड्रॉयड मैलवेयर से सावधान, बड़ी चालाकी से चुराई जाती है कार्ड डिटेल और फिर होता है बड़ा खेल

अमित कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीअमित कुमार
Sat, 24 Aug 2024 05:39 PM IST
सार

साइबर अपराधी एक नए मैलवेयर को लेकर आए हैं। एंड्रॉयड मैलवेयर के जरिए आसानी से डिवाइस से बैकिंग डिटेल चुराई जाती है। इसके बाद जालसाज आसानी से लोगों के साथ ठगी करते हैं। जानिए क्या है इसकी पूरी डिटेल।

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android malware uses smartphones nfc reader to steal payment card details
Alert - फोटो : FREEPIK

    विस्तार

    टेक बाजार में नई-नई तकनीक यूजर्स के काम को आसान बना रही है। मगर इसी बीच एक यूजर्स को परेशान करने वाली एक बड़ी जानकारी सामने आई है। दरअसल, एक नया मैलवेयर सामने आया है, इसे एंड्रॉयड मैलवेयर बताया जा रहा है। यह मैलवेयर नियर फील्ड कम्यूनिकेशन यानी एनएफसी को बुरी तरह से प्रभावित करता है। यह मैलवेयर फोन को प्रभावित करके पेमेंट कार्ड डिटेल को चुरा लेता है।

    आपको जानकारी के लिए बता दें कि यह मैलवेयर कार्ड डेटा को चुराकर उसे इकट्ठा करता है। इसके बाद साइबर अपराधी उस डिटेल के जरिए कार्ड का क्लोन बना लेते हैं, फिर लोगों को कंगाल करने का काम शुरू होता है। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल एटीएम और पॉइंट ऑफ सेल मशीनों में किया जाता है।

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    रिपोर्ट्स में इस मैलवैयर को एनगेट नाम दिया गया है। यह मैलवेयर इतना खतरनाक है कि पीड़ित के डिवाइस से चुराई गई जानकारी से कार्ड डिटेल चुराकर एटीएम के जरिए पैसे निकाले जा सकते हैं। रिपोर्ट्स में यह बताया गया है कि इतना खतरनाक मैलवेयर पहली बार देखा गया है। इसकी क्षमता काफी ज्यादा है और यह एक क्लोनिंग कार्ड की तरह काम करता है।

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    रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि साइबर अपराधी फिशिंग अटैक के जरिए यूजर्स से बैंक डिटेल चोरी करते हैं। अपराधी पहले से अपना शिकार चुनते हैं, फिर एसएमएस और लिंक के जरिए लोगों को लूटने की तैयारी होती है। इसके बाद जब यूजर फिशिंग लिंक या एसएमएस के जरिए भेजे गए फर्जी लिंक पर क्लिक करते हैं या फिर उस लिंक के जरिए एप को डाउनलोड करते हैं तो लॉगइन करते हैं तो फिर सारी जानकारी हैकर्स के पास पहुंच जाती है। ऐसे में अपराधी आसानी से अकाउंट का एक्सेस ले लेते हैं।

    कई बार साइबर अपराधी खुद को बैंक कर्मचारी भी बताते हैं, ताकि लोगों को आसानी से भरोसा में लिया जा सके। इसके बाद एनगेड मैलवेयर को डिवाइस में इंस्टाल करवाया जाता है। इस मैलवेयर के जरिए लोगों की पर्सनल जानकारी भी हासिल की जा सकती है।

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